India Newzealand FTA: वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बीच भारत और New Zealand एक बड़े आर्थिक समझौते की ओर बढ़ रहे हैं। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री Christopher Luxon ने घोषणा की है कि दोनों देश 27 अप्रैल को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आधिकारिक हस्ताक्षर करेंगे। यह समझौता न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा। लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी कर इस महत्वपूर्ण कदम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह समझौता न्यूजीलैंड के निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगा और भारत जैसे विशाल बाजार तक उनकी पहुंच को आसान बनाएगा।
वीडियो में Christopher Luxon ने HamiltonJet के क्राइस्टचर्च स्थित प्लांट का दौरा करते हुए बताया कि यह कंपनी 70 से अधिक देशों में बोट के लिए जेट इंजन निर्यात करती है। फिलहाल कंपनी को भारत में निर्यात के दौरान टैरिफ का सामना करना पड़ता है। एफटीए लागू होने के बाद वाटर जेट्स पर लगभग 8.25 प्रतिशत का टैरिफ भारत को निर्यात के लिए लागू होगा, जिससे व्यापार संरचना अधिक स्पष्ट और प्रतिस्पर्धी बनेगी। इस बदलाव से उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
इस समझौते को लेकर Todd McClay ने भी इसे “एक पीढ़ी में एक बार आने वाला अवसर” बताया है। उन्होंने कहा कि भारत, जिसकी आबादी 1.4 अरब से अधिक है, न्यूजीलैंड के निर्यातकों के लिए एक विशाल और तेजी से बढ़ता बाजार प्रस्तुत करता है। भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर बताया जा रहा है, ऐसे में यह एफटीए न्यूजीलैंड के लिए दीर्घकालिक आर्थिक लाभ सुनिश्चित कर सकता है। इसके जरिए कृषि, डेयरी, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई संभावनाएं खुलेंगी।
Todd McClay के अनुसार, इस समझौते का लीगल वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है और अब केवल औपचारिक हस्ताक्षर बाकी हैं। 27 अप्रैल को होने वाले इस कार्यक्रम में दोनों देशों के व्यापार और उद्योग जगत के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल होंगे। समझौते पर हस्ताक्षर के बाद न्यूजीलैंड में संसदीय संधि समीक्षा की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे जनता और नीति-निर्माताओं को इस समझौते का विस्तृत मूल्यांकन करने का अवसर मिलेगा।
दुनिया भर में आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच, यह एफटीए दोनों देशों के लिए स्थिरता और विकास का माध्यम बन सकता है। India और New Zealand के बीच यह समझौता न केवल व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करेगा, बल्कि आपसी निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समझौते वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने और नए व्यापारिक मार्ग खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अन्य प्रमुख खबरें
2026-06-08
2026-06-08
2026-06-08
West Asia Crisis का असर: सेंसेक्स 800 अंक टूटा, Nifty 23,100 के नीचे; निवेशकों में बढ़ी घबराहट
2026-06-08
2026-06-07
वैश्विक तनावों के बीच Indian Economy मजबूत, 682 अरब डॉलर के Forex Reserve ने बढ़ाया भरोसा
2026-06-05
2026-06-05
Foreign Investment को बढ़ावा देने की बड़ी पहल: आरबीआई ने NRI-OCI के लिए बढ़ाई इक्विटी निवेश सीमा
2026-06-05
2026-06-05
2026-06-05
2026-06-05
India-UK partnership को मिलेगी नई मजबूती: क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी सेंटर का शुभारंभ
2026-06-04
2027 तक देशभर में 5,000 ई85 फ्यूल स्टेशन: फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति से बदलेगी भारत की मोबिलिटी
2026-06-04
Energy Crisis भी नहीं रोक पाया भारतीय कंपनियों का दम, FY26 की चौथी तिमाही में मुनाफा 14% उछला
2026-06-04
मध्य पूर्व में घटा तनाव, Crude Oil की कीमतों में तेज गिरावट, निवेशकों का भरोसा लौटा
2026-06-04