भारत-ईयू रिश्तों में ऐतिहासिक छलांग, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बदलेगा ग्लोबल इकॉनमी का गेम

खबर सार :-
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच प्रस्तावित एफटीए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह समझौता व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा। अगर 27 जनवरी को इसकी औपचारिक घोषणा होती है, तो यह भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका को और मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम होगा।

भारत-ईयू रिश्तों में ऐतिहासिक छलांग, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बदलेगा ग्लोबल इकॉनमी का गेम
खबर विस्तार : -

India EU FTA: नई दिल्ली में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह के साथ ही भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। इस अवसर पर यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत दौरे पर रहेंगे। उनके इस दौरे को भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

लेयेन का बयान: ऐतिहासिक डील के अंतिम चरण में

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में बोलते हुए उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव और अमेरिकी टैरिफ के कारण यूरोप अब अपने व्यापारिक साझेदारों में विविधता ला रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ एफटीए एक ऐतिहासिक समझौता होगा, जो करीब 2 अरब लोगों का साझा बाजार तैयार करेगा और वैश्विक जीडीपी के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को कवर करेगा।

यूरोप को मिलेगा ‘फर्स्ट-मूवर एडवांटेज’

लेयेन के अनुसार, भारत जैसे तेजी से बढ़ते और गतिशील बाजार के साथ समझौता यूरोप को फर्स्ट-मूवर एडवांटेज देगा। यूरोपीय कंपनियां भविष्य के ग्रोथ सेंटर्स और इस सदी के आर्थिक पावरहाउस के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते बनाना चाहती हैं, और भारत इस रणनीति का केंद्र है।

27 जनवरी को हो सकती है बड़ी घोषणा

सूत्रों के मुताबिक, 27 जनवरी को होने वाली भारत-ईयू समिट में एफटीए वार्ता के सफल समापन की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। दोनों पक्ष एक साझा दस्तावेज अपनाएंगे, जिसके बाद इसे यूरोपीय संसद और काउंसिल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके साथ ही सुरक्षा और रक्षा साझेदारी तथा भारतीय प्रोफेशनल्स की यूरोप में मोबिलिटी बढ़ाने को लेकर अलग समझौते भी साइन हो सकते हैं।

भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी डील

यह एफटीए भारत की अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक डील मानी जा रही है, जिसमें यूरोपीय यूनियन के 27 देश शामिल होंगे। यूरोपीय यूनियन पहले से ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024 में दोनों के बीच करीब 135 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ, और एफटीए के बाद इसमें तेज वृद्धि की उम्मीद है।

किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

भारत इस समझौते में टेक्सटाइल, लेदर, अपैरल, जेम्स एंड ज्वेलरी और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए जीरो-ड्यूटी एक्सेस पर जोर दे रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।

संवेदनशील मुद्दों पर अब भी बातचीत

हालांकि एफटीए लगभग अंतिम चरण में है, लेकिन कुछ संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा अभी जारी है। खासतौर पर यूरोपीय यूनियन के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को लेकर भारत की चिंताएं बनी हुई हैं। भारत चाहता है कि उसके निर्यात पर अतिरिक्त कार्बन टैक्स का बोझ न पड़े।

‘सभी समझौतों की मां’ : पीयूष गोयल

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस एफटीए की अहमियत को रेखांकित करते हुए इसे ‘सभी समझौतों की मां’ बताया है। उनके अनुसार, यह समझौता न केवल व्यापार बढ़ाएगा, बल्कि निवेश, रोजगार और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के नए अवसर भी खोलेगा।

 

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