Trump का बड़ा संकेत : Iran को Nuclear Deal के लिए मजबूर करने के लिए Military Strike कर सकता है America, अगले 10 से 15 दिनों में हमले का अनुमान
खबर सार :-
ईरान पर अमेरिका अगले 10 से 15 दिनों में मिलिट्री स्ट्राइक कर सकता है। द वॉल जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ईरान को न्यूक्लियर डील के लिए मजबूर करने पर मिलिट्री स्ट्राइक कर सकता है। इसके जवाब में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने अमेरिका को धमकी दी है। खामेनेई ने कहा, ईरान अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को डुबा सकता है और अमेरिकी सेना को इतनी जोर से मार सकता है कि वह फिर से न उठे।
खबर विस्तार : -
वॉशिंगटन : अमेरिका ईरान पर अगले 10 से 15 दिनों के बीच स्ट्राइक कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक कार्यक्रम के दौरान ईरान के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बड़े संकेत दिए हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को न्यूक्लियर डील के लिए मजबूर करने के लिए उस पर लिमिटेड मिलिट्री स्ट्राइक करने पर विचार कर रहे हैं।
बड़े पैमाने पर युद्ध छेड़े बिना ईरान पर दबाव बनाना है मकसद
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि ट्रंप ईरान पर शुरुआती लिमिटेड मिलिट्री स्ट्राइक करने पर विचार कर रहे हैं ताकि तेहरान न्यूक्लियर डील के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की शर्तें पूरी करने के लिए मजबूर हो सके। इस कदम का मकसद बड़े पैमाने पर युद्ध छेड़े बिना ईरान पर दबाव बनाना होगा।
मामले से जुड़े लोगों ने जर्नल को बताया कि अगर शुरुआती स्ट्राइक को मंजूरी मिल जाती है, तो कुछ सैन्य या सरकारी जगहों को टारगेट किया जाएगा। अगर ईरान ने ट्रंप की न्यूक्लियर एनरिचमेंट खत्म करने की मांग मानने से इनकार कर दिया, तो अमेरिकी सरकार और जगहों पर हमला करने के लिए अभियान बढ़ा सकती है।
छोटे हमले शुरू कर बड़े हमलों का आदेश दे सकते हैं ट्रंप
जर्नल के अनुसार एक व्यक्ति ने कहा कि ट्रंप अपने हमलों को तेज कर सकते हैं, छोटे हमलों से शुरू करके बड़े हमलों का आदेश दे सकते हैं, जब तक कि ईरानी सरकार या तो अपना न्यूक्लियर काम खत्म नहीं कर देती या गिर नहीं जाती। ट्रंप ने इशारा किया कि फैसला पास है।
उन्होंने गुरुवार को कहा, "हम एक डील करेंगे या किसी न किसी तरह डील करेंगे। वॉशिंगटन में एक और कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "शायद हम एक डील करेंगे। शायद नहीं। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकियों को शायद अगले 10 दिनों में पता चल जाएगा। बाद में उन्होंने इस समय को अधिकतम 10 से 15 दिन बताया।
मिडिल ईस्ट में अपनी सेना बढ़ा रहा पेंटागन
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने संभावित कार्रवाई को लेकर जर्नल को बताया, "सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप ही जानते हैं कि वह क्या कर सकते हैं या क्या नहीं कर सकते। इसके अलावा, द वॉशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि सरकार ईरान पर एक लंबा सैन्य हमला करने के लिए तैयार लग रही है, क्योंकि पेंटागन मिडिल ईस्ट में अपनी सेना बढ़ा रहा है।
एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड और उसके वॉरशिप इस इलाके के पास पहुंच रहे हैं। अधिकारियों ने पोस्ट को बताया कि वहां तैनात अमेरिकी सेना के मार्च के मध्य तक पूरी तरह से तैनात होने की उम्मीद है। इजरायल में अमेरिका के पूर्व राजदूत डैनियल बी. शापिरो ने कहा कि इजरायल के समर्थन से अमेरिका को ईरान पर बहुत ज्यादा फायदा होगा, लेकिन उन्होंने रिस्क की चेतावनी दी। शापिरो ने कहा, "अमेरिका-इजरायल के मिले-जुले हमलों से उन्हें पक्का बहुत नुकसान होगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह जल्दी खत्म हो जाएगा या साफ-सुथरा होगा और उनके पास दूसरी तरफ कीमत लगाने की कुछ क्षमता है।
दोनों पक्षों में जारी है डिप्लोमैटिक बातचीत
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने जवाब में धमकी दी। उन्होंने कहा कि उनकी सेना एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को डुबो सकती है और अमेरिकन सेना को इतनी जोर से मार सकती है कि वह फिर उठ न सके। एक और संदेश में खामेनेई ने कहा, “बेशक, एक वॉरशिप मिलिटरी हार्डवेयर का एक खतरनाक हिस्सा है। लेकिन, उस वॉरशिप से भी ज्यादा खतरनाक वह हथियार है जो उस वॉरशिप को समुद्र की गहराई में भेज सकता है। इन सबके बीच दोनों पक्षों में डिप्लोमैटिक बातचीत जारी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ गया है बड़े संघर्ष का खतरा
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि दोनों पक्षों ने थोड़ी बढ़ोतरी की है, लेकिन अभी भी कुछ मुद्दों पर बहुत दूर हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों से अगले कुछ हफ्तों में कुछ और डिटेल के साथ हमारे पास वापस आने की उम्मीद है। ईरान का कहना है कि वह न्यूक्लियर हथियार नहीं चाहता है।
उसका कहना है कि उसे सिविलियन मकसद के लिए यूरेनियम का संवर्धन करने का अधिकार है। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2015 के न्यूक्लियर डील से अमेरिका के हटने के बाद से तनाव बढ़ गया है। इसके बाद सेंक्शन और समय-समय पर झड़पें हुई हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।
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