मधुबाला के नाम से आज भी होती है अरदास, जानिए गुरुद्वारे से जुड़ा यह अनसुना किस्सा

खबर सार :-

हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला के कई ऐसे अनसुने किस्से हैं, जो आज भी लोगों के बीच मशहूर हैं। ऐसा कहा जाता है कि मुंबई के एक गुरुद्वारे में आज  भी उनके नाम से प्रार्थना की जाती है।
मधुबाला के नाम से आज भी क्यों होती है अरदास? जानिए वजह

खबर विस्तार : -

Madhubala: बॉलीवुड इंडस्ट्री की बेहद खूबसूरत और प्रसिद्ध अभिनेत्री मधुबाला आज भी लोगों के दिलों पर राज करती हैं। उनका असली नाम मुमताज जहां बेगम देहलवी था। एक्ट्रेस देविका रानी ने उनका नाम बदलकर मधुबाला रखा था। उन्हें  "वीनस ऑफ इंडियन सिनेमा" (सौंदर्य की देवी) और "द ब्यूटी विद ट्रेजडी" भी कहा जाता था। साल 1949 में आई फिल्म महल ने उन्हें रातोंरात हिंदी सिनेमा का सबसे चमकता सितारा बना दिया। अपने दो दशक के लंबे करियर में उन्होंने 70 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनके नाम की चर्चा आज भी लोगों के जुबान पर रहती है, लेकिन उनसे जुड़ी एक और खास बात है , जो शायद ही लोगों को पता है। दरअसल, मुंबई के एक गुरुद्वारे में आज भी उनके नाम से अरदास की जाती है। 

एक्ट्रेस का निजी जीवन में आई काफी मुश्किलें

सिनेमा जगत की बेहद हसीन अभिनेत्री मधुबाला ने इंडस्ट्री को काफी बेहतरीन और सुपरहिट फिल्में दी हैं। उनकी एक्टिंग और खूबसूरती का जलवा आज भी लोगों के दिलों पर राज करता है। ऐसा माना जाता है कि उनकी आइकॉनिक फिल्मों को टक्कर दे पाना काफी मुश्किल है। एक्ट्रेस के निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने पर्दे पर वो काफी कम समय में छा गईं। सिनेमा की दुनिया में सफलता की रोशनी ने उनकी जिंदगी चमका दी, लेकिन असल लाइफ में वो काफी मुश्किलों से गुजरी हैं। बता दें कि उनकी खूबसूरती को देखकर दर्शक उनकी बहुत तारीफ करते थे, लेकिन उनकी लव लाइफ और शादीशुदा जिंदगीं बहुत खराब रही। पिता का कड़ा पहरा और दखल, दिलीप कुमार की सख्त शर्त, अदालत का विवाद, और जानलेवा गंभीर बीमारी दिल में छेद ने एक्ट्रेस को तोड़कर रख दिया। उनका आखिरी वक्त काफी दर्द में गुजरा। उनसे जुड़े कई अनकहे किस्से आज भी बी-टाउन में फेमस हैं। 

फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ खुलासा

मधुबाला का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था, वो गुरुनानक देव को बहुत मानती थीं। उन्होंने अपने आखिरी वक्त में जपुजी साहिब की किताब अपने पास रखी थी। कहा जाता है कि वो फारसी भाषा में लिखे जपुजी साहिब का पाठ हर रोज करती थीं और गुरुपर्व पर मुंबई के अंधेरी में दर्शन के लिए जाती थीं। इस बात का खुलासा तब हुआ, जब फिल्म के शूटिंग के दौरान मिले खाली वक्त में वो किताब का पाठ कर रही थीं और अचानक उन्हें शूट के लिए बुलाया गया, तब उन्होंने एस महेंद्र को किताब देकर शॉट के लिए चली गईं। शूट से वापस आने के बाद महेंद्र ने उनसे इस  बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें ऐसा लगता है कि वो अंदर से पूरी तरह टूट चुकी हैं तो, वो इस किताब को पढ़ती हैं, जिसके बाद उन्हें काफी शांति का अनुभव होता है। वो जपुजी साहिब किताब को हर रोज पढ़ती हैं। उनके किसी पहचान वाले ने उन्हें ये किताब दिलाई थी।

हर साल दर्शन के लिए जाती थीं गुरुद्वारा

मधुबाला हर साल दर्शन के लिए गुरद्वारा जाती थीं, इस पर वहां के ग्रंथ बताते हैं कि मधुबाला ने अपनी मौते से 7 साल पहले अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा था कि वह गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव पर लंगर सेवा देना चाहती हैं और इसका पूरा खर्चा का चेक वो गुरुद्वारा कमेटी को दे देती थीं। उन्होंने सात सालों तक इस सेवा को जारी रखा और उनकी मौत के बाद उनके पिता ने करीब छह सालों तक इसे जारी रखा। इसके बाद उनके पिता और गुरुद्वारा कमेटी और वहां के श्रद्धालुओं ने निर्णय लिया कि मधुबाला भले ही उनके बीच उपस्थित नहीं हैं, लेकिन गुरुनानक देव के प्रति उनकी श्रद्धा को देखते हुए अरदास लगाई जाएगी। हर साल गुरुनानक देव जी के जन्मोत्सव पर उनके नाम की प्रार्थना की जाती है।

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