CBFC से जन नायगन को मिली मंजूरी, दिलजीत दोसांझ की सतलुज अब भी विवादों में
खबर सार :-
तमिलनाडु सीएम थलापति विजय की लंबे समय से पेडिंग मूवी जन नायगन को सेंसर बोर्ड ने ग्रीन सिग्नल दे दिया है। वहीं बात करें दिलजीत की सतलुज की तो उस पर अभी रोक लगी हुई है।
खबर विस्तार : -
CBFC Certificate: थलापति विजय की फिल्म जन नायगन लंबे समय से पेंडिग में पड़ी थी, जिसे अब सेंसर बोर्ड का ग्रीन सिग्नल मिल गया है, लेकिन दूसरी ओर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज अब भी विवादों से घिरी है, चलिए जानते हैं की ऐसा किस कारण से हो रहा है। सेंसर बोर्ड ने जन नायगन को ग्रीन सिग्नल दे दिया, जबकि सतुलज पर अभी रोक लगी है।
जन नायगन को सेंसर बोर्ड की मंजूरी, सतलुज पर अभी भी रोक
अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की आखिरी फिल्म जन नायगन का लोगों को बेसब्री से इंतजार था। काफी समय से उनके फैंस इस फिल्म के रिलीज होने की राह देख रहे थे। हाल ही में विजय के फैंस को बड़ी खुशखबरी मिली है। सेंसर बोर्ड ने जन नायगन को ग्रीन सिग्नल दे दिया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज अभी भी विवादों से घिरी है। चलिए जानते हैं कि आखिर इसके पीछे का कारण क्या है। सेंसर बोर्ड किस आधार पर फिल्मों को सर्टिफिकेट देते हैं और इसमें किन-किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है। दरअसल, दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज, जिसे पहले पंजाब 95 के नाम से जाना जाता था, सेंसर बोर्ड ने पास नहीं किया था। बोर्ड ने इसमें 120 कट्स लगाने की बात की, जिसे फिल्म के मेकर्स ने साफ मना कर दिया।
जन नायगन को 7 साल बाद मिली मंजूरी
इसके बाद सतलुज के मेकर्स ने बिना सेंसर सर्टिफिकेट के इसे सीधे ओटीटी पर रिलीज कर दिया। जिसे लेकर विवाद काफी बढ़ गया। बात करें जन नायगन की तो इस फिल्म को करीब 7 महीने बाद बोर्ड से A सर्टिफिकेट मिला है। इस फिल्म में कुछ ऐसे सीन्स थे, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती थीं। CBFC से बिना सर्टिफिकेट लिए फिल्म को सार्वजनिक तौर पर दिखाना दंडनीय है। ऐसा करने पर सजा हो सकती है। इस समय CBFC के चेयरमैन प्रसून जोशी हैं। किसी भी फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले CBFC की पांच सदस्यों वाली कमेंटी फिल्म देखती है। इसके बाद फिल्म को मंजूरी देने के लिए 3 पक्ष का फैसला समान होना जरुरी है।
बिना अनुमति फिल्म रिलीज करना दंडनीय अपराध
अगर किसी फिल्म को कमेटी के द्वारा पास की अनुमति नहीं मिलती है तो फिल्ममेकर्स फिर से अपनी फिल्म को री-एग्जामिन करने की अर्जी डालते हैं। इसके लिए एक दूसरी कमेटी का गठन किया जाता है, जिसमें 11 सदस्य मौजूद होते हैं। अगर इस दौर में भी सेंसर की अनुमति नहीं मिलती है तो मेकर्स दिल्ली में द ट्रिब्यूनल को अप्रोच करते हैं। किसी भी फिल्म को पास करने के लिए उसमें यह देखा जाता है कि फिल्म आज के दौर से मिलती-जुलती है या नहीं। फिल्म में सीमित वाइलेंस स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन अगर बहुत ही ज्यादा डरावने सीन्स हैं तो सबसे पहले यह देखा जाता है कि दर्शकों पर इसका बुरा असर न पड़े। अगर कोई फिल्म बिना सेंसर से पास हुए रिलीज होती है तो उसमें दोषी पाए गए लोगों को तीन साल की सजा, फिल्म-स्क्रीनिंग से जुड़ी सभी चीजों को जब्त कर लिया जाता है और साथ ही 1 लाख रुपये का जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें: रुबीना दिलैक और हिना खान की पैनल चर्चा पर मचा बवाल, शिल्पा शिंदे, आकांक्षा, गौरव पर टिप्पणी के बाद हुई ट्रोल
अन्य प्रमुख खबरें
-
एक्टर राजपाल यादव फिर जाएंगे जेल, चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया बड़ा झटका
2026-07-10
-
सीनियर कलाकारों को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती, Lock Upp 2 पर सुधांशु पांडे की प्रतिक्रिया
2026-07-10
-
2026-07-10
-
2026-07-09
-
Akanksha Chamola Lock Upp: गौरव खन्ना संग तलाक की खबरों के बीच आकांक्षा चमोला ने खोले कई राज
2026-07-09
-
2026-07-08
-
2026-07-08
-
गोकुलधाम सोसायटी पर लगी किसकी नजर, बड़े स्तर पर हो रही तोड़फोड़, शो प्रोड्यूसर से बताया सच
2026-07-08
-
दादा के पहले पोस्टर पर मचा बवाल, सौरव गांगुली के लुक से राजकुमार राव की तुलना पर छिड़ी बहस
2026-07-08
-
2026-07-07
-
Sandhya Theatre Stampede Case: वर्चुअली पेश हुए अल्लू अर्जुन, पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट
2026-07-06
-
तीसरी शादी के बाद ट्रोल हुए आमिर खान, यूजर्स बोले-क्या यह भी 16 साल चलेगी
2026-07-06
-
2026-07-06
-
Alpha Box Office Collection Day 2: दूसरे दिन आलिया-शरवरी की फिल्म ‘अल्फा’ ने की तगड़ी कमाई
2026-07-05
-
2026-07-05