संजय राउत का भाजपा-शिंदे पर हमला, बोले- राजनीतिक लाभ के लिए कराई जा रही ‘बगावत’
खबर सार :-
संजय राउत ने पार्टी के कुछ सांसदों की कथित बगावत को लेकर बीजेपी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शिवसेना सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि विचारधारा और संघर्ष की एक परंपरा है।
खबर विस्तार : -
मुंबईः शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पार्टी के कुछ सांसदों की कथित बगावत को लेकर भाजपा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला है। अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोखठोक’ में राउत ने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने की चर्चा में रहे सांसदों का कदम किसी वैचारिक मतभेद का परिणाम नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ, सत्ता के दबाव और सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
सौदेबाजी और दबाव की राजनीति का आरोप
पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित अपने लेख में राउत ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों और नेताओं को पार्टी से अलग करने के लिए बड़े स्तर पर राजनीतिक सौदेबाजी और दबाव की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों, क्षेत्रीय हितों और जनता की सेवा के नाम पर दल-बदल को उचित ठहराने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि इसके पीछे का वास्तविक उद्देश्य राजनीतिक लाभ हासिल करना और सत्ता के समीकरणों को मजबूत करना है।
राउत ने कहा कि जिन जनप्रतिनिधियों को शिवसेना के चुनाव चिह्न, पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में जनता का समर्थन प्राप्त हुआ, उनका पार्टी छोड़ना मतदाताओं के जनादेश के साथ विश्वासघात के समान है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक निष्ठा बदलना केवल एक दल का नुकसान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाला कदम है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती
अपने लेख में राउत ने दल-बदल की राजनीति की तुलना इतिहास के चर्चित विश्वासघातियों से करते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज के राजनीतिक माहौल में दल-बदल और राजनीतिक वफादारी बदलने की घटनाओं को “बगावत” या “क्रांति” के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जबकि वास्तव में यह लोकतांत्रिक नैतिकता और राजनीतिक सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका मानना है कि विचारधारा, संगठन और जनता के प्रति जवाबदेही को दरकिनार कर केवल सत्ता के आधार पर लिए गए निर्णय लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करते हैं।
राउत ने आरोप लगाया कि देश में “आयाराम-गयाराम” की राजनीति को बढ़ावा मिला है, जिसके कारण राजनीतिक नैतिकता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने या सत्ता बनाए रखने के लिए जनप्रतिनिधियों को तोड़ने और दलों में विभाजन पैदा करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ऐसी राजनीति से जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।
जनादेश के साथ विश्वासघात
शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस और पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे के जन्मशताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए राउत ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि विचार, संघर्ष और जनआंदोलन की परंपरा का प्रतीक है। पार्टी ने दशकों तक कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास के आधार पर अपनी पहचान बनाई है।
राउत ने विश्वास जताया कि जनता समय आने पर ऐसे राजनीतिक व्यवहार का जवाब देगी। उन्होंने कहा कि मतदाता जनादेश के साथ हुए कथित विश्वासघात को आसानी से नहीं भूलेंगे और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में अपना निर्णय देंगे। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत बनाए रखने और विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
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