Ramayana Review: रणबीर की गंभीरता और यश का रौद्र रूप, रिलीज हुई 4,000 करोड़ की रामायण, जानें कैसी है फिल्म

खबर सार :-

Ramayana Review: रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश अभिनीत फिल्म 'रामायण' 5 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। आइए देखते हैं कि 4,000 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म कैसी है।
Ramayana Review: रणबीर की गंभीरता और यश का रौद्र रूप, जानें कैसी है फिल्म

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Ramayana Review: रणबीर कपूर, यश और  साई पल्लवी की बहुचर्चित फिल्म 'रामायण' पार्ट वन गुरुवार 5 नवंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। एक ओर जहां रणबीर कपूर राम के रूप में गंभीर और गरिमामय नजर आ रहे हैं, तो वहीं यश का रावण अवतार में रौद्र रूप दिखाया गया है। फिल्म अयोध्या की भव्यता और लंका की समृद्धि को दिखाती है, और साथ ही उस युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार करती है जिसका हर दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहा है। 

नमित मल्होत्रा की फिल्म रामायण के दो पार्ट पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। ऐसे में ऑडियंस बेचैन जरूर होगी कि फिल्म में ऐसा क्या नजर आने वाला है जिसकी वजह से इतने करोड़ों खर्च किए गए हैं। हालांकि रिलीज से पहले ही इस फिल्म को वैश्विक स्तर पर काफी सराहना मिली है। हाल ही में हुई एक विशेष स्क्रीनिंग में शामिल हुए बॉलीवुड सितारों ने भी इसकी सकारात्मक समीक्षा की है। लेकिन असल में 'रामायण' फिल्म कैसी है और कलाकारों का अभिनय कैसा है? इसे रिव्यू द्वारा हम आपको विस्तार से बताएंगे। 

फिल्म 'रामायण' की कहानी

नितेश तिवारी की रामायण की दिलचस्प बात यह है कि फिल्म की शुरुआत राम से नहीं, बल्कि रावण से होती है। कहानी सबसे पहले हमें लंकापति की दुनिया में ले जाती है। यहां रावण सिर्फ एक शक्तिशाली राजा नहीं, बल्कि अपार ज्ञान, तपस्या और अहंकार का ऐसा संगम है, जिसकी महत्वाकांक्षा की कोई सीमा नहीं।  'रामायण' की शुरुआत देवताओं और असुरों के बीच हुए युद्ध से होती है। भगवान विष्णु की कृपा से इंद्र विजयी होते हैं। इसके बाद, असुरों को पाताल लोक में अत्यंत कठिन परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। जिसके बाद रावण (यश) कठोर तपस्या करके भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करता है और उनसे वरदान प्राप्त करता है। इसके बाद, उसकी महत्वाकांक्षा और बढ़ती जाती है। वह इंद्र को पराजित करता है और अपने सौतेले भाई कुबेर से लंका का नियंत्रण छीन लेता है। यह फिल्म रावण के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती है, जो उसके सत्ता में आने के साथ सामने आते हैं।

इसके बाद कहानी अयोध्या पहुंचती है। राजा दशरथ के यहां भगवान विष्णु के अवतार, प्रमु श्री राम (रणबीर कपूर) का जन्म होता है। उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं को दिखाया गया है, जिनमें उनका बचपन, ऋषि विश्वामित्र के साथ उनकी यात्रा, मिथिला में सीता (साई पल्लवी) के स्वयंवर के दौरान भगवान शिव का धनुष तोड़ना और उसके बाद उनका विवाह शामिल है। सब कुछ ठीक चल रहा होता है, लेकिन राजमहल की राजनीति कहानी की दिशा बदल देती है। कैकेयी (लारा दत्ता) अपने दो वरदान मांगती हैं, जिसके परिणामस्वरूप राम को चौदह वर्षों के लिए वनवास में भेज दिया जाता है। 

सीता और लक्ष्मण (रवि दुबे) भी राम के साथ वन की ओर निकल पड़ते हैं। पहले भाग में रावण के उदय, राम के वनवास और सीता हरण तक की कथा शामिल है। इसके बाद की प्रमुख घटनाओं जैसे हनुमान की लंका यात्रा, अशोक वाटिका के दृश्य, राम सेतु (लंका तक का पुल) का निर्माण और लंका का युद्ध के लिए दूसरे भाग की प्रतीक्षा करनी होगी। 'रामायण' की कहानी जटायु के माध्यम से सुनाई गई है, जिसे अनुपम खेर ने अपनी आवाज दी है।

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एक्टिंग: रणबीर की गंभीरता और यश का रौद्र रूप

नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' में रावण की एंट्री दमदार है। इस रोल में यश एकदम सटीक हैं। यश (रावण) की बात करें तो उनका अंदाज अलग ही है। रौबदार व्यक्तित्व, दमदार आवाज, आंखों में अहंकार और पर्दे पर उनकी मौजूदगी रावण के किरदार को प्रभावशाली बनाती है। हालांकि भगवान राम का किरदार निभाना किसी भी अभिनेता के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। रणबीर के इस भूमिका में संयम और गंभीरता लेकर आते हैं। उनके चेहरे पर शालीनता और व्यवहार में मर्यादा दिखाई देती है। उनके चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान बनी रहती है। 

रवि दुबे (लक्ष्मण) के अभिनय में भाई के प्रति समर्पण और रक्षक का भाव दिखाई देता है। वहीं सीता के रोल में साई पल्लवी एकदम सही चुनाव हैं; वे हर पल की जरूरत के हिसाब से अपने हाव-भाव बखूबी बदल लेती हैं। इसके अलावा अरुण गोविल (दशरथ), लारा दत्ता (कैकेयी), शीबा चड्ढा (मंथरा), और रकुल प्रीत सिंह (शूर्पणखा) भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में दिखाई देते हैं। वहीं सनी देओल की हनुमान के रूप में झलक अगले भाग को लेकर उत्सुकता बढ़ाती है।

फिल्म का निर्देशन

रामायण के संवाद रणबीर पर कुछ खास जंचते नहीं हैं। राम के सौम्य और शांत स्वभाव को दिखाने की कोशिश में वे कई बार चूक जाते हैं, कभी-कभी तो उनके हाव-भाव कोई... मिल गया फिल्म में ऋतिक रोशन के हाव-भाव जैसे लगने लगते हैं। कहानी का पहला हिस्सा किरदारों को स्थापित करने पर केंद्रित है, जबकि दूसरा हिस्सा रावण और विद्युतजिह्वा वाले प्रसंग से शुरू होता है। 

'दंगल' और 'छिछोरे' जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले नितेश तिवारी के लिए, 'रामायण' एक बिल्कुल अलग तरह की चुनौती पेश करती है। यह कहानी करोड़ों लोगों की आस्था से गहराई से जुड़ी हुई है, और दर्शकों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं। 3 घंटे 15 मिनट की लंबाई के बावजूद कुछ हिस्सों में कहानी की रफ्तार धीमी पड़ती है। फिल्म का अंत भी किसी पारंपरिक विजयी क्लाइमैक्स की तरह नहीं, बल्कि आगे की बड़ी लड़ाई की शुरुआत के संकेत के साथ होता है।

कहां रह गई कमी

'रामायण पार्ट वन' भारतीय सिनेमा में एक बहुत ही महत्वाकांक्षी प्रयास है। रणबीर कपूर ने राम के किरदार में गंभीरता और गरिमा का भाव लाया है, जबकि यश ने रावण के रूप में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबियां इसके शानदार VFX, भव्य प्रोडक्शन डिजाइन और पौराणिक दुनिया का विशाल पैमाना हैं। हालांकि, फिल्म के कुछ हिस्सों की धीमी गति, ऐसे संवाद जो वैसा असर नहीं छोड़ पाते जैसा होना चाहिए था। राक्षसों के लिए इस्तेमाल किए गए VFX में भी सुधार की गुंजाइश है।

इसके अलावा फिल्म में राम-भरत मिलाप सीन आपको निराश करेगा। किसी भी अच्छी फिल्म के लिए उसके सपोर्टिंग किरदार जान होते हैं। रामायण में हीरो और विलेन पर फोकस किया है। अगर भरत, शत्रुघ्न पर थोड़ा और ध्यान दिया जाता तो शायद ये फिल्म थोड़ी और बेहतर लग सकती। साथ ही फिल्म के कुछ अच्छे सीन को कुछ सेकंड में खत्म कर देना एक बड़ी कमी है। फिर भी, इस फिल्म में ऐसा बहुत कुछ है जिसे बड़े पर्दे पर देखना चाहिए। खासकर यश का रावण और फिल्म की विशाल दृश्य दुनिया। आस्था से जोड़े बिना अगर इसे फिल्म के लिहाज से देखा जाए तो ऑडियंस खुश होगी। फिल्म को ग्रैंड बनाने की एक अच्छी कोशिश की गई है। हमारी तरफ से इस फिल्म को 3.5 स्टार्स।

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