GeM बना सरकारी खरीद का गेमचेंजरः 10 साल में 400 करोड़ से 5 लाख करोड़ का सफर
खबर सार :-
सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने एक दशक में भारत की सार्वजनिक खरीद व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। 400 करोड़ रुपए से 5 लाख करोड़ रुपए तक की यात्रा केवल कारोबार की वृद्धि नहीं, बल्कि पारदर्शिता, डिजिटल नवाचार और समावेशी विकास की कहानी है। छोटे उद्यमों, महिलाओं, स्टार्टअप्स और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को अवसर देकर GeM ने सरकारी खरीद को अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाया है।
खबर विस्तार : -
GeM 10 Years Success: सरकारी खरीद प्रणाली को पारदर्शी, तेज और समावेशी बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) आज भारत की सबसे बड़ी डिजिटल सफलता की कहानियों में शामिल हो चुका है। महज 10 वर्षों में GeM का कारोबार करीब 400 करोड़ रुपए से बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। यह जानकारी GeM के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिहिर कुमार ने दी। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म ने न केवल सरकारी खरीद प्रक्रिया को आधुनिक बनाया है, बल्कि लाखों सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को सीधे सरकारी बाजार से जोड़कर आर्थिक अवसरों के नए द्वार भी खोले हैं।
GEM: वर्ष 2016 में लॉन्च, अब 5 लाख करोड़ का कारोबार
मिहिर कुमार (Mihir Kumar) ने बताया कि GeM की शुरुआत एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में की गई थी, जहां विक्रेता पंजीकरण से लेकर ऑर्डर, डिलीवरी और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। वर्ष 2016 में लॉन्च होने के बाद पहले वर्ष में प्लेटफॉर्म का कुल कारोबार करीब 400 से 422 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच चुका है। यह वृद्धि दर्शाती है कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से सरकारी खरीद व्यवस्था को कितना प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीति के अनुसार सरकारी खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) से किया जाना चाहिए। हालांकि GeM पर यह हिस्सा लगभग 45 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसका अर्थ है कि छोटे कारोबारियों को सरकारी खरीद प्रणाली में पहले की तुलना में कहीं अधिक अवसर मिल रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि रोजगार सृजन और स्थानीय उद्योगों को भी मजबूती मिली है।

GEM Portal: प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में विक्रेताओं की मौजूदगी
GeM की सफलता का एक बड़ा कारण यह भी है कि इसने सरकारी खरीद को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है। प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में विक्रेताओं की मौजूदगी से खरीदारों को बेहतर कीमतों पर अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं। इससे सरकारी संस्थानों को लागत बचाने में मदद मिलती है और सार्वजनिक धन का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होता है। महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी में हुई वृद्धि GeM की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक है। मिहिर कुमार के अनुसार, शुरुआती वर्षों में स्टार्टअप्स के माध्यम से होने वाला कारोबार केवल 2 करोड़ रुपए के आसपास था, जो अब बढ़कर 50,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। इसी प्रकार महिला उद्यमियों का कारोबार 70 करोड़ रुपए से बढ़कर 80,000 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है। यह बदलाव दर्शाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने उन वर्गों को भी मजबूत अवसर प्रदान किए हैं, जिन्हें पहले सरकारी खरीद प्रक्रिया में सीमित पहुंच मिलती थी।
वैश्विक स्तर पर भी मिल रही तारीफ
GeM के सीईओ ने कहा कि सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में यह प्लेटफॉर्म वैश्विक स्तर पर भी एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरा है। दक्षिण कोरिया के KONEPS प्लेटफॉर्म को छोड़ दिया जाए तो दुनिया में बहुत कम ऐसे मॉडल हैं, जहां सरकारी खरीद को पूरी तरह डिजिटल मार्केटप्लेस में परिवर्तित किया गया हो। भारत का GeM मॉडल अब पारदर्शिता, दक्षता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाले एक सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े भी GeM की उपलब्धियों की पुष्टि करते हैं। मंत्रालय के अनुसार, 2016-17 में GeM पर केवल 2,396 सूक्ष्म एवं लघु उद्यम पंजीकृत थे, जबकि आज उनकी संख्या बढ़कर 11.9 लाख से अधिक हो गई है। एमएसई से सरकारी खरीद का मूल्य भी 69 करोड़ रुपए से बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया है। इसी अवधि में ऑर्डरों की संख्या 2,994 से बढ़कर 2.17 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

महिला स्वामित्व वाले MSE की संख्या में इजाफा
महिला स्वामित्व वाले एमएसई की संख्या भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। वर्ष 2016-17 में जहां ऐसे केवल 268 उद्यम GeM से जुड़े थे, वहीं अब उनकी संख्या 2.16 लाख से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद का मूल्य 8 करोड़ रुपए से बढ़कर 93,327 करोड़ रुपए के पार पहुंच चुका है। इसी प्रकार स्टार्टअप्स की संख्या 88 से बढ़कर 40,000 से अधिक हो गई है और उनसे खरीद का मूल्य 61,400 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के उद्यमों को भी GeM ने नई पहचान दी है। इन वर्गों से जुड़े पंजीकृत एमएसई की संख्या 38 से बढ़कर 66,000 से अधिक हो चुकी है। इनसे की गई खरीद का मूल्य 21,800 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि GeM ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाया है और विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की है।
Technology: GeM की सफलता का प्रमुख आधार
GeM का योगदान केवल सरकारी खरीद तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इस प्लेटफॉर्म ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोविड-19 महामारी और उसके बाद के वर्षों में GeM के माध्यम से 324 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज तथा 199 करोड़ सिरिंज की खरीद की गई। इसके अलावा वंदे भारत ट्रेनों के लिए मेडिकल किट, डायग्नोस्टिक उपकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उत्पादों की खरीद भी इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से की गई। तकनीक GeM की सफलता का प्रमुख आधार रही है। प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एडवांस डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रियाओं का उपयोग करता है। इससे खरीद प्रक्रिया अधिक जवाबदेह, कुशल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनती है। मानव हस्तक्षेप कम होने से भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी घटती हैं और प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनती है।
GeM: ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करने में अहम भूमिका
सरकार का मानना है कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में GeM की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। नवाचार, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव और वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाकर इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को और मजबूत बनाया जा रहा है। GeM अब केवल एक खरीद मंच नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल प्रशासनिक सुधारों और आर्थिक समावेशन का एक सशक्त प्रतीक बन चुका है।
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