Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को कमजोर रुख के साथ हुई, जहां वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेतों के बीच प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुलते नजर आए। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की सतर्कता साफ दिखाई दी, जिसका असर खासतौर पर कंज्यूमर सेक्टर पर देखने को मिला। सुबह 9:21 बजे सेंसेक्स 625 अंकों या 0.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,891 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 162 अंकों या 0.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,215 पर बना हुआ था। बाजार की इस गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव कंज्यूमर सेक्टर से आया, जहां निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स टॉप लूजर के रूप में उभरा।
इसके अलावा, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी और निफ्टी रियल्टी सेक्टर में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कुछ सेक्टर्स ने मजबूती दिखाई, जिनमें निफ्टी फार्मा, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी पीएसई शामिल रहे। लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिलाजुला रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंकों या 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60,035 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स मामूली 7 अंकों की बढ़त के साथ 17,832 पर पहुंच गया। सेंसेक्स पैक के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट और टाटा स्टील शामिल रहे। वहीं पावर ग्रिड और सन फार्मा ने बाजार में मजबूती दिखाते हुए बढ़त हासिल की।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल रहा। टोक्यो, बैंकॉक, सोल, जकार्ता, हांगकांग और शंघाई जैसे प्रमुख बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इसके विपरीत, अमेरिकी बाजारों ने पिछले सत्र में मजबूती दिखाई थी, जहां डाओ जोन्स 0.69 प्रतिशत और नैस्डैक 1.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजारों पर वैश्विक अनिश्चितताओं का असर बना हुआ है। खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों के मूड को प्रभावित कर रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है। इस तेजी के पीछे ईरान के सख्त रुख को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने हाल ही में बयान दिया कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को ब्लॉक कर दिया है, जो सीजफायर समझौते का उल्लंघन है। उनके अनुसार, ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है और जब तक यह स्थिति समाप्त नहीं होती, तब तक पूर्ण युद्धविराम संभव नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, और इसमें किसी भी प्रकार की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ जाती है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है, जिससे महंगाई और बाजार दोनों प्रभावित होते हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिरता नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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