Nipun Bharat Mission: निपुण भारत मिशन का होगा विस्तारीकरण, बालवाटिका से कक्षा-5 तक तय होंगे लक्ष्य
खबर सार :-
शिक्षा विभाग का मानना है कि निपुण भारत मिशन के इस विस्तारीकरण से प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। बालवाटिका से कक्षा-5 तक अधिगम लक्ष्यों की स्पष्ट रूपरेखा, नियमित मूल्यांकन, लर्निंग गैप की समय पर पहचान, शिक्षक प्रशिक्षण और प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था के माध्यम से बच्चों की मजबूत शैक्षणिक नींव तैयार होगी।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और दक्षता आधारित बनाने की दिशा में निपुण भारत मिशन के विस्तारीकरण एवं लक्ष्य निर्धारण की व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली है। इस योजना के तहत मिशन का दायरा बालवाटिका से लेकर कक्षा-5 तक बढ़ाया जाएगा। प्रत्येक कक्षा के लिए स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे, ताकि बच्चों को उनकी आयु और कक्षा के अनुरूप आवश्यक ज्ञान, कौशल तथा दक्षताओं से सशक्त बनाया जा सके।
प्रारंभिक विकास पर सरकार का जोर
इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को मिशन के विस्तारीकरण तथा निर्धारित लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नई कार्ययोजना के तहत बालवाटिका से कक्षा-5 तक सीखने की एक सतत शैक्षणिक श्रृंखला विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप निर्धारित अधिगम परिणाम प्राप्त कर सके और भविष्य की उच्च कक्षाओं के लिए उसकी शैक्षणिक नींव मजबूत हो। सरकार का मानना है कि प्रारंभिक वर्षों में विकसित होने वाली भाषा, गणितीय सोच और बुनियादी समझ आगे की शिक्षा की सफलता का आधार बनती है।
योजना के अनुसार कक्षा-3 से कक्षा-5 तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित तथा पर्यावरण अध्ययन विषयों के लिए कक्षावार और विषयवार अधिगम लक्ष्य तैयार किए जाएंगे। इन लक्ष्यों का निर्धारण राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ), एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों तथा परख के अधिगम मानकों के अनुरूप किया जाएगा। इससे पूरे प्रदेश में एक समान गुणवत्ता आधारित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने में सहायता मिलेगी।
लर्निंग गैप के लिए होगा विशेष आयोजन
इन अधिगम लक्ष्यों को तैयार करने के लिए एससीईआरटी, डायट, शिक्षा विशेषज्ञों और अनुभवी शिक्षकों का सहयोग लिया जाएगा। विभिन्न स्तरों पर परामर्श कार्यशालाओं का आयोजन कर आवश्यक दक्षताओं का निर्धारण किया जाएगा और सुझावों के आधार पर अंतिम रूप दिया जाएगा। इससे पाठ्यक्रम और सीखने के परिणामों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
नई कार्ययोजना में केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने पर नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी के वास्तविक सीखने के स्तर पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए विद्यालय स्तर पर नियमित मूल्यांकन, फॉर्मेटिव असेसमेंट और अन्य शैक्षणिक आकलनों की व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। बच्चों की प्रगति का निरंतर आकलन कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे निर्धारित अधिगम लक्ष्यों की ओर अपेक्षित गति से आगे बढ़ रहे हैं।
यदि किसी विद्यार्थी में सीखने का अंतर (लर्निंग गैप) पाया जाता है तो उसके लिए विशेष कैच-अप शिक्षण कार्यक्रम और अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा सीखने की प्रक्रिया में पीछे न रह जाए। कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए व्यक्तिगत एवं समूह आधारित सुधारात्मक शिक्षण गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
समय-समय पर होगी समीक्षा
कार्ययोजना में शिक्षकों के क्षमता संवर्धन को मिशन की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना गया है। शिक्षकों को दक्षता आधारित शिक्षा, गतिविधि आधारित शिक्षण, प्रभावी टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मैटेरियल) के उपयोग, डिजिटल शिक्षण संसाधनों तथा डीक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इससे शिक्षक नई शिक्षण पद्धतियों को अपनाकर बच्चों की सीखने की क्षमता को बेहतर ढंग से विकसित कर सकेंगे।
सरकार ने विद्यालयों और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया है। अभिभावकों और समुदाय की सहभागिता बढ़ाकर बच्चों के लिए अनुकूल शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की योजना बनाई गई है। इससे विद्यालयों में सीखने की संस्कृति को मजबूत करने और बच्चों की नियमित प्रगति सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग एवं समीक्षा तंत्र विकसित किया जाएगा। अधिकारियों द्वारा समय-समय पर प्रगति की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि अधिगम लक्ष्यों की प्राप्ति केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बेहतर सीखने के परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दें। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप दक्षता आधारित शिक्षा प्रणाली को गति मिलेगी और भविष्य की कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को बेहतर रूप से तैयार किया जा सकेगा।
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