बंगाल चुनाव में समान नागरिक संहिता पर भाजपा का बड़ा दांव, बढ़ा वैचारिक टकराव
खबर सार :-
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले भाजपा ने यूसीसी लागू करने का वादा कर सियासी माहौल गरमा दिया है। अमित शाह ने इसे समानता का मुद्दा बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे ध्रुवीकरण की राजनीति कहा। इस मुद्दे से चुनाव में वैचारिक टकराव तेज हो गया है और वोट बैंक पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
खबर विस्तार : -
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का बड़ा वादा कर चुनावी मुकाबले को वैचारिक मोड़ दे दिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि वह सत्ता में आती है, तो छह माह के भीतर राज्य में यूसीसी लागू किया जाएगा।
एक समान व्यवस्था होगी लागू
कोलकाता में ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भाजपा “एक देश, एक कानून” की अवधारणा पर विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि राज्य में हर नागरिक के लिए समान कानून लागू किया जाएगा, चाहे उसका धर्म, जाति या समुदाय कोई भी हो। शाह ने कहा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान व्यवस्था लागू करना संवैधानिक समानता की दिशा में आवश्यक कदम है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता कोई नया विचार नहीं है, बल्कि यह संविधान सभा की सिफारिशों का हिस्सा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक तुष्टिकरण की राजनीति के कारण इसे लागू नहीं किया गया। भाजपा का मानना है कि यूसीसी लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय मिलेगा।
भाजपा ने अपने घोषणापत्र में यूसीसी के साथ-साथ घुसपैठ और पशु तस्करी जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी चुनावी अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा, पहचान और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित करना चाहती है।
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 30 प्रतिशत है और लगभग 110 से अधिक विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव माना जाता है। ऐसे में यूसीसी का मुद्दा चुनाव से ठीक पहले उठाना भाजपा की रणनीतिक चाल माना जा रहा है, जो बहुसंख्यक मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
ममता बनर्जी ने हमेशा किया यूसीसी का विरोध
वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के इस कदम को चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश बताया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले भी यूसीसी का विरोध करती रही हैं। उनका कहना है कि यह देश की बहुलतावादी और विविधतापूर्ण संरचना के खिलाफ है और इसे बहुसंख्यक एजेंडा थोपने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूसीसी का मुद्दा चुनाव में दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक ओर यह भाजपा को हिंदू मतदाताओं के बीच समर्थन मजबूत करने में मदद कर सकता है, वहीं दूसरी ओर इससे अल्पसंख्यक मतदाता तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में एकजुट हो सकते हैं।
हाल के महीनों में मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और उत्तर 24 परगना जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में तृणमूल कांग्रेस को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। यहां छोटे राजनीतिक दल खुद को अल्पसंख्यक समुदाय की स्वतंत्र आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, एआईएमआईएम और अन्य दलों से जुड़े कुछ विवादों के बाद इन प्रयासों को झटका भी लगा है।
इन सभी घटनाक्रमों के बीच समान नागरिक संहिता अब पश्चिम बंगाल चुनाव की केंद्रीय बहस बन चुकी है। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी को और तेज करेगा और चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
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