पहली बार महात्मा गांधी के किरदार में दिखेंगे मनोज बाजपेयी, सुधीर मिश्रा ला रहे हैं आजादी का अनसुना पन्ना

खबर सार :-

मनोज बाजपेयी पहली बार महात्मा गांधी का किरदार निभाएंगे। अनुभव सिन्हा और सुधीर मिश्रा की यह फ़िल्म देश की आजादी की लड़ाई के दौरान गांधी के जीवन के एक ऐसे 21-दिन के अध्याय को दिखाएगी
पहली बार गांधी जी के किरदार में नजर आएंगे मनोज बाजपेयी

खबर विस्तार : -

Manoj Bajpayee: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) जल्द ही डायरेक्टर सुधीर मिश्रा की आने वाली फिल्म में महात्मा गांधी का रोल निभाते नज़र आएंगे। यह फिल्म भारत की आज़ादी की लड़ाई के एक अहम लेकिन कम जाने-पहचाने हिस्से को बड़े पर्दे पर दिखाएगी। मनोज बाजपेयी के इस नए अवतार को लेकर दर्शकों और सिनेमा प्रेमियों में काफी उत्साह है।

सौरभ शुक्ला भी निभाएंगे अहम भूमिका

इस फिल्म को अनुभव सिन्हा की प्रोडक्शन कंपनी, बनारस मीडियावर्क्स प्रोड्यूस कर रही है, और NH स्टूडियोज़ के नरेंद्र हीरावत इसके प्रोड्यूसर और प्रेजेंटर हैं। जाने-माने एक्टर सौरभ शुक्ला भी फिल्म में एक अहम भूमिका निभाएंगे। डायरेक्टर सुधीर मिश्रा राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, और यह प्रोजेक्ट उनके सबसे बड़े और अहम प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है।

 सुधीर मिश्रा ला रहे हैं आजादी का अनसुना पन्ना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फिल्म 1947 के 21 दिनों के एक खास दौर पर आधारित है, जब देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था, लेकिन महात्मा गांधी सत्ता के गलियारों और उसके बाद होने वाले जश्न से दूर रहे। यह फिल्म गांधी के जीवन के इस दौर को एक नए नज़रिए से दिखाएगी और बताएगी कि कैसे उन्होंने दिल्ली की राजनीतिक चालों से ज़्यादा अपने सिद्धांतों और आदर्शों को अहमियत दी।

मनोज बाजपेयी का 'भीकू म्हात्रे' से 'बापू' तक का सफर

सुधीर मिश्रा का कहना है कि यह कहानी गांधी के व्यक्तित्व और उनके ऐतिहासिक फैसलों की गहराई को समझने की एक कोशिश है। वहीं, मनोज बाजपेयी सत्या, शूल, पिंजर, अलीगढ़ और  द फैमिली मैन जैसे बेहतरीन प्रोजेक्ट्स के ज़रिए अपनी एक्टिंग का लोहा पहले ही मनवा चुके हैं। अब, मशहूर 'भीकू म्हात्रे' से 'बापू' तक का उनका सफर दर्शकों के लिए एक नया और यादगार अनुभव साबित होगा।

सुधीर मिश्रा जीत चुकें हैं कई अवॉर्ड 

इंडस्ट्री के बेहतरीन और सबसे सम्मानित डायरेक्टर्स में से एक, सुधीर मिश्रा इस प्रोजेक्ट में तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का अनुभव लेकर आए हैं। उन्होंने ये वो मंजिल तो नहीं के लिए 'बेस्ट डेब्यू फ़िल्म ऑफ़ ए डायरेक्टर', धारावी के लिए 'बेस्ट फीचर फ़िल्म इन हिंदी' और मैं जिंदा हूं के लिए 'बेस्ट फ़िल्म ऑन अदर सोशल इश्यूज' का नेशनल अवॉर्ड जीता है। यह फ़िल्म लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर उनकी वापसी का भी प्रतीक है। अब, अपनी अनोखी क्रिएटिव सोच को मिलाकर, दोनों फ़िल्ममेकर्स दर्शकों के सामने भारत की आज़ादी के दौर की सच्ची घटनाओं पर आधारित एक कहानी पेश करने के लिए तैयार हैं।

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