सीजफायर का असर: इजरायल-लेबनान तनाव घटते ही शेयर बाजार में लौटी रौनक, निवेशकों में सतर्कता के साथ उत्साह

खबर सार :-
इजरायल-लेबनान युद्धविराम और तेल कीमतों में गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार को अल्पकालिक राहत दी है। सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की बढ़त से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते सतर्क रहना जरूरी है। बाजार के ऊंचे स्तर को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना ही समझदारी भरा कदम होगा।

सीजफायर का असर: इजरायल-लेबनान तनाव घटते ही शेयर बाजार में लौटी रौनक, निवेशकों में सतर्कता के साथ उत्साह
खबर विस्तार : -

Sensex Nifty Rise: भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को हल्की मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की और दिन बढ़ने के साथ तेजी का रुख बरकरार रखा। वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों, खासकर इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा ने बाजार को सहारा दिया। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया।

भारतीय शेयर बाजार में आज शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 77,976 के स्तर पर खुला, जो मामूली गिरावट दर्शाता था, लेकिन जल्द ही इसमें सुधार देखने को मिला। कुछ ही समय में सेंसेक्स 142 अंकों की बढ़त के साथ 78,130 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी 30 अंकों की शुरुआती बढ़त के साथ 24,165 पर खुला और आगे बढ़ते हुए 24,224 तक पहुंच गया।

निवेशकों ने दिखाई खरीदारी में रुचि

बाजार में आई इस तेजी के पीछे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में तनाव में कमी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल बना। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा, जहां निवेशकों ने खरीदारी में रुचि दिखाई। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी एक अहम फैक्टर रही। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.4 प्रतिशत गिरकर 97.99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 92.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में गिरावट से भारत जैसे आयातक देश को राहत मिलती है, जिससे बाजार में सकारात्मक धारणा बनती है।

सेक्टरवार कंपनियों के शेयरों की स्थिति

सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो एफएमसीजी, एनर्जी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को मजबूती दी। हालांकि, कुछ बड़े शेयरों में गिरावट ने तेजी को सीमित रखा। एचडीएफसी लाइफ, विप्रो, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसे दिग्गज शेयरों में कमजोरी देखी गई। ब्रॉडर मार्केट में हालांकि उत्साह ज्यादा दिखा। माइक्रो-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी माइक्रोकैप 250 और निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो बाजार में व्यापक भागीदारी का संकेत है।

वैश्विक बाजारों का मिश्रित रुख, भारतीय बाजार पर असर

वैश्विक बाजारों का मिश्रित रुख भी भारतीय बाजार को प्रभावित करता दिखा। वॉल स्ट्रीट में सकारात्मक बंद होने से कुछ सपोर्ट मिला, जहां एसएंडपी 500 और नैस्डैक में बढ़त दर्ज की गई। इसके उलट एशियाई बाजारों में कमजोरी रही, जहां निक्केई, कोस्पी और हैंग सेंग जैसे प्रमुख इंडेक्स में गिरावट देखी गई। संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार दूसरे दिन भारतीय बाजार में खरीदारी की और करीब 382 करोड़ रुपये का निवेश किया। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मुनाफावसूली करते हुए 3,400 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे, जिससे बाजार की तेजी कुछ हद तक सीमित रही।

निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर अहमः एक्सपर्ट्स

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार कई वैश्विक और घरेलू कारकों से प्रभावित हो रहा है। इजरायल-लेबनान के बीच युद्धविराम ने फिलहाल राहत दी है, लेकिन यह स्थिति कितनी स्थायी होगी, इस पर नजर बनाए रखना जरूरी है। इसके अलावा, बाजार के ऊंचे स्तर पर होने के कारण उतार-चढ़ाव की संभावना भी बनी हुई है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर अहम बना हुआ है। अगर यह स्तर मजबूती से पार होता है और बाजार वहां टिकता है, तो आगे और तेजी की संभावना बन सकती है। फिलहाल निवेशकों को सोच-समझकर और चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दी जा रही है। कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव में कमी और तेल कीमतों में गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार को सहारा दिया है, लेकिन अनिश्चितताओं के बीच सतर्कता बनाए रखना अभी भी जरूरी है।

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