India-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मंगलवार को हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) ने देश के अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। लेदर एंड फुटवियर, जेम्स एवं ज्वैलरी और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर्स को इस समझौते से सीधा लाभ मिलने वाला है। अब ये उद्योग यूरोप के 27 देशों में जीरो ड्यूटी पर अपने उत्पादों का निर्यात कर सकेंगे, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत-ईयू एफटीए से देश के श्रम बहुल क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी और इनके निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिलेगी। उन्होंने इसे भारतीय उद्योग और रोजगार सृजन के लिहाज से ऐतिहासिक करार बताया।
एफटीए के तहत यूरोप को भारत के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात पर अब जीरो ड्यूटी लगेगी। इससे भारतीय निर्यातकों को ईयू के करीब 263 अरब डॉलर के विशाल टेक्सटाइल बाजार में सीधा प्रवेश मिलेगा। लंबे समय से उच्च शुल्क के कारण पिछड़ रहे भारतीय उत्पाद अब बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के बराबर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। इससे बुनकरों, कारीगरों और एमएसएमई इकाइयों को बड़ा संबल मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, लेदर और फुटवियर उत्पादों पर लगने वाली 17 प्रतिशत तक की ड्यूटी अब समाप्त हो गई है। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोप के लगभग 100 अरब डॉलर के बाजार में जीरो ड्यूटी पर पहुंच मिलेगी। यह सेक्टर लाखों लोगों को रोजगार देता है और एफटीए के बाद इसमें निवेश और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
इस ट्रेड डील से रत्न और आभूषण उद्योग को भी बड़ा फायदा होगा। यूरोप के 79 अरब डॉलर के प्रीमियम जेम्स एंड ज्वैलरी मार्केट में भारतीय उत्पादों के लिए नए अवसर खुलेंगे। साथ ही, भारतीय निर्यातकों को यूरोप के करीब 2 ट्रिलियन डॉलर के इंडस्ट्रियल मार्केट में प्राथमिकता के आधार पर डायरेक्ट एंट्री मिलेगी।
एफटीए का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट है। उनके अनुसार, यह करार किसानों, छोटे उद्योगों, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के लिए यूरोपीय बाजार तक पहुंच को आसान बनाएगा और भारत-ईयू सहयोग को नई ऊंचाई देगा।
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