मदरसों में कामिल-फाजिल पाठ्यक्रम बंद करने की तैयारी में सरकार, डिप्टी सीएम के बयान से बढ़ा सियासी विवाद

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश सरकार मदरसों में कामिल और फाजिल पाठ्यक्रम बंद करने का प्रस्ताव कैबिनेट में ला सकती है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान से इस बात के संकेत मिल रहे हैं।
यूपी सरकार मदरसों में कामिल-फाजिल पाठ्यक्रम बंद करेगी? केशव मौर्य के बयान से विवाद

खबर विस्तार : -

लखनऊः उत्तर प्रदेश सरकार मदरसों में संचालित उच्च शिक्षा स्तर के पाठ्यक्रमों को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। मंगलवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में एक प्रस्ताव लाए जाने की संभावना है, जिसके तहत मदरसों में संचालित कामिल (ग्रेजुएशन समकक्ष) और फाजिल (पोस्ट ग्रेजुएशन समकक्ष) पाठ्यक्रमों को बंद किया जा सकता है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के मान्यता प्राप्त मदरसों में केवल 12वीं कक्षा तक की शिक्षा ही संचालित की जा सकेगी।

सरकार का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया जा रहा है। हालांकि इस प्रस्ताव के सामने आने के साथ ही प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के मदरसा शिक्षा को लेकर दिए गए बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार की तैयारी

राज्य सरकार का तर्क है कि यह फैसला 5 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंजुम कादरी बनाम भारत संघ मामले में दिए गए आदेश के आधार पर लिया जा रहा है। अदालत ने कहा था कि ऐसे उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित मानकों और दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें जारी नहीं रखा जा सकता। इसी आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार मदरसा बोर्ड के तहत संचालित कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों को समाप्त करने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में इन पाठ्यक्रमों को क्रमशः स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के समकक्ष माना जाता है।

केशव प्रसाद मौर्य के बयान से बढ़ा विवाद

इस बीच डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मीडिया से बातचीत के दौरान मदरसा शिक्षा को लेकर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह सच है कि मदरसा शिक्षा से कई बड़े आतंकवादी निकले हैं, चाहे उन्होंने भारत में हमले किए हों या दुनिया के किसी अन्य हिस्से में।

उन्होंने आगे कहा कि मैं पहले भी कह चुका हूं और आज फिर दोहराता हूं कि जो मदरसा शिक्षा लेता है, वह 'भारत माता की जय' नहीं कहता, 'वंदे मातरम' नहीं गाता और उसकी सोच आतंकवादी जैसी हो जाती है। मौर्य के इस बयान पर विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

प्रदेश में क्या है मौजूदा व्यवस्था?

फिलहाल उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसों में कामिल और फाजिल की पढ़ाई कराई जाती है। इन डिग्रियों को लंबे समय से क्रमशः स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के समकक्ष माना जाता रहा है। यदि सरकार का प्रस्ताव पारित हो जाता है तो भविष्य में इन पाठ्यक्रमों में नए प्रवेश बंद हो जाएंगे और मदरसों में शिक्षा का दायरा केवल माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर तक सीमित रह जाएगा।

2027 चुनाव पर भी साधा विपक्ष पर निशाना

मदरसा शिक्षा के मुद्दे के साथ-साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे ब्राह्मण सम्मेलन करे, क्षत्रिय सम्मेलन आयोजित करे, पिछड़ा वर्ग सम्मेलन करे या फिर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति को आगे बढ़ाए, उसकी हार तय है। मौर्य ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि 2027 तक उनकी राजनीतिक स्थिति और कमजोर हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी का चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ केवल सैफई तक ही सीमित रह जाएगा।

राजनीतिक बहस तेज होने के आसार

मदरसों में उच्च शिक्षा समाप्त करने के प्रस्ताव और डिप्टी सीएम के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन बता रही है, वहीं विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगे जाने की संभावना है। कैबिनेट बैठक के बाद यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। साथ ही, इस फैसले और उससे जुड़े राजनीतिक बयानों का असर आगामी विधानसभा चुनावों की राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।

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