US Elections पर ट्रंप की सख्ती, बोले- जो राज्य निष्पक्ष चुनाव नहीं करा सकते, वहां संघीय सरकार करे दखल
खबर सार :-
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान अमेरिका की संघीय व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया को लेकर नई बहस को जन्म देता है। जहां ट्रंप निष्पक्ष चुनाव के नाम पर संघीय हस्तक्षेप की वकालत कर रहे हैं, वहीं आलोचक इसे राज्यों के अधिकारों पर हमला मानते हैं। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति का अहम केंद्र बनने वाला है।
खबर विस्तार : -
US Elections: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर देश की चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ा और विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि जिन राज्यों में निष्पक्ष, कानूनी और ईमानदार तरीके से चुनाव नहीं हो पा रहे हैं, वहां संघीय सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। ट्रंप के इस बयान ने अमेरिका की संघीय व्यवस्था और संविधान में राज्यों को मिले अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है।
व्हाइट हाउस में मंगलवार को एक बड़े खर्च विधेयक पर हस्ताक्षर करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने राज्य स्तर पर चुनाव कराए जाने की मौजूदा प्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने साफ कहा कि चुनावों की ईमानदारी लोकतंत्र की नींव है और इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
“ईमानदारी से चुनाव नहीं, तो जिम्मेदारी किसी और को”
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “मैं चाहता हूं कि चुनाव पूरी तरह ईमानदारी से हों। अगर कोई राज्य चुनाव सही ढंग से नहीं करा सकता, तो मुझे लगता है कि संघीय सरकार को कुछ करना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनावों के मामले में राज्य, संघीय सरकार के एजेंट की तरह काम करते हैं और यदि वे वोटों की गिनती निष्पक्षता से नहीं कर पा रहे हैं, तो किसी और को यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। जब एक पत्रकार ने अमेरिकी संविधान का हवाला देते हुए पूछा कि चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्यों की है, तो ट्रंप ने जवाब दिया कि राज्य चुनाव करा सकते हैं, लेकिन शर्त यह है कि वे यह काम ईमानदारी और कानूनी तरीके से करें।
पुराने आरोप फिर दोहराए, बड़े शहरों पर साधा निशाना
ट्रंप ने पिछली चुनावी प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोप एक बार फिर दोहराए। उन्होंने डेट्रॉइट, पेनसिल्वेनिया, फिलाडेल्फिया और अटलांटा जैसे शहरों का नाम लेते हुए कहा कि वहां “भयानक स्तर का भ्रष्टाचार” हुआ है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।

वोटर आईडी पर जोर: “धोखा देने वालों को ही आपत्ति”
राष्ट्रपति ने वोटर आईडी को अनिवार्य करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा, “हमें वोटर आईडी चाहिए। कौन नहीं चाहेगा कि वोटर आईडी हो? सिर्फ वही जो धोखा देना चाहता हो।” ट्रंप का मानना है कि वोटर आईडी लागू होने से चुनावी धोखाधड़ी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
चुनावी ईमानदारी और जनता का भरोसा
ट्रंप ने कहा कि चुनावों की निष्पक्षता सीधे तौर पर देश के शासन और जनता के भरोसे से जुड़ी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि संघीय सरकार “टेढ़े-मेढ़े चुनाव” बर्दाश्त नहीं करेगी। उनका कहना था कि यदि लोकतंत्र में विश्वास कमजोर पड़ा, तो पूरे सिस्टम पर असर पड़ेगा।
आव्रजन नीति पर सख्त रुख बरकरार
इसी दौरान आव्रजन के मुद्दे पर भी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी सरकार की सख्त नीतियों का बचाव किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या इमिग्रेशन एजेंटों को तलाशी के लिए सर्च वारंट लेना चाहिए, तो उन्होंने कहा, “मैं इस बारे में सोच ही नहीं रहा हूं। मैं सर्च वारंट के बारे में नहीं सोचता।”

लिंडसे ग्राहम का समर्थन, सैंक्चुरी सिटी पर हमला
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के रुख का समर्थन करते हुए तथाकथित ‘सैंक्चुरी सिटी’ नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये नीतियां अवैध आव्रजन को बढ़ावा देती हैं। ग्राहम के अनुसार, जब तक 12 राज्यों में सैंक्चुरी नीति रहेगी, तब तक अवैध प्रवासियों का आना जारी रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि इन नीतियों को खत्म करने के लिए वे नया कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं।
अपराध में गिरावट और धोखाधड़ी पर दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि सख्त आव्रजन नीति और कड़ी कार्रवाई से अपराध में ऐतिहासिक गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि सीमा पार करने की घटनाएं काफी कम हुई हैं और पूरे देश में हिंसक अपराध पिछले 100 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर है। ट्रंप ने मिनेसोटा और कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोप भी लगाए और कहा कि यदि धोखाधड़ी पूरी तरह पकड़ ली जाए, तो बिना किसी कटौती के बजट घाटा समाप्त किया जा सकता है।
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