LPG Gas Cylinders Crisis: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान का असर अब भारत में लोगों के घरों और किचन तक पहुंचने लगा है। एलपीजी (LPG) की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंता के बीच देश के अधिकांश राज्यों से घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं। इसके चलते उपभोक्ता तेजी से वैकल्पिक कुकिंग साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलते रुझान का सबसे बड़ा फायदा इलेक्ट्रिक कुकिंग अप्लायंसेज बनाने वाली कंपनियों को मिल रहा है, जिसके संकेत शेयर बाजार में भी दिखाई देने लगे हैं।
घरेलू उपकरण बनाने वाली कई कंपनियों के शेयरों में बुधवार को तेज उछाल देखने को मिला। किचन अप्लायंसेज बनाने वाली बटरफ्लाई गांधीमथी अप्लायंसेज का शेयर इंट्राडे कारोबार में करीब 7.93 प्रतिशत बढ़कर 651 रुपये तक पहुंच गया और दिन के दौरान इसने 660 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ। इसी तरह टीटीके प्रेस्टीज का शेयर लगभग 9.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 530 रुपये पर कारोबार करता दिखा, जबकि इसका इंट्राडे हाई 556 रुपये रहा। वहीं ‘पिजन’ ब्रांड के तहत किचन प्रोडक्ट्स बेचने वाली स्टोव क्राफ्ट के शेयर में भी करीब 5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट की जड़ मध्य पूर्व में बढ़ा सैन्य तनाव है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा जोखिम बन गया है। इस संघर्ष का एक अहम असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा ट्रांजिट मार्गों में से एक माना जाता है। यदि इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही बाधित होती है तो तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होना तय है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और गंभीर हो जाती है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऊर्जा नीति विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग दो-तिहाई आयात करता है और इसमें से 90 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति पश्चिम एशियाई देशों-जैसे संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब-से आती है।
इस वैश्विक तनाव का असर अब भारत के कई राज्यों में दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ शहरों में लोगों को गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े महानगरों में भी एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है। खासकर होटल और रेस्तरां उद्योग के लिए यह संकट अधिक गंभीर है क्योंकि उनके संचालन का बड़ा हिस्सा गैस पर निर्भर है।

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने भी अपने सदस्यों को सलाह जारी कर गैस की खपत कम करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन ने रेस्तरां संचालकों से कहा है कि वे ऐसे मेनू पर ध्यान दें जिनमें कम गैस का उपयोग हो या जिन्हें पकाने में कम समय लगता हो।
इसके साथ ही जहां संभव हो, वहां इलेक्ट्रिक उपकरणों के उपयोग पर भी विचार करने को कहा गया है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एलपीजी की आपूर्ति में व्यवधान लंबा खिंचता है तो रेस्तरां उद्योग को परिचालन लागत बढ़ने और सप्लाई जोखिम जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

केंद्र सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घरेलू गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कदम उठाए हैं। देश में एस्मा लागू कर दिया गया है। इसके तहत घरेलू उपयोग के लिए गैस आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा सरकारी तेल कंपनियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय रिफाइनरियों ने घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत तक वृद्धि की है ताकि बाजार में कमी को कुछ हद तक संतुलित किया जा सके। सरकार समानांतर रूप से अन्य देशों से एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास कर रही है। हालांकि ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान आपूर्ति बढ़ाना आसान नहीं होता और इसमें समय लग सकता है।
एलपीजी संकट ने उपभोक्ताओं को किचन टेक्नोलॉजी के विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया है। खासकर शहरी क्षेत्रों में इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ी है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन कुकर की बिक्री में उल्लेखनीय उछाल देखा जा रहा है। इसके अलावा माइक्रोवेव ओवन, ओटीजी, इलेक्ट्रिक तवा, एयर फ्रायर, मल्टी-कुकर और इलेक्ट्रिक स्टीमर जैसे उपकरणों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान केवल अस्थायी नहीं बल्कि लंबी अवधि के ऊर्जा संक्रमण की दिशा में भी संकेत दे सकता है।

ऊर्जा नीति विशेषज्ञ अभिषेक कर का कहना है कि यदि शहरी परिवारों को इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो एलपीजी की मांग पर दबाव कम किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि एलपीजी सब्सिडी के लिए पहले चलाए गए “गिव इट अप” अभियान की तरह सरकार उन परिवारों को गैस का कम उपयोग करने के लिए प्रेरित कर सकती है जो आसानी से इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं।
एलपीजी संकट और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की बढ़ती मांग ने निवेशकों का ध्यान भी इस सेक्टर की ओर खींचा है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार यदि गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है तो इंडक्शन चूल्हे और अन्य इलेक्ट्रिक किचन उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए यह अवसर साबित हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि इस तेजी को पूरी तरह स्थायी मान लेना जल्दबाजी होगी क्योंकि यह काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर है। यदि ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो जाती है तो मांग का यह उछाल धीमा पड़ सकता है।
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