Global energy crisis : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति में आई भारी बाधा के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए International Energy Agency (IEA) ने बड़ा फैसला लिया है। एजेंसी ने घोषणा की है कि उसके 32 सदस्य देश अपने आपातकालीन भंडार से कुल 400 मिलियन बैरल (40 करोड़ बैरल) तेल जारी करेंगे। यह कदम तेल की वैश्विक आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने और कीमतों में संभावित उछाल को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
आईईए के इतिहास में यह सबसे बड़े समन्वित आपातकालीन कदमों में से एक माना जा रहा है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइनों में से एक Strait of Hormuz से तेल प्रवाह पर गंभीर असर पड़ा है।

आईईए के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol ने सदस्य देशों की एक विशेष आपात बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। बैठक में यह पाया गया कि तेल आपूर्ति में अचानक आई कमी से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसके बाद सभी सदस्य देशों ने सामूहिक रूप से अपने रणनीतिक तेल भंडार से तेल जारी करने पर सहमति जताई। फातिह बिरोल ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां अभूतपूर्व हैं और वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए एकजुट कार्रवाई जरूरी है। उनके अनुसार, तेल बाजार वैश्विक प्रकृति का है, इसलिए बड़े व्यवधानों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रतिक्रिया आवश्यक होती है।
आईईए के सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर 1.2 बिलियन बैरल से अधिक का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है। इसके अतिरिक्त उद्योग क्षेत्र से जुड़ा लगभग 600 मिलियन बैरल तेल भंडार भी सरकारों के नियंत्रण में रखा गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर बाजार में उतारा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है और कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है।

यह पहली बार नहीं है जब आईईए ने सामूहिक रूप से आपातकालीन तेल भंडार जारी किया है। इससे पहले भी वैश्विक संकट के समय ऐसा कदम उठाया जा चुका है। आईईए के इतिहास में यह छठा अवसर है जब सदस्य देशों ने मिलकर तेल भंडार जारी करने का फैसला किया है। इससे पहले निम्न अवसरों पर यह कदम उठाया गया था:
इन सभी मौकों पर रणनीतिक भंडार जारी करने से तेल बाजार को स्थिर करने में मदद मिली थी।
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव Strait of Hormuz पर पड़ा है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग माना जाता है। 2025 के दौरान औसतन प्रति दिन लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी मार्ग से होकर गुजरते थे। यह दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है। लेकिन वर्तमान संकट के कारण इस मार्ग से होने वाला तेल निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है। इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और कई कंपनियों को अपना उत्पादन कम करना या अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
आईईए के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को दरकिनार कर तेल की आपूर्ति के विकल्प बेहद सीमित हैं। कुछ पाइपलाइन और वैकल्पिक समुद्री मार्ग मौजूद हैं, लेकिन उनकी क्षमता इतनी नहीं है कि वे पूरी आपूर्ति की भरपाई कर सकें। यही कारण है कि वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ने लगी थी और कीमतों में तेज उछाल का खतरा पैदा हो गया था। इसी जोखिम को कम करने के लिए आईईए ने अपने सदस्य देशों के साथ मिलकर यह आपात कदम उठाया है।

भारत ने भी आईईए के इस फैसले का स्वागत किया है। सरकार का कहना है कि यह कदम वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करेगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारत पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। भारत आईईए का पूर्ण सदस्य नहीं बल्कि सहयोगी सदस्य है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग में सक्रिय भूमिका निभाता है। सरकार ने संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो भारत भी बाजार स्थिरता के लिए उचित कदम उठा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईईए का यह फैसला केवल तेल बाजार को स्थिर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा के प्रति वैश्विक सहयोग और एकजुटता का भी संकेत देता है। 1974 में स्थापित International Energy Agency का मुख्य उद्देश्य ही वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और संकट के समय सदस्य देशों के बीच समन्वित कार्रवाई करना है।
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