झांसी में अब GNSS रोवर टेक्नोलॉजी से होगी खेतों की पैमाइश, भूमि विवादों के निस्तारण में आएगी तेजी
खबर सार :-
झांसी में अब जीएनएसएस (GNSS) रोवर टेक्नोलॉजी से खेतों की पैमाइश होगी। नई व्यवस्था से भूमि सीमांकन अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध होगा, जिससे भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी आएगी।
खबर विस्तार : -
झांसी: उत्तर प्रदेश में राजस्व विभाग भूमि सीमांकन और पैमाइश की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसी क्रम में झांसी जनपद में अब खेतों की पैमाइश पारंपरिक जरीब और फीते के बजाय ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) रोवर टेक्नोलॉजी से की जाएगी। नई व्यवस्था से भूमि की माप अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध होगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे भूमि संबंधी विवादों में कमी आएगी और लंबित मामलों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में भी तेजी मिलेगी।
सीमांकन विवाद में आएगी कमी
इस संबंध में शनिवार को कलेक्ट्रेट के नवीन सभागार में आयोजित बैठक में अपर आयुक्त (प्रशासन) प्रियंका ने राजस्व अधिकारियों को नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। बैठक का उद्देश्य जनपद की सभी तहसीलों में जीएनएसएस रोवर तकनीक के माध्यम से भूमि सीमांकन की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से लागू करना था।
बैठक को संबोधित करते हुए अपर आयुक्त ने कहा कि अब तक अधिकांश भूमि सीमांकन और पैमाइश उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 के तहत जरीब, फीता और अन्य पारंपरिक उपकरणों से की जाती रही है। इस प्रक्रिया में समय अधिक लगता है और कई बार माप को लेकर विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं। ऐसे मामलों में दोबारा पैमाइश की आवश्यकता पड़ती है, जिससे किसानों और प्रशासन दोनों का समय प्रभावित होता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस, भारत सरकार के ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित रोवर तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया है। इस तकनीक के माध्यम से भूमि की अत्यंत सटीक पैमाइश संभव होगी, जिससे सीमांकन को लेकर विवाद की संभावना काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
अपर आयुक्त ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 1 जुलाई 2026 से प्रदेश के सभी जनपदों में जीएनएसएस रोवर तकनीक के माध्यम से भूमि पैमाइश की व्यवस्था लागू की जा रही है। झांसी की सभी तहसीलों को एक-एक रोवर उपकरण उपलब्ध करा दिया गया है। इसके साथ ही राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को उपकरण के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है, ताकि नई व्यवस्था को बिना किसी कठिनाई के लागू किया जा सके।
उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में प्रत्येक तहसील में एक-एक खेत की पैमाइश नई रोवर तकनीक से कराई जाएगी। इसके बाद उसी खेत की पारंपरिक विधि से की गई पैमाइश से तुलना की जाएगी। इस तुलनात्मक परीक्षण के आधार पर नई तकनीक की सटीकता, प्रभावशीलता और उपयोगिता का मूल्यांकन किया जाएगा। सफल परिणाम मिलने के बाद भविष्य में भूमि सीमांकन की पूरी प्रक्रिया आधुनिक तकनीक पर आधारित की जाएगी।
अपर आयुक्त ने कहा कि वर्तमान में जरीब, फीता, चुंबकीय सूई, मापक छड़, झंडियां और लट्ठों जैसे पारंपरिक उपकरणों से सीमांकन में अधिक समय लगता है और कई बार परिणाम पूरी तरह सटीक नहीं होते। जीएनएसएस रोवर तकनीक अपनाने से सीमांकन का कार्य तेज, पारदर्शी और अधिक विश्वसनीय होगा। इससे राजस्व न्यायालयों में लंबित भूमि विवादों के निस्तारण में भी गति आएगी और किसानों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
अपर आयुक्त ने दिए निर्देश
उन्होंने स्पष्ट किया कि नई तकनीक का उपयोग उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-24 तथा उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली-2016 के नियम-22 के प्रावधानों का पालन करते हुए किया जाएगा। इससे कानूनी प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी और सभी सीमांकन नियमानुसार किए जाएंगे।
बैठक में अपर आयुक्त ने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव-गांव चौपाल आयोजित कर किसानों को नई तकनीक के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को यह बताया जाए कि जीएनएसएस रोवर तकनीक से पैमाइश अधिक सटीक होगी और भूमि विवादों का समयबद्ध समाधान संभव हो सकेगा। व्यापक जनजागरूकता से नई व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा।
बैठक के दौरान मास्टर ट्रेनर ओम मिश्रा और अंबरीश शुक्ला ने अधिकारियों को रोवर तकनीक के संचालन, जीपीएस आधारित मापन प्रणाली और खेतों की पैमाइश की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद जीआईसी मैदान में रोवर उपकरण का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें अधिकारियों ने आधुनिक तकनीक से भूमि मापन की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) श्रीमती पल्लवी मिश्रा, नायब तहसीलदार सुनील तिवारी, ललितपुर और जालौन के अपर जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित बड़ी संख्या में राजस्व अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से भूमि सीमांकन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और किसानों को त्वरित एवं पारदर्शी सेवाएं मिल सकेंगी।
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