अभिषेक बनर्जी को विदेश जाकर इलाज कराने की नहीं मिली अनुमति, हाईकोर्ट ने कहा-'पहले मेडिकल बोर्ड से कराएं जांच'
खबर सार :-
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की विदेश में आंखों के इलाज की मांग फिलहाल स्वीकार नहीं की है। अदालत ने पहले एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड से स्वास्थ्य परीक्षण कराने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के आधार पर अगस्त में अगला फैसला होगा। वहीं, सांसद को अक्टूबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिली है, लेकिन जांच में सहयोग करना उनके लिए अनिवार्य रहेगा।
खबर विस्तार : -
Calcutta High Court: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को फिलहाल आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं मिली है। कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सोमवार को उनकी विदेश यात्रा संबंधी याचिका खारिज करते हुए कहा कि पहले कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विशेषज्ञ उनकी चिकित्सकीय जांच करेंगे। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मिलने के बाद ही अदालत इस मामले में आगे का निर्णय लेगी।
एक विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड का गठन
यह मामला उस समय सामने आया जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण देने के आरोप से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से विदेश में इलाज की अनुमति मांगी गई। उनके वकील ने अदालत को बताया कि सांसद पिछले करीब दस वर्षों से अमेरिका में अपनी आंखों का इलाज कराते रहे हैं और वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्हें वहीं इलाज जारी रखने की आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने सबसे पहले यह जानना चाहा कि क्या अभिषेक बनर्जी ने हाल के समय में किसी भारतीय नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लिया है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि राज्य में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं से इलाज संभव है तो विदेश यात्रा की तत्काल आवश्यकता को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के प्रमुख की निगरानी में एक विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा। यह बोर्ड सांसद की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत परीक्षण करेगा और अदालत को रिपोर्ट सौंपेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि विदेश में इलाज वास्तव में आवश्यक है या नहीं।
कोर्ट में राज्य सरकार ने विदेश यात्रा की अनुमति का किया था कड़ा विरोध
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने विदेश यात्रा की अनुमति का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण सहित कई महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं। यदि उन्हें विदेश जाने की अनुमति दी जाती है तो जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और कानूनी कार्रवाई में अनावश्यक जटिलताएं पैदा होने की आशंका रहेगी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि किसी भी आरोपी या जांच के दायरे में मौजूद व्यक्ति की विदेश यात्रा पर विचार करते समय अदालत को न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसे में चिकित्सकीय आवश्यकता का स्वतंत्र मूल्यांकन जरूरी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत बिना चिकित्सकीय विशेषज्ञों की राय के कोई अंतिम निर्णय नहीं लेगी। इसलिए पहले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और उसके बाद ही विदेश यात्रा की अनुमति पर विचार होगा। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में निर्धारित की गई है। हालांकि, अदालत ने अभिषेक बनर्जी को एक महत्वपूर्ण राहत भी दी। हाईकोर्ट ने उन्हें नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े मामले में पुलिस की कठोर कार्रवाई, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है, से अक्टूबर तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। यह राहत जांच पूरी होने या अदालत के अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।
अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप, सीआईडी कर रहा जांच
अभिषेक बनर्जी पर आरोप है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित एक चुनावी सभा में उन्होंने ऐसा बयान दिया था जिससे हिंसा भड़काने की आशंका उत्पन्न हुई। उन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित धमकीपूर्ण टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की जांच राज्य का आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) कर रहा है। हाईकोर्ट ने इस दौरान अभिषेक बनर्जी को जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया। अदालत ने सीआईडी को भी मामले की जांच बिना अनावश्यक देरी के जल्द पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि लंबित कानूनी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सके।
ये भी पढ़ें....अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत, टीएमसी कार्यालय ध्वस्तीकरण मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का यथास्थिति का आदेश
Calcutta High Court: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को फिलहाल आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं मिली है। कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सोमवार को उनकी विदेश यात्रा संबंधी याचिका खारिज करते हुए कहा कि पहले कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विशेषज्ञ उनकी चिकित्सकीय जांच करेंगे। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मिलने के बाद ही अदालत इस मामले में आगे का निर्णय लेगी।
एक विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड का गठन
यह मामला उस समय सामने आया जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण देने के आरोप से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से विदेश में इलाज की अनुमति मांगी गई। उनके वकील ने अदालत को बताया कि सांसद पिछले करीब दस वर्षों से अमेरिका में अपनी आंखों का इलाज कराते रहे हैं और वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्हें वहीं इलाज जारी रखने की आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने सबसे पहले यह जानना चाहा कि क्या अभिषेक बनर्जी ने हाल के समय में किसी भारतीय नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लिया है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि राज्य में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं से इलाज संभव है तो विदेश यात्रा की तत्काल आवश्यकता को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के प्रमुख की निगरानी में एक विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा। यह बोर्ड सांसद की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत परीक्षण करेगा और अदालत को रिपोर्ट सौंपेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि विदेश में इलाज वास्तव में आवश्यक है या नहीं।
कोर्ट में राज्य सरकार ने विदेश यात्रा की अनुमति का किया था कड़ा विरोध
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने विदेश यात्रा की अनुमति का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण सहित कई महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं। यदि उन्हें विदेश जाने की अनुमति दी जाती है तो जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और कानूनी कार्रवाई में अनावश्यक जटिलताएं पैदा होने की आशंका रहेगी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि किसी भी आरोपी या जांच के दायरे में मौजूद व्यक्ति की विदेश यात्रा पर विचार करते समय अदालत को न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसे में चिकित्सकीय आवश्यकता का स्वतंत्र मूल्यांकन जरूरी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत बिना चिकित्सकीय विशेषज्ञों की राय के कोई अंतिम निर्णय नहीं लेगी। इसलिए पहले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और उसके बाद ही विदेश यात्रा की अनुमति पर विचार होगा। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में निर्धारित की गई है। हालांकि, अदालत ने अभिषेक बनर्जी को एक महत्वपूर्ण राहत भी दी। हाईकोर्ट ने उन्हें नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े मामले में पुलिस की कठोर कार्रवाई, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है, से अक्टूबर तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। यह राहत जांच पूरी होने या अदालत के अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।
अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप, सीआईडी कर रहा जांच
अभिषेक बनर्जी पर आरोप है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित एक चुनावी सभा में उन्होंने ऐसा बयान दिया था जिससे हिंसा भड़काने की आशंका उत्पन्न हुई। उन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित धमकीपूर्ण टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की जांच राज्य का आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) कर रहा है। हाईकोर्ट ने इस दौरान अभिषेक बनर्जी को जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया। अदालत ने सीआईडी को भी मामले की जांच बिना अनावश्यक देरी के जल्द पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि लंबित कानूनी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सके।
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