India-North Macedonia रिश्तों को मिली नई उड़ान, व्यापार दोगुना करने पर बनी सहमति

खबर सार :-

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उत्तर मैसेडोनिया यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने का मार्ग प्रशस्त किया है। व्यापार दोगुना करने, निवेश बढ़ाने, बी2बी सहयोग मजबूत करने और सतत विकास की वैश्विक पहलों में साझेदारी जैसे फैसले भविष्य में द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करेंगे। यह यात्रा भारत की यूरोप में कूटनीतिक और आर्थिक पहुंच को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
India-North Macedonia रिश्तों को मिली नई उड़ान, व्यापार दोगुना करने पर बनी सहमति

खबर विस्तार : -

India-North Macedonia Relations: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तरी मैसेडोनिया की अपनी ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की पहल की। राष्ट्रपति मुर्मु ने मंगलवार को अपनी समकक्ष राष्ट्रपति गोर्दाना सिलियानोव्स्का-दावकोवा के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और उत्तर मैसेडोनिया ने व्यापार, निवेश और बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई है। उन्होंने आर्थिक सहयोग को दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किए जाने की जानकारी दी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की उत्तर मैसेडोनिया की पहली आधिकारिक यात्रा है, इसलिए यह दौरा ऐतिहासिक महत्व रखता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी और आने वाले वर्षों में राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान

संयुक्त वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि दोनों देशों के संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, पारस्परिक सम्मान और विश्वास पर आधारित हैं, जिन्हें और मजबूत बनाने की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कृषि, औषधि, वस्त्र उद्योग, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, आतिथ्य और फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में संयुक्त निवेश, तकनीकी सहयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर दोनों देशों ने सहमति व्यक्त की है। उनका कहना था कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से आर्थिक विकास के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए आयोजित बिजनेस फोरम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस मंच के जरिए दोनों देशों के उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक संगठनों को आपसी साझेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी से व्यापारिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों और जन-से-जन संपर्कों की सराहना

भारत की राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों और जन-से-जन संपर्कों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान किसी भी द्विपक्षीय रिश्ते की मजबूत नींव होता है। रचनात्मक उद्योग, कला, फिल्म और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी समझ और विश्वास और मजबूत होगा। राष्ट्रपति मुर्मु ने वैश्विक स्तर पर भारत की ओर से शुरू की गई सतत विकास संबंधी पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसी पहलें पूरी दुनिया के लिए लाभकारी हैं। उन्होंने इन पहलों में शामिल होने की उत्तर मैसेडोनिया की इच्छा का स्वागत करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे वैश्विक मुद्दों पर दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

गर्मजोशी भरे स्वागत और आतिथ्य के लिए आभार: राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति मुर्मु ने उत्तर मैसेडोनिया की राष्ट्रपति गोर्दाना सिलियानोव्स्का-दावकोवा और वहां की जनता द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत और आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और उत्तर मैसेडोनिया के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने से यूरोप के बाल्कन क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और व्यापारिक उपस्थिति भी मजबूत होगी। साथ ही निवेश, तकनीकी सहयोग और सांस्कृतिक साझेदारी के नए अवसर खुलेंगे, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

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