जन औषधि केंद्रों पर अब सर्जिकल सामान की संख्या बढे़गी

खबर सार :-

जन औषधि केंद्रों को आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली 200 दवाओं का स्टॉक रखने के लिए अभी तक प्रोत्साहित किया जाता रहा है, अब इसमें इसी योजना के तहत 315 सर्जिकल सामान, चिकित्सा उपयोग की वस्तुएं और उपकरण की संख्या बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हंै। इसमें पहले से ही हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी और पेट से जुड़ी बीमारियों की दवाओं के साथ पोषक पूरक मिल रहे हैं।
जन औषधि केंद्रों पर अब सर्जिकल सामान की संख्या बढे़गी

खबर विस्तार : -

दिल्ली, जन औषधि केंद्रों को आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली 200 दवाओं का स्टॉक रखने के लिए अभी तक प्रोत्साहित किया जाता रहा है, अब इसमें इसी योजना के तहत 315 सर्जिकल सामान, चिकित्सा उपयोग की वस्तुएं और उपकरण की संख्या बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हंै। इसमें पहले से ही हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी और पेट से जुड़ी बीमारियों की दवाओं के साथ पोषक पूरक मिल रहे हैं। मिलने वाली दवाओं की संख्या 2,110 के करीब है, लेकिन यहां 200 दवाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। यह ज्यादा मांग वाली तथा ज्यादा बिकने वाली हैं। इन दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखनेे वाले जन औषधि केंद्र संचालकों को हर महीने कुछ राशि प्रोत्साहन में दी जाती है।

साधारण आय वाले परिवारों को आसानी से दवाएं मिल सकीं

लोकसभा में केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना की सफलता बताई। उनके द्वारा दी गई जानकारी में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में करीब 45,000 करोड़ रुपये की बचत देष के लोगों को हुई है। इससे साधारण आय वाले परिवारों को आसानी से दवाएं मिल सकी हैं। उनकी जेब से होने वाला खर्च काफी कम हुआ है। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि एक परियोजना है। इससे 12 साल में 45,000 करोड़ की बचत होना यह साबित करती है कि हम इसमें और आगे बढ सकते हैं।

जन औषधि केंद्रों का नेटवर्क  है बढा

संसद में मंत्री ने बताया कि देशभर में अब तक 20,149 जन औषधि केंद्र हैं। इनकी संख्या और बढ़ सकती है। 776 जिलों में इस योजना का विस्तार हो रहा है। राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं योजना में शामिल हैं। एजेंसी फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई), जन औषधि केंद्रों पर निगरानी रखती है। इन पर बिक्री प्रदर्शन के आधार पर लगातार उनका मूल्यांकन और सुधार की गुंजाइष तलाषती है। केंद्रीय मंत्री ने संसद को बताया कि योजना की समीक्षा और इसके बेहतर संचालन से पता चलता है कि जन औषधि केंद्रों का नेटवर्क बढा है।

अच्छी गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने में सुधार हो रहा

यह इस बात का सबूत है कि देशभर में सस्ती और अच्छी गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने में सुधार हो रहा है। योजना का यह भी फायदा सामने आया है कि दवाओं की कमी नहीं हो रही, साथ ही देशभर में जरूरी दवाएं आसानी से पहुंच रही हैं। इसके लिए लगातार निगरानी व जरूरी प्रयास चलते रहते हैं। फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया और भी कोषिष कर रहा है। यह जन औषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं की पहुंच बढाने के प्रयास कर रहा है। केंद्रीय संचार ब्यूरो, पत्र सूचना कार्यालय, मायगॉव और माय भारत जैसे संस्थानों के साथ मिलकर अभियान चलाता है।

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