ट्रंप की धमकी से पहले राष्ट्रपति पेजेश्कियन का बड़ा बयान, इजरायल की चेतावनी से बढ़ा तनाव
खबर सार :-
ईरान के राष्ट्रपति का 1.4 करोड़ लोगों के बलिदान के लिए तैयार होने का दावा और अमेरिका-इजरायल की सख्त चेतावनियां मिलकर हालात को बेहद विस्फोटक बना रही हैं। कूटनीति के बजाय टकराव की भाषा तेज होती दिख रही है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह तनाव बड़े युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
खबर विस्तार : -
Iran President Pezeshkian Statement: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान से एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के कुछ ही घंटों पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दावा किया कि देश के 1 करोड़ 40 लाख से अधिक नागरिक अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए जान कुर्बान करने को तैयार हैं। इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है और संभावित युद्ध की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।
‘देश के लिए मर-मिटने को तैयार जनता’
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अब तक 14 मिलियन से ज्यादा बहादुर ईरानियों ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान देने का संकल्प लिया है। उन्होंने खुद को भी इस सूची में शामिल बताते हुए कहा कि वे पहले भी देश के लिए समर्पित थे और आगे भी रहेंगे। ईरान की कुल आबादी लगभग 9 करोड़ है, ऐसे में यह आंकड़ा देश की एक बड़ी जनसंख्या के भावनात्मक और राष्ट्रवादी रुख को दर्शाता है। इस बयान को सरकार की ओर से जनता को एकजुट करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
ट्रंप की चेतावनी और बढ़ती तल्खी
इस बयान का समय बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए समयसीमा तय की थी। यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। ट्रंप के इस अल्टीमेटम के बाद क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विवाद और गहराता है तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अलीरेजा रहीमी की अनोखी अपील
राष्ट्रपति के बयान से पहले ईरान के युवा एवं खेल मामलों से जुड़े अधिकारी अलीरेजा रहीमी ने भी एक अनोखी अपील की थी। उन्होंने नागरिकों और युवाओं से कहा कि वे ऊर्जा संयंत्रों के बाहर मानव श्रृंखला बनाकर यह संदेश दें कि सार्वजनिक ढांचे पर हमला युद्ध अपराध है। रहीमी ने कहा कि यह कदम न सिर्फ सुरक्षा का प्रतीक होगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी एक मजबूत संदेश देगा कि ईरानी जनता अपने देश के साथ खड़ी है।
इजरायल की चेतावनी से बढ़ा डर
इसी बीच इजरायल की सेना आईडीएफ ने ईरान के भीतर संभावित खतरों को लेकर चेतावनी जारी की है। आईडीएफ ने नागरिकों से अपील की कि वे अगले 12 घंटे तक ट्रेन से यात्रा न करें और रेलवे ट्रैक से दूर रहें। इजरायल डिफेंस फोर्सेज का मानना है कि आतंकी गतिविधियों के लिए रेल मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस चेतावनी ने आम नागरिकों के बीच डर और अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंता
ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव पहले से ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना हुआ है। अब अमेरिका के सीधे हस्तक्षेप और ईरान के आक्रामक बयानों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति किसी बड़े सैन्य संघर्ष की ओर इशारा कर सकती है, जिससे वैश्विक शांति को खतरा पैदा हो सकता है।
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