जनता दर्शन में जिलाधिकारी ने आयुष्मान कार्ड और आवास किए आवंटित
खबर सार :-
रामपुर कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित जन सुनवाई में डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए कई परिवारों को राहत दी। गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों को आयुष्मान कार्ड और जरूरतमंद परिवारों को आवास आवंटित किए गए।
खबर विस्तार : -
रामपुरः कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित जन सुनवाई कार्यक्रम कई परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा। ज़िलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए न सिर्फ़ पीड़ितों की समस्याओं को ध्यान से सुना, बल्कि स्वास्थ्य और आवास की समस्याओं से जूझ रहे परिवारों को मौके पर ही काफ़ी राहत भी दी।
मुफ्त इलाज का मिला आश्वासन
जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान, सदर तहसील की शिव विहार कॉलोनी के रहने वाले राजेश अपनी बुज़ुर्ग माँ मुन्नी देवी के साथ ज़िलाधिकारी के पास अपनी समस्या लेकर पहुँचे। राजेश ने अपने बेटे रघुवीर यादव की गंभीर दिल की बीमारी और अपनी आर्थिक परेशानियों के बारे में बताया। ज़िलाधिकारी ने तुरंत राजेश, उनकी माँ मुन्नी देवी और रघुवीर को रघुवीर के दिल के इलाज के लिए आयुष्मान भारत कार्ड दिए। इससे अब रघुवीर को बेहतर मेडिकल सुविधा में मुफ़्त इलाज मिल पाएगा। परिवार की आवास की समस्या को देखते हुए, उन्होंने उन्हें काशीराम आवास (आवास इकाई) भी आवंटित किया, जिससे उनकी आवास की समस्या हल हो गई।
इसके अलावा, सदर तहसील के पंजाबनगर गाँव के रहने वाले राकेश और उनकी बेटी रितिका को भी काफ़ी राहत मिली। रितिका कई दिनों से अपने इलाज को लेकर परेशान थी और पहले भी जन सुनवाई कार्यक्रम में आई थी। मामले का संज्ञान लेते हुए, ज़िलाधिकारी ने उन्हें भी आयुष्मान भारत कार्ड सौंपे, ताकि वे सीधे सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ उठा सकें।
अधिकारियों को दिए निर्देश
जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य, आवास, राशन कार्ड और भूमि चकबंदी जैसे कई जनहित के मुद्दे उठाए गए। ज़िलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता की समस्याओं का समाधान सिर्फ़ फ़ाइलों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर दिखना चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि सिर्फ़ शिकायत का समाधान करना ही काफ़ी नहीं है; शिकायतकर्ता की संतुष्टि ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने साफ़ निर्देश दिए हैं कि कोई भी योग्य व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि जन सुनवाई कार्यक्रम में आने वाला हर याचिकाकर्ता मुस्कुराते हुए वापस जाना चाहिए।
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