जम्मू-कश्मीर में नए जिलों पर सियासत तेज: फारूक अब्दुल्ला का महबूबा को कड़ा जवाब, बोले-“रियासत को तोड़ने की साजिशें कभी सफल नहीं होंगी”
खबर सार :-
फारूक अब्दुल्ला के बयान से साफ है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस किसी भी तरह के क्षेत्रीय विभाजन के सख्त खिलाफ है। नए जिलों की मांग को उन्होंने विकास से ज्यादा राजनीतिक एजेंडा बताया। उनका जोर प्रशासनिक सुधार, संगठनात्मक मजबूती और जम्मू-कश्मीर की एकता बनाए रखने पर रहा, न कि नए जिलों या विभाजन की राजनीति पर।
खबर विस्तार : -
J&K new Distric Demand : जम्मू-कश्मीर की सियासत में एक बार फिर नए जिलों के मुद्दे पर गर्माहट बढ़ गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू संभाग में नए जिले बनाए जाने की मांग पर पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि रियासत को तोड़ने की कोशिशें पहले भी हुई हैं और आगे भी होती रहेंगी, लेकिन ऐसी साजिशें कभी कामयाब नहीं होंगी। फारूक अब्दुल्ला ने दो टूक शब्दों में कहा कि जम्मू संभाग में किसी भी सूरत में नए जिले नहीं बनाए जाएंगे।
जम्मू में मंगलवार को आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस के ब्लॉक अध्यक्षों और ब्लॉक सचिवों के सम्मेलन में बोलते हुए फारूक अब्दुल्ला ने संगठन और प्रशासन दोनों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से सुन रहा है और यह प्रयास किया जा रहा है कि संगठन को ब्लॉक स्तर पर और अधिक मजबूत किया जाए। उनके मुताबिक, ब्लॉक अध्यक्ष और सचिव ही पार्टी और जनता के बीच सबसे मजबूत कड़ी होते हैं।
बयानबाजी करना और दूसरों पर ऊंगली उठाना आसान
महबूबा मुफ्ती की ओर से जम्मू संभाग में नए जिले बनाए जाने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि जब वह खुद मुख्यमंत्री थीं और उनसे पहले उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं, तब उन्होंने इस दिशा में क्या किया। उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी करना और दूसरों पर उंगली उठाना आसान होता है, लेकिन सत्ता में रहते हुए लिए गए फैसले ही असली कसौटी होते हैं।
बुनियादी सुविधाओं की मजबूती पर सरकार का जोर
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर का प्रशासनिक ढांचा पहले से ही भारी दबाव में है। उन्होंने तर्क दिया कि नए जिले बनाने से आम लोगों की समस्याएं अपने आप हल नहीं हो जाएंगी, बल्कि इससे प्रशासनिक अव्यवस्था और बढ़ने की आशंका है। उनके अनुसार, पहले से मौजूद जिलों को बेहतर तरीके से चलाना और वहां बुनियादी सुविधाएं मजबूत करना ज्यादा जरूरी है।
क्षेत्रीय या भौगोलिक विभाजन की राजनीति स्वीकार नहीं
अब्दुल्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि विकास के नाम पर क्षेत्रीय या भौगोलिक विभाजन की राजनीति एनसी को स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के इतिहास में इसे बांटने की कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन हर बार जनता की एकता ने उन्हें नाकाम कर दिया। उन्होंने ‘डिक्सन प्लान’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई नई सोच नहीं है, बल्कि दशकों पुरानी साजिशों का हिस्सा रहा है, जिसमें चिनाब नदी के उस पार और इस पार के क्षेत्रों को अलग करने की बात की गई थी। इतिहास के उदाहरण देते हुए उन्होंने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री परमार का भी जिक्र किया, जिनके समय भाषाई और क्षेत्रीय आधार पर लोगों को बांटने की कोशिशें हुई थीं। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भी इसी तरह की मानसिकता समय-समय पर सामने आती रही है, लेकिन रियासत की एकता हमेशा कायम रही है।
श्रीनगर से पूर्व मेयर पर साधा निशाना
जम्मू को कश्मीर से अलग किए जाने संबंधी बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद अजीम मट्टू को नासमझ बताया। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कभी जम्मू, कश्मीर और लद्दाख को अलग करने की बात नहीं की। उन्होंने लद्दाख का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी लद्दाख को भी अलग नहीं करना चाहती थी और आज खुद लद्दाख के लोग कह रहे हैं कि उन्हें यूनियन टेरिटरी नहीं चाहिए और वे दोबारा रियासत के साथ जुड़ना चाहते हैं।
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