West Bengal: राइटर्स बिल्डिंग फिर बनेगा सत्ता का केंद्र, 13 साल बाद नबन्ना भवन से शिफ्ट होगा सचिवालय
खबर सार :-
West Bengal: लगभग 13 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन के केंद्र के रूप में काम करने के बाद, अब नबान्न की भूमिका बदलने वाली है, क्योंकि नई सरकार ने प्रशासन को वापस 'राइटर्स बिल्डिंग' में स्थानांतरित करने का फैसला किया है।
खबर विस्तार : -
West Bengal: "नबान्न", बंग्ला भाषा में इस नाम का मतलब है "नई फसल"। यह पश्चिम बंगाल की उस 14-मंजिला इमारत का नाम है, जो पिछले 13 सालों से राज्य की सत्ता का मुख्य केंद्र रही है। यहीं से मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव और राज्य सरकार के अन्य सभी शीर्ष अधिकारी और विभाग अपना कामकाज चलाते रहे हैं। अब, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने फैसला किया है कि प्रशासनिक कामकाज एक बार फिर ऐतिहासिक 'राइटर्स बिल्डिंग' से ही चलाया जाएगा।
नबान्न को असल में कपड़ा उद्योग और गारमेंट सेक्टर के विकास को बढ़ावा देने के खास मकसद से बनाया गया था। 2011 तक शासन करने वाली वाम मोर्चा सरकार ने इसके निर्माण की जिम्मेदारी HRBC (हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर्स) को सौंपी थी। लगभग 75 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस 14-मंजिला इमारत का मकसद गारमेंट उद्योग से जुड़े उद्यमियों और अलग-अलग व्यापारिक संगठनों को जगह देना था। इसके अलावा इस इमारत का इस्तेमाल कपड़ा उत्पादन क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और रिसर्च से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी करने की योजना थी।
2013 में बना ‘नया सचिवालय’
2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद नए प्रशासन ने शुरुआत में 'राइटर्स बिल्डिंग' से ही काम करना जारी रखा। हालांकि, 2013 तक यह साफ हो गया था कि 'राइटर्स बिल्डिंग' को बड़े पैमाने पर मरम्मत और ढांचागत सुधार की जरूरत है। नतीजतन, सरकार ने एक वैकल्पिक सचिवालय की तलाश शुरू की, और आखिरकार उसकी नजर नबान्न भवन पर जाकर टिकी। सरकार को तुरंत एक नए सचिवालय की जरूरत थी। लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए कि वे इस इमारत को सरकार के मुख्य केंद्र के तौर पर इस्तेमाल के लिए तैयार करें। विभाग ने जबरदस्त कुशलता दिखाते हुए सिर्फ डेढ़ महीने के रिकॉर्ड समय में 'नबान्न' को एक आधुनिक राज्य सचिवालय में बदल दिया। इस इमारत का औपचारिक उद्घाटन 5 अक्टूबर 2013 को हुआ और उस दिन से ही राज्य सरकार के सभी प्रशासनिक कामकाज इसी जगह से चलाए जाने लगे।
सत्ता का केंद्र नबान्न भवन
कोलकाता और हावड़ा के बीच गंगा नदी पर बने देश के प्रमुख केबल-स्टे पुल विद्यासागर सेतु के सर्विस लेन के पास स्थित नबान्न भवन जल्द ही राज्य की सत्ता का नया केंद्र बन गई। मुख्यमंत्री का कार्यालय इमारत की सबसे ऊपरी यानी 14वीं मंजिल पर स्थापित किया गया, जबकि मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को 13वीं मंजिल पर जगह दी गई। इसके बाद, यहां सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों के आयोजन के लिए "नबान्न सभागार" नाम का एक कन्वेंशन सेंटर भी बनाया गया।
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