नीट पेपर लीक विवाद: राज ठाकरे का केंद्र, कोचिंग संस्थानों और शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला

खबर सार :-

नीट परीक्षा पेपर लीक विवाद पर एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार, कोचिंग संस्थानों और शिक्षा व्यवस्था की कड़ी आलोचना की। जंतर-मंतर छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर उन्होंने कई अहम सवाल उठाए।
NEET paper leak controversy: राज ठाकरे ने केंद्र और कोचिंग संस्थानों पर साधा निशाना

खबर विस्तार : -

नासिक: नीट परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार, निजी कोचिंग संस्थानों और मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। शुक्रवार को महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर 40 दिनों तक चला छात्रों का आंदोलन केवल शुरुआत है और आने वाले समय में यह जनआक्रोश और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।

शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल

राज ठाकरे ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा किया गया प्रदर्शन केवल उन युवाओं तक सीमित नहीं था जिन्होंने नीट परीक्षा दी थी, बल्कि यह पूरे समाज में बढ़ते असंतोष का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर छात्रों का आंदोलन कई वर्षों बाद देखने को मिला है। उनके अनुसार, हर माता-पिता का बच्चा नीट परीक्षा का अभ्यर्थी नहीं था, लेकिन फिर भी देशभर के लोगों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया क्योंकि उन्हें लगा कि यह केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शांतिपूर्ण आंदोलन को संभालने के बजाय उसे और अधिक भड़काने का काम किया। ठाकरे ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी युवाओं पर बल प्रयोग किया तो इस आंदोलन का असर देश के हर घर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि माता-पिता और बुजुर्गों को ऐसा महसूस हुआ जैसे उनके अपने बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा हो। उनके अनुसार, सरकार की इस कार्रवाई ने जनता के भीतर मौजूद असंतोष को और बढ़ा दिया।

निजी कोचिंग संस्थानों पर साधा निशाना

एमएनएस प्रमुख ने यह भी दावा किया कि मौजूदा स्थिति भाजपा के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर मौजूद संघर्ष अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं और इसका प्रभाव शासन व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रकांत पाटिल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य के नेताओं को प्रशासनिक और राजनीतिक विवादों में उलझने के बजाय छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और सरकार को इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

निजी कोचिंग संस्थानों पर सवाल उठाते हुए ठाकरे ने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में कोचिंग उद्योग का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कक्षा 10 के बाद बड़ी संख्या में छात्र सीधे कोचिंग संस्थानों का रुख करते हैं और दिन के आठ-आठ घंटे वहीं बिताते हैं। ऐसे में कॉलेजों की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं।

निष्पक्ष जांच की मांग

उन्होंने पूछा कि जब छात्र अपना अधिकांश समय कोचिंग केंद्रों में बिताते हैं तो कॉलेजों में उनकी उपस्थिति कैसे दर्ज होती है और उच्च शिक्षा संस्थानों का वास्तविक उद्देश्य क्या रह जाता है। उनके अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में कोचिंग संस्थान प्रभावी रूप से छात्रों के भविष्य और कॉलेज प्रवेश की दिशा तय करने लगे हैं, जो शिक्षा प्रणाली के लिए चिंताजनक स्थिति है।

हालांकि राज ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी निजी कोचिंग संस्थान गलत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कई संस्थान ईमानदारी से छात्रों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह व्यवसायिक हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने जैसी घटनाओं की शुरुआत भी इसी व्यवसायिक व्यवस्था से हुई और इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संबंधित अधिकारियों से मांग की कि ऐसे संस्थानों की भूमिका की गहन जांच कर उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। ठाकरे ने कहा कि केवल परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे तंत्र की समीक्षा आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग

राज ठाकरे ने इस दौरान परीक्षा विवाद से जुड़े छात्र आत्महत्या के मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि देशभर में नीट विवाद से जुड़े तनाव के कारण 21 छात्रों ने आत्महत्या की। उन्होंने विशेष रूप से नासिक के छात्र यश गोसावी का जिक्र करते हुए कहा कि कथित तौर पर पेपर लीक के बाद अवसाद में आकर उन्होंने आत्महत्या कर ली, लेकिन उनका नाम सरकार की आधिकारिक पीड़ितों की सूची में शामिल नहीं किया गया। ठाकरे ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और सभी प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनके अनुसार, यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो छात्रों और अभिभावकों का बढ़ता असंतोष भविष्य में और बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

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