Indian Stock Market: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज उछाल ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई, जिसका असर सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया।
घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले और शुरुआती कारोबार में ही बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,918.90 के मुकाबले 1,862.15 अंक गिरकर 77,056.75 पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 24,450.45 के पिछले बंद स्तर से 582.4 अंक गिरकर 23,868.05 पर खुला। सुबह करीब 9:28 बजे तक बाजार में गिरावट और गहरी हो गई। इस दौरान सेंसेक्स 2,404.42 अंक यानी लगभग 3.05 प्रतिशत टूटकर 76,514.48 के स्तर पर ट्रेड करता दिखाई दिया। वहीं निफ्टी 727.40 अंक यानी करीब 2.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,723.05 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत में केवल बेंचमार्क इंडेक्स ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार भी इस गिरावट से अछूता नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में लगभग 3.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 3.18 प्रतिशत तक टूट गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार में बिकवाली व्यापक स्तर पर देखी गई और निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाना शुरू कर दिया।
सेक्टोरल आधार पर देखें तो लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में दिखाई दिए। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई और यह खुलते ही 4 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इसके अलावा निफ्टी ऑटो इंडेक्स में करीब 3.99 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी बैंक इंडेक्स लगभग 3.87 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स करीब 3.75 प्रतिशत कमजोर हुआ। एफएमसीजी सेक्टर भी दबाव में रहा और इसमें लगभग 2.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि टेक्नोलॉजी शेयरों में अपेक्षाकृत कम गिरावट देखी गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स में लगभग 1.06 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो अन्य सेक्टरों की तुलना में कम रही।
सेंसेक्स के शेयरों में भी व्यापक बिकवाली देखने को मिली। इंडिगो, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एलएंडटी, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। ये सभी शेयर दिन के शुरुआती कारोबार में टॉप लूजर्स की सूची में शामिल रहे।

बाजार की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक तेल बाजार में आई उथल-पुथल को माना जा रहा है। एशियाई कारोबार के शुरुआती सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 21 प्रतिशत उछलकर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान द्वारा जहाजों पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई। इसके अलावा कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा कर दी है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तेल की कीमतों में वृद्धि अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा तथा शांति के लिए चुकाई जाने वाली एक छोटी कीमत है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 6 मार्च 2026 को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने लगभग 6,030 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब 6,972 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर बना हुआ है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार तकनीकी चार्ट भी फिलहाल बाजार में कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि साप्ताहिक चार्ट पर बनी कमजोर कैंडल और 50-सप्ताह के ईएमए के नीचे क्लोजिंग यह दर्शाती है कि बाजार पर अभी दबाव बना रह सकता है। तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,700 से 25,150 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। वहीं 23,850 और 23,600 के स्तर को तत्काल सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। अगर निफ्टी 23,500 के नीचे फिसलता है तो बाजार में और तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सावधानी और अनुशासन के साथ निवेश करना चाहिए। वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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