भारत में बनेगा क्षेत्रीय विमानों का नया हब, अडाणी समूह और एम्ब्रेयर की ऐतिहासिक साझेदारी

खबर सार :-
अडाणी समूह और एम्ब्रेयर की साझेदारी भारत को क्षेत्रीय विमान निर्माण के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। यह सहयोग न केवल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मजबूती देगा, बल्कि क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी, रोजगार सृजन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

भारत में बनेगा क्षेत्रीय विमानों का नया हब, अडाणी समूह और एम्ब्रेयर की ऐतिहासिक साझेदारी
खबर विस्तार : -

Aircraft Manufacturing MoU:  भारत के विमानन और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब अडाणी समूह और ब्राजील की दिग्गज विमानन कंपनी एम्ब्रेयर ने भारत में क्षेत्रीय विमान विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने की घोषणा की। इस रणनीतिक सहयोग की औपचारिक शुरुआत नई दिल्ली में नागर विमानन मंत्रालय में हुई, जहां दोनों कंपनियों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

नागर विमानन मंत्रालय में हुआ एमओयू

इस अवसर पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू की मौजूदगी में अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और एम्ब्रेयर के वरिष्ठ अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत भारत में क्षेत्रीय परिवहन विमानों के लिए एक आधुनिक फाइनल असेंबली लाइन (FAL) स्थापित की जाएगी। हालांकि, निवेश की राशि और संयंत्र के सटीक स्थान को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

‘उड़ान’ विजन को मिलेगा नया आयाम

नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने इस साझेदारी को भारत के क्षेत्रीय परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री के ‘उड़ान’ विजन से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य देश के दूरदराज और छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है। यह सहयोग क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी के लिए एंड-टू-एंड स्वदेशी समाधान विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती

मंत्री नायडू ने यह भी कहा कि घरेलू कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेवाओं में साझेदारी से ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी। इससे भारत वैश्विक विमानन सप्लाई चेन में और अधिक मजबूती से जुड़ सकेगा।

तकनीक, कौशल और सप्लाई चेन पर फोकस

नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने कहा कि यह सहयोग केवल विमान असेंबली तक सीमित नहीं है। इसमें उन्नत प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण, स्थानीय कौशल विकास, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण और भारत को क्षेत्रीय विमानों का एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि अडाणी समूह, जो पहले से ही भारतीय विमानन क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति रखता है, अब विमान विनिर्माण के क्षेत्र में कदम रख रहा है।

अडाणी समूह की दीर्घकालिक रणनीति

अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के निदेशक जीत अडाणी ने कहा कि एम्ब्रेयर के साथ यह सहयोग भारत में एक अत्याधुनिक क्षेत्रीय विमान विनिर्माण संयंत्र की स्थापना की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि संभावित स्थलों की पहचान की जा रही है और आने वाले कुछ महीनों में स्थान को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के अध्यक्ष और सीईओ आशीष राजवंशी ने इस साझेदारी को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एम्ब्रेयर के ई-जेट विमान 2005 से भारत में परिचालन में हैं और वर्तमान में लगभग 50 विमान भारतीय वायु सेना, सरकारी एजेंसियों और वाणिज्यिक ऑपरेटरों की सेवा में हैं। एम्ब्रेयर 150 सीट तक के वाणिज्यिक विमान बनाती है, जो क्षेत्रीय उड़ानों के लिए आदर्श माने जाते हैं।

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