खुद को भगवान शिव का अवतार बताने वाले बंधु बाबा पर ED का शिकंजा, 36.90 करोड़ की संपत्ति जब्त

खबर सार :-

खुद को भगवान शिव का अवतार बताकर लोगों को ठगने वाला बंधु बाबा उर्फ अशोक कुमार खरात पर ईडी ने कड़ी कार्रवाई की है। लोगों को ठगकर अवैध वसूली करने और मनी लाॅन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने अशोक कुमार खैरात की 36.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं।
खुद को भगवान शिव का अवतार बताने वाले बंधु बाबा पर ED का शिकंजा, 36.90 करोड़ की संपत्ति जब्त

खबर विस्तार : -

मुंबई: मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में एक अहम कदम उठाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल ऑफिस ने मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट में अशोक कुमार एकनाथ खरात, उनकी पत्नी कल्पना खरात और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (मुकदमा चलाने की शिकायत) दायर की है।

ED की यह कार्रवाई उन आरोपों की लंबे समय से चल रही जांच का हिस्सा है, जिनमें कहा गया है कि आरोपियों ने लोगों की धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर उनसे गैर-कानूनी तरीके से करोड़ों रुपये वसूले और बाद में अलग-अलग तरीकों से इन पैसों को वैध (legitimate) दिखाने की कोशिश की।

36.90 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त

ED ने बताया कि 15 जुलाई को अशोक कुमार खरात (उर्फ कैप्टन/बंधु बाबा) और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद लगभग 19.20 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को  अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) किया गया। इससे पहले, अप्रैल और मई 2024 में आरोपियों और उनके सहयोगियों से जुड़ी अलग-अलग जगहों, बैंक लॉकर्स और गाड़ियों की तलाशी के दौरान लगभग 17.70 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी। कुल मिलाकर इस मामले में अब तक लगभग 36.90 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।

लोगों को धोखा देकर इकट्ठा किया धन

ED ने महाराष्ट्र के सरकार वाडा, शिरडी, सिन्नर और राहाता पुलिस स्टेशनों में दर्ज कई FIR के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। जांच के दौरान, एजेंसी को ऐसे सबूत मिले जिनसे पता चला कि अशोक कुमार एकनाथ खरात ने लोगों की धार्मिक भावनाओं और आस्था का फायदा उठाया; आरोप है कि उन्होंने 'अवतार पूजा' करने, गंभीर बीमारियों को ठीक करने, दुर्भाग्य को दूर करने और व्यापार व जीवन में सफलता दिलाने का वादा करके लोगों को धोखा दिया और भारी मात्रा में पैसा और संपत्ति जमा की।

कई बैंक खातों में जमा किए रुपये

ED की जांच में यह भी पता चला कि अशोक कुमार खरात खुद को भगवान शिव का अवतार बताकर और दैवीय शक्तियां होने का दावा करके भक्तों का भरोसा जीतते थे। एजेंसी का आरोप है कि अपराध से हुई कमाई को छिपाने और उसे वैध रूप देने के लिए दो कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटियों का इस्तेमाल किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान, एक कर्मचारी की मिलीभगत से कई बैंक खाते धोखाधड़ी से चलाए गए। जांच में यह भी पता चला कि बड़ी मात्रा में कैश जमा करने और बाद में निकालने के लिए कई बेनामी खातों का इस्तेमाल किया गया था; इनमें अलग-अलग निवेशों की मैच्योरिटी पर मिले पैसे भी शामिल थे।

अचल संपत्तियों में किया निवेश

ED के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग से कमाए गए पैसे आरोपी के भरोसेमंद साथियों के पास रखे गए थे और बाद में नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे और मुंबई में परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने में निवेश किए गए। एजेंसी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद अपराध से मिली रकम के असली स्रोत को छिपाना और उन्हें वैध निवेश के तौर पर दिखाना था। इससे पहले, 19 मई को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में अशोक कुमार एकनाथ खरात को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से ही वह न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले की जांच चल रही है और ED इस पूरे नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों और संपत्तियों की भी जांच कर रही है।

 

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