मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं, मेरे सीनियर्स ने मेरा हाथ थामा :  दिव्या दत्ता

खबर सार :-

फिल्म अदाकारा दिव्या दत्ता अपने सफल करियर का श्रेय सीनियर्स को देती हैं। वह कहती हैं कि उनके सीनियर्स ने उनकी मदद की, इसलिए भाग्यशाली हैं। अभिनय की बारीकियां सीखने में सीनियर्स ने दिव्या की मदद की।
अभिनय की बारीकियां सीखने में सीनियर्स ने की मदद: दिव्या दत्ता

खबर विस्तार : -

मंबईः फिल्म अदाकारा दिव्या दत्ता इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में हैं। वह अपने करियर के बारे में अलग-अलग तरीके की कई बातें बता रही हैं। दिव्या के सफल करियर में ज्यादा सक्रिय रोल सीनियर्स का रहा है। उनकी सफलता की कहानी वह खुद अपनी जुबानी कहती हैं। मुंबई में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपनी जिंदगी की रफ्तार पर और तकनीकी पर कुछ खास बातें बताईं। उनके फिल्मी करियर के संबंध में कई उतार चढ़ाव का जिक्र हुआ।

अभिनय की तकनीकी बारीकियां सीखने में उनके सीनियर्स ने हमेशा मदद की थी। इसलिए वह किस्मत वाली हैं। उन्होंने बताया की हर काम कठिन होता है और अच्छे तरीके से कर लिया जाए तो वह सफल होता है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म लास्ट मैन इन टावर को मिल रही सफलता पर उन्होंने यह बात कही। अभिनय की तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से बताया कि उनके साथ के सफल एक्टर्स में मनोज बाजपेई का योगदान रहा। बातचीत में दिव्या ने अपने को एक्टर मनोज बाजपेई और निर्देशक बेन रेखी के साथ मुंबई में मौजूद रही। उन्होंने कुछ बारीकियां बताईं जो सफलता के रहस्य को छूकर आगे बढ़ जाती हैं।

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मुझे भरोसा दिलाया कि तुम अच्छा कर रही हो

वह कहती हैं कि अगर मुझे अपनी बुनियादी चीज पता है, मैं अपना डायलॉग ठीक से बोल लेती हूं और  अभिनय पर विश्वास है। जो करते समय कैमरे में फिट बैठ जाए तो मेरे लिए यह सब काफी अच्छा है। वह आगे कहती हैं कि इतना तो हर किसी में यकीन होता ही है। कॉन्फिडेंस अगर है तो सफलता भी मिलती है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब चीजों की जानकारी नहीं थी। अभिनेत्री ने कहा कि मुझे लग रहा था कि मैंने बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन पर जब स्क्रीन पर वह आता तो सही नहीं दिख रहा था।

उस समय मैं निराश होने लगी और तब सीनियर्स ने मेरा हाथ थामा। मुझे भरोसा दिलाया कि तुम अच्छा कर रही हो, उन्होंने मेरे अंदर के भय को दूर किया और कहा अच्छा कर रही हो, लेकिन स्क्रीन पर अच्छा नहीं आ रहा है। इस मामले में अपने आप को अभिनेत्री दिव्या दत्ता खुशनसीब मानती हैं। कहती हैं कि उनके सहयोग से मैं आगे बढ़ती गई। उन्होंने कहा कि समय के साथ यह सब चीज़ें सीखने को मिलती हैं। वह कहती हैं कि अपनी लाइन पहले अच्छे से तैयार कर लो और उससे तकनीकी कमियों को मिटा दो। वहीं से आपका रास्ता खुल जाएगा। उसके बाद कुछ पलों में सफलता की कहानी बनाने लगोगी। उस पाल का जादू अपने आप होने दो।

हैरान कर देने वाली परिस्थितियां आती रहती

उन्होंने कहा कि मैं अपने को एक्टर की आंखों में देख रही हूं। शायद हर एक अलग होगा। दिव्या ने कहा कि वह ऐसे दौर से भी गुजरी हैं, कभी उन्हें लगा कि वह अच्छा काम कर रही हैं। आगे बढ़ रही हैं। कभी ऐसा लगा कि खराब काम करने की वजह से पीछे आ रही हैं। यह हैरान कर देने वाली परिस्थितियां आती रहती हैं। इसलिए स्वाभाविक रूप से इनको हटा देना चाहिए।

यही मेरे साथी ने मुझे सिखाया। उन्होंने कहा कि फिल्म लास्ट मैन इन टावर अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। फिल्म की कहानी तेजी से बदलती हुई मुंबई की पृष्ठभूमि पर आधारित है। आगे वह कहती हैं कि मनोज बाजपेई मेरे साथ काम कर रहे हैं। वह एक रिटायर्ड स्कूल टीचर हैं। ऐसे ही कई प्रसंग उन्होंने फिल्म से संबंधित सुनाए। 

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