Tamil Nadu Assembly By-Election: सत्ताधारी टीवीके की बड़ी परीक्षा, पांच तरफा मुकाबले से रोचक हुआ चुनाव

खबर सार :-

तमिलनाडु विधानसभा उपचुनाव सत्ताधारी टीवीके के लिए बड़ी चुनावी परीक्षा है। धारापुरम और मदुरंतकम सीट पर होने वाले उपचुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। धारापुरम सीट पर टीवीके ने पी सत्यभामा को चुनावी मैदान में उतारा है।
धारापुरम विधानसभा उपचुनाव टीवीके के लिए बनीं बड़ी चुनावी परीक्षा

खबर विस्तार : -

Tamil Nadu Assembly By-Election: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन की बदौलत टीवीके सत्ता पर काबिज हुई है। अब तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी टीवीके के लिए धारापुरम विधानसभा उपचुनाव एक बड़ी चुनावी परीक्षा बन गया है। इस सीट पर पांच तरफा मुकाबला, बदलते गठबंधन और विपक्ष के प्रचार के कारण सत्ता पक्ष को विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिशों में चुनौती मिलने की पूरी संभावना जतायी जा रही है। तिरुपुर जिले में यह पहला विधानसभा उपचुनाव है, जो काफी अहम माना जा रहा है। अगर टीवीके धारापुरम और मदुरंतकम में जीत हासिल करती है, तो सरकार की विधानसभा में स्थिति और मजबूत हो जाएगी।

टीवीके ने इस सीट से पी. सत्यभामा को चुनावी मैदान में उतारा 

टीवीके ने इस सीट से पी. सत्यभामा को चुनावी मैदान में उतारा है। उनके सामने डीएमके की सुकन्या, एआईएडीएमके की के. भानुमति, सीपीआई के पी. लक्ष्मणन और नाम तमिलर काची की कार्तिका चुनाव लड़ रही हैं। बता दें कि पी. सत्यभामा ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस सीट पर एआईएडीएमके के टिकट पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और टीवीके में शामिल हो गईं।

विधानसभा चुनाव में धारापुरम में 88.84 प्रतिशत हुआ था मतदान 

2026 के विधानसभा चुनाव में धारापुरम में 88.84 प्रतिशत मतदान हुआ था। सत्यभामा ने 81,100 वोट हासिल कर डीएमके उम्मीदवार पी. इंद्राणी को हराया था, जिन्हें 64,373 वोट मिले थे। जीत का अंतर 16,727 वोट था। टीवीके की एस. गौरी चित्रा 46,438 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं, जो कुल वोटों का 23.23 प्रतिशत था। नाम तमिलर काची की पी. दिव्या को 6,026 वोट मिले थे। ये आंकड़े सत्ताधारी पार्टी के समर्थन बढ़ाने के प्रयासों की पृष्ठभूमि पेश करते हैं।

निर्दलीय उम्मीदवार ने जीता था धारापुरम का पहला चुनाव 

धारापुरम का चुनावी इतिहास किसी भी दावेदार के लिए निश्चितता नहीं देता। 1952 से अब तक डीएमके और एआईएडीएमके ने छह बार, कांग्रेस ने तीन बार और पीएमके ने एक बार जीत हासिल की है। पहला चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीता था। 1984 में एआईएडीएमके की लगातार तीसरी जीत के बाद से किसी भी पार्टी ने लगातार दो बार इस सीट को नहीं जीता है। बदले हुए गठबंधन समीकरण डीएमके के लिए भी चुनौती हैं, जिसे अपने व्यापक गठबंधन का समर्थन करने वाले वोटरों को बनाए रखते हुए टीवीके और एआईएडीएमके दोनों के खिलाफ अपनी पकड़ फिर से बनानी होगी। पी. सत्यभामा का जीत के तुरंत बाद इस्तीफा देने का फैसला कुछ जगहों पर असंतोष का कारण बना हुआ है। क्या यह असंतोष एक बड़ी चुनावी हार में बदलेगा, यह अभी कहना मुश्किल है।

ये भी पढ़ें- चुनाव आयोग ने घोषित की यूपी, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में राज्यसभा चुनाव की तारीखें, 16 अक्टूबर को वोटिंग

अन्य प्रमुख खबरें