LNG कीमतों में बड़ी छलांग का अनुमान, वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी हलचल
खबर सार :-
वैश्विक एलएनजी बाजार आने वाले महीनों में तेज उतार-चढ़ाव का सामना कर सकता है। एशिया में बढ़ती ऊर्जा मांग, यूरोप की भंडारण जरूरतें और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां कीमतों को ऊपर ले जा सकती हैं। यदि मॉर्गन स्टेनली का अनुमान सही साबित होता है तो एलएनजी की कीमतें तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती हैं, जिसका असर ऊर्जा लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों पर दिखाई देगा।
खबर विस्तार : -
LNG Price Surge: वैश्विक ऊर्जा बाजार में आने वाले महीनों में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। एशियाई देशों में बढ़ती ऊर्जा मांग, यूरोप द्वारा सर्दियों से पहले गैस भंडार भरने की तैयारी और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के कारण एलएनजी बाजार में दबाव बढ़ रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं तो एलएनजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतें तीन वर्षों से अधिक के उच्चतम स्तर तक पहुंच सकती हैं।
वैश्विक वित्तीय संस्था मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि एशियाई एलएनजी बेंचमार्क कीमतें वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में बढ़कर 25 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) तक पहुंच सकती हैं। यह स्तर वर्तमान फॉरवर्ड मार्केट कीमतों की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक ऊंचा होगा।
2023 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच सकती हैं कीमतें
यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो एलएनजी की कीमतें 2023 की शुरुआत के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएंगी। उस समय रूस-यूक्रेन संकट के बाद यूरोप को पाइपलाइन गैस की आपूर्ति में भारी कमी का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते यूरोपीय देशों ने वैश्विक बाजार से बड़े पैमाने पर एलएनजी की खरीद की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां भी उसी प्रकार का दबाव पैदा कर सकती हैं। हालांकि इस बार मुख्य वजह एशिया में बढ़ती खपत और यूरोप की भंडारण आवश्यकताएं हैं।
Middle East की स्थिति बनी हुई है अहम
रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में तनाव कम होने की स्थिति में भी एलएनजी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास उत्पन्न चुनौतियां वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। यह समुद्री मार्ग कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख एलएनजी निर्यातक देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुनिया की बड़ी मात्रा में एलएनजी आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक बाजार में कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
भारत और चीन में बढ़ रही गैस की खपत
रिपोर्ट के अनुसार एशिया के प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता देशों भारत और चीन में प्राकृतिक गैस की मांग फिर से मजबूत होने लगी है। औद्योगिक गतिविधियों में तेजी, बिजली उत्पादन की जरूरत और स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ते रुझान के कारण इन देशों में एलएनजी की खपत बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एशियाई देशों में ऊर्जा मांग बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदारी तेज होगी, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा। विशेषकर गर्मियों के दौरान बिजली की मांग बढ़ने से गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि की संभावना है।
गर्म मौसम बढ़ाएगा LNG की खपत
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि जून और जुलाई के दौरान एशिया के कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया जा सकता है। इससे एयर कंडीशनिंग और कूलिंग सिस्टम की मांग बढ़ेगी, जिसके परिणामस्वरूप बिजली खपत और गैस की आवश्यकता भी बढ़ेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म मौसम का सीधा प्रभाव प्राकृतिक गैस की मांग पर पड़ता है क्योंकि कई देशों में गैस आधारित बिजली संयंत्रों का उपयोग अधिक किया जाता है।
यूरोप पर गैस भंडार भरने का दबाव
दूसरी ओर यूरोप को भी आने वाली सर्दियों के लिए अपने गैस भंडार को फिर से भरना है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप में पिछले महीने गैस की मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही, लेकिन भंडारण स्तर अभी भी सामान्य से काफी नीचे हैं। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार यूरोप के गैस स्टोरेज स्तर पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत कम हैं। वहीं यह 10 वर्षों के औसत स्तर से करीब 25 प्रतिशत नीचे बने हुए हैं। ऐसे में यूरोपीय देशों को आने वाले महीनों में अतिरिक्त एलएनजी खरीदनी पड़ सकती है।
आपूर्ति बढ़ने के बावजूद बना हुआ है दबाव
हालांकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। उत्तरी अमेरिका में नए एलएनजी निर्यात संयंत्रों की शुरुआत और दुनिया के अन्य हिस्सों में उत्पादन बढ़ने से आपूर्ति को समर्थन मिला है। इसके बावजूद आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाया है। मई महीने में वैश्विक एलएनजी आपूर्ति पिछले वर्ष की तुलना में केवल लगभग 10 लाख टन कम रही, लेकिन बढ़ती मांग भविष्य में बाजार को और अधिक तंग बना सकती है।
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