PM Surya Ghar Yojana: देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और घरेलू बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तेज़ी से आगे बढ़ रही है। सरकार के अनुसार इस योजना के तहत देश भर में अब तक 25 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार 5 मार्च 2026 तक कुल 25,02,217 घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इससे लाखों परिवारों को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध हो रही है और भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को भी गति मिल रही है।
ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि योजना के लिए बनाए गए राष्ट्रीय पोर्टल पर अब तक 63,26,125 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में आवेदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है और 25 लाख से अधिक घरों में सोलर सिस्टम लग चुके हैं। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत 2024 में की थी। यह एक डिमांड-ड्रिवन योजना है, यानी जिन घरेलू उपभोक्ताओं के पास स्थानीय बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) से जुड़ा बिजली कनेक्शन है, वे राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपने घर की छत पर सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं।

वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक इस योजना के तहत 14,585.29 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में योजना पर 7,822.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इससे स्पष्ट है कि योजना के विस्तार के साथ निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि यदि देश के एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाते हैं, तो इससे लगभग 1000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव होगा। इससे बिजली उत्पादन में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी इस योजना को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनुमान है कि इन सोलर सिस्टमों के 25 साल के जीवनकाल में करीब 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के भारत के प्रयासों को मजबूती देगा। राज्यों के प्रदर्शन की बात करें तो 2025 के अंत तक गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल और राजस्थान इस योजना को लागू करने में अग्रणी रहे हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में घरों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं और लोगों में योजना के प्रति जागरूकता भी तेजी से बढ़ी है।

सरकार ने संसद में यह भी बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 266.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें 258 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है, जिसमें सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी सबसे अधिक 135.81 गीगावाट है। इसके अलावा पवन ऊर्जा 54.51 गीगावाट, जैव ऊर्जा 11.61 गीगावाट, लघु जल विद्युत 5.16 गीगावाट और वृहद जल विद्युत 50.91 गीगावाट क्षमता शामिल है। वहीं 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी देश के स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण का हिस्सा है।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि सरकार नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को भी लागू कर रही है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूफटॉप सोलर को इसी गति से बढ़ावा मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व भी स्थापित कर सकता है।
अन्य प्रमुख खबरें
तेल संकट से बाजार में भूचाल: Sensex 2400 अंक टूटा, Nifty 3% फिसला
Middle East Tension के बावजूद सोना-चांदी फिसले, चांदी में 3300 रुपये से ज्यादा की बड़ी गिरावट
LPG Price Hike: आम आदमी को तगड़ा झटका, LPG गैस सिलेंडर 115 रुपये हुआ महंगा, जानें नया रेट
Middle East Tension से चमका Gold-Silver: निवेशकों ने जोखिम से बनाई दूरी, सुरक्षित निवेश पर जोर
Global Tension का असर: गिरावट के साथ खुला Share Market, सेंसेक्स 300 अंक टूटा, IT Share बने सहारा
Israel Iran War: एन चंद्रशेखरन ने बताया भारत पर कितना पड़ेगा इस युद्ध का असर
SEBI के लिए 2026 ‘Year of Reform’: ट्रस्ट, ट्रांसपेरेंसी, टीमवर्क और टेक्नोलॉजी पर फोकस