Giridih: जंगल में चल रहा था साइबर ठगी का कंट्रोल रूम, 6 जालसाजों को पुलिस ने दबोचा
खबर सार :-
गिरिडीह जिले में पुलिस ने 6 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। इन्होंने पुलिस को चकमा देने के लिए जंगल में अपना कंट्रोल रूम बनाकर रखा था। पुलिस इनके बैंक खातों व संपत्तियों की जांच कर रही है।
खबर विस्तार : -
गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिले में साइबर जालसाजों ने अब पुलिस से बचने के लिए जंगलों को अपना नया 'सुरक्षित ठिकाना' बना लिया है। गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. बिमल कुमार को मिली एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए, साइबर पुलिस यूनिट ने बेंगाबाद पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में आने वाले चरणबारी और कोठहरिया जंगलों के भीतर चल रहे एक हाई-टेक 'जंगल कंट्रोल रूम' का भंडाफोड़ किया।
पुलिस ने मौके पर ही छह शातिर साइबर अपराधियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। ये लोग पूरे देशभर के लोगों को अपना निशाना बना रहे थे। पुलिस के अनुसार, इन अपराधियों ने अपने ठिकाने घने जंगलों के काफी अंदर आबादी वाले इलाकों से बहुत दूर बना रखे थे, ताकि वे दूर से ही पुलिस की गतिविधियों पर नजर रख सकें और बिना किसी का ध्यान खींचे, मोबाइल नेटवर्क सिग्नल का इस्तेमाल करते हुए अपनी धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दे सकें।
लिंक भेजकर करते थे फोन हैक
जंगल से ऑपरेट करने वाले इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। ये अपराधी लोगों के मोबाइल फोन पर नकली APK फाइलों के लिंक भेजते थे। जैसे ही कोई अनजान व्यक्ति उस लिंक को खोलता था। जंगल में बैठे ये जालसाज उस व्यक्ति के मोबाइल डिवाइस का पूरा एक्सेस हासिल कर लेते थे। इसके बाद, उस हैक किए गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके, वे कुछ ही मिनटों के भीतर पीड़ितों के बैंक खातों से उनकी गाढ़ी कमाई उड़ा लेते थे। गिरफ्तार अपराधियों की पहचान महेंद्र कुमार मंडल, कृष्ण कुमार मंडल, ईश्वर मंडल, पंकज कुमार मंडल, रंजीत कुमार मंडल और आदित्य कुमार मंडल के रूप में हुई है।
11 मोबाइल, 13 सिम कार्ड और 5 मोटरसाइकिलें बरामद
पुलिस ने इनके कब्जे से 11 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड और 5 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। इन चीजों का इस्तेमाल जंगल में बने ठिकाने तक आने-जाने और अपने धोखाधड़ी के उपकरणों को छिपाने के लिए किया जाता था। SP डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि गिरफ्तार अपराधियों में से कई 'हिस्ट्रीशीटर' (आदतन अपराधी) हैं, जो पहले दिल्ली और गिरिडीह के अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज मामलों के सिलसिले में जेल की सजा काट चुके हैं। जेल से रिहा होने के बाद, उन्होंने अपना गिरोह फिर से बना लिया और इस बार उन्होंने जंगलों को अपना ऑपरेशनल बेस (कार्यक्षेत्र) चुना। पुलिस अब इन जालसाजों के बैंक खातों और अन्य संपत्तियों की भी जांच कर रही है।
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