सोने-चांदी की कीमतों में तेजी पर लगा ब्रेक, अब अमेरिकी मुद्रा स्फीति पर निवेशकों की नजर

खबर सार :-
वैश्विक बाजार की अनिश्चितता और आर्थिक संकेतों की प्रतीक्षा के बीच सोने और चांदी की कीमतों में फिलहाल गिरावट देखी जा रही है। भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में इन कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगे। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं और बाजार की अगली चाल अमेरिकी मुद्रास्फीति तथा जीडीपी आंकड़ों पर निर्भर मानी जा रही है।

सोने-चांदी की कीमतों में तेजी पर लगा ब्रेक, अब अमेरिकी मुद्रा स्फीति पर निवेशकों की नजर
खबर विस्तार : -

Gold Silver Price Today: वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता और निवेशकों की सतर्कता के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। घरेलू वायदा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दामों में कमजोरी देखने को मिली और कीमतें लगभग 0.78 प्रतिशत तक नीचे आ गईं।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह लगभग 10:30 बजे सोने के 2 अप्रैल 2026 के वायदा कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 0.31 प्रतिशत गिरकर 1,62,795 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,75,690 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आर्थिक आंकड़ों को लेकर निवेशकों की प्रतीक्षा की रणनीति के कारण फिलहाल कीमती धातुओं में दबाव बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.56 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 5,212.64 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी की कीमत 1.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 88.493 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई। वैश्विक बाजार में कीमतों में आई इस गिरावट का असर सीधे तौर पर भारतीय कमोडिटी बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का प्रभाव घरेलू बाजार पर तुरंत पड़ता है।

Global Tension-Gold Silver Rate

भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी अस्थिरता

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी कीमती धातुओं के रुझान को प्रभावित कर रहा है। कमोडिटी बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, वहीं ताजा घटनाक्रम से तत्काल तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसके कारण युद्ध बारहवें दिन भी जारी रहा, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।

बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल से ईरान पर हमले रोकने का आग्रह किया है। वहीं ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को बाधित करने के लिए बारूदी सुरंगें बिछाने का दावा किया है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इन घटनाओं के कारण निवेशकों की रणनीति लगातार बदल रही है और कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर बाजार की नजर

कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि अब निवेशकों का ध्यान अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर केंद्रित है। विशेष रूप से अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति (CPI) के आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन आंकड़ों से यह संकेत मिलने की संभावना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों को लेकर किस प्रकार की नीति अपना सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा आंकड़े युद्ध से उत्पन्न ऊर्जा कीमतों के प्रभाव को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करेंगे।

Global Tension-GDP

जीडीपी और मुद्रास्फीति डेटा भी अहम

विश्लेषकों के अनुसार इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और मुद्रास्फीति से जुड़े अन्य आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इन आंकड़ों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति और मौद्रिक नीति की दिशा को लेकर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आंकड़े मजबूत आते हैं तो डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। वहीं कमजोर आर्थिक संकेत मिलने पर निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख कर सकते हैं।

निवेशक सावधानी से बना रहे रणनीति

कमोडिटी बाजार में सक्रिय निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के संयोजन से ही आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा तय होगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए रखें और जोखिम प्रबंधन के साथ ही निवेश के फैसले लें।

 

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