हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र की हंगामेदार शुरुआत, ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नारेबाजी, कार्यवाही स्थगित
खबर सार :-
हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से शुरू हुआ। सत्र का पहला दिन हंगामेदार रहा। भाजपा विधायकों ने वंदे मातरम को लेकर नारेबाजी की, जिससे विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
खबर विस्तार : -
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार को भारी हंगामे के बीच शुरू हुआ। कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद, सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही केवल 10 मिनट तक ही चल पाई।
पहले दिन की कार्यवाही राष्ट्रगान के साथ शुरू हुई। इसके बाद, बीजेपी विधायकों ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के दो पद (स्टैंजा) गाए जाने की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी विधायकों ने जोर दिया कि सदन में राष्ट्रगीत गाया जाना चाहिए। इस बीच, सत्ताधारी दल के विधायक और मंत्री भी अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और जवाबी नारेबाजी करने लगे।
विपक्ष की तानाशाही पर नहीं चलेगी कार्यवाही: विधानसभा अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से और समापन राष्ट्रगीत से करने की स्थापित परंपराएं और नियम हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमाचल विधानसभा अपने नियमों के अनुसार काम करती है। अध्यक्ष के अनुसार, लोकसभा सहित कई विधानसभाओं में सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से और समापन राष्ट्रगीत से करने की प्रथा है। उन्होंने कहा कि कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा खड़ा कर दिया, जिससे कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा विपक्ष की तानाशाही पर नहीं चलेगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू बोले- भाजपा ने किया नियमों का उल्लंघन
इस मुद्दे पर सदन के बाहर भी सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बीजेपी पर सदन के भीतर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का सम्मान करती है और सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगान तथा समापन पर राष्ट्रगीत गाने की परंपरा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि न तो सरकार और न ही विधानसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रगीत गाने की अनुमति देने से इनकार किया था। उन्होंने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हुए यह मुद्दा उठाने का आरोप लगाया।
बीजेपी विधायक ने राष्ट्रगीत का अनादर करने का आरोप लगाया
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मानसून सत्र के पहले दिन सदन में दिवंगत पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि देने का प्रस्ताव भी पेश किया जाना था और ऐसे मौके पर हंगामा करना ठीक नहीं था। मुख्यमंत्री ने सदन में विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि बीजेपी विधायक बिना किसी नेतृत्व के हंगामा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार विधानसभा की परंपराओं के खिलाफ है और दिवंगत नेताओं के प्रति अनादर दिखाता है। वहीं, विपक्ष की ओर से बोलते हुए बीजेपी विधायक विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत का अनादर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी विधायकों ने सदन में राष्ट्रगीत गाने का विनम्र अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई।
रोजगार के मुद्दे पर भाजपा का विधानसभा परिसर में प्रदर्शन
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन, यानी शुक्रवार को, सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही रोजगार के मुद्दे पर राजनीतिक तनाव बढ़ गया। बीजेपी विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। राज्य के बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की मांग इस विपक्षी विरोध का मुख्य मुद्दा थी। बीजेपी विधायकों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य के युवाओं को नौकरी देने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन उन्हें पूरा करने में नाकाम रही। विपक्ष ने जांर देकर कहा कि बेरोज़गारी हिमाचल के युवाओं से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है और सरकार को विधानसभा में इस पर जवाब देना चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष पर तंज कसा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी बीजेपी के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है और विरोध जताना विपक्षी पार्टी का कर्तव्य है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने बीजेपी के विरोध को पार्टी की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर विपक्ष पर तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विधायक अपनी ही पार्टी के भीतर चल रही आपसी कलह के कारण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने टिप्पणी की कि बीजेपी नेता इस तरह के विरोध प्रदर्शन सिर्फ दिखावे के लिए और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की नजर में अच्छा बने रहने के लिए करते हैं।
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