EU-India FTA: यूरोपीय काउंसिल (ईसी) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शनिवार को भारत पहुंच चुकी हैं। अपने भारत दौरे की शुरुआत के साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 34 सेकेंड का एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत-यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर बड़ा संकेत दिया। उर्सुला ने कहा कि दोनों पक्ष इस बहुप्रतीक्षित समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।
वीडियो के कैप्शन में उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने लिखा, “सभी ट्रेड डील्स की जननी। हम ईयू-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के करीब पहुंच रहे हैं। जल्द ही दिल्ली में मिलते हैं।” अपने संदेश में उन्होंने इस डील को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन यह समझौता जल्द हकीकत बन सकता है।
उर्सुला ने कहा कि यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लगभग दो अरब लोगों का साझा बाजार तैयार करेगा, जो वैश्विक जीडीपी का करीब एक चौथाई हिस्सा होगा। उनके मुताबिक, यह डील यूरोप और भारत दोनों के लिए आर्थिक रूप से बेहद अहम है। यूरोप आज के ग्रोथ सेंटर्स—लैटिन अमेरिका से लेकर इंडो-पैसिफिक तक—के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते बनाना चाहता है।
ईसी अध्यक्ष ने कहा कि यूरोप हमेशा दुनिया के साथ जुड़ाव को प्राथमिकता देता है और दुनिया भी यूरोप को चुनने के लिए तैयार है। भारत जैसे तेजी से बढ़ते और डायनामिक बाजार के साथ यह समझौता यूरोप को ‘फर्स्ट-मूवर एडवांटेज’ देगा। इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी सहयोग को नई गति मिलेगी।
भारत पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने उर्सुला वॉन डेर लेयेन का स्वागत किया। इससे पहले दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के दौरान भी उन्होंने इस एफटीए को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे और इसे वैश्विक व्यापार के लिहाज से अहम बताया था।
सूत्रों के अनुसार, 27 जनवरी को होने वाली भारत-ईयू समिट में एफटीए पर बातचीत सफलतापूर्वक पूरी होने की घोषणा की जा सकती है। दोनों पक्ष एक संयुक्त डॉक्यूमेंट अपनाएंगे, जिसके बाद इस समझौते को यूरोपीय संसद और काउंसिल से कानूनी मंजूरी मिलेगी।
एफटीए के साथ-साथ भारत और ईयू सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसके अलावा, ईयू में काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए मोबिलिटी बढ़ाने को लेकर भी एक अलग पैक्ट पर सहमति बनने की संभावना है।
यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत की अब तक की सबसे बड़ी ट्रेड डील मानी जा रही है। इसमें 27 यूरोपीय देशों के साथ वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार शामिल होगा। यूरोपीय यूनियन पहले से ही भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्यों में से एक है, और यह समझौता दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है।
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