विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका

Dharmesh Yadav Dharmesh Yadav

विकसित भारत 2047 के निर्माण में युवाओं की भूमिका, शिक्षा, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और ग्रामीण प्रतिभाओं के विकास पर विशेष चर्चा। जानिए शशांक मणि त्रिपाठी की युवा-केंद्रित पहलों की भूमिका।
विकसित भारत 2047: युवा शक्ति की भूमिका

"विकसित भारत 2047" भारत सरकार की एक दूरदर्शी राष्ट्रीय अवधारणा है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक भारत को "एक विकसित, समावेशी,टिकाऊ तथा आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।" इस दृष्टि के अंतर्गत तीव्र आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार, गुणवत्तापूर्ण एवं सम्मानजनक रोजगार के अवसर, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं, सुशासन, उन्नत डिजिटल और अवसंरचना का समग्र विकास के विभिन्न आयामों में गुणात्मक एवं मात्रात्मक प्रगति सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

इन पहलों का प्रमुख उद्देश्य भारत को "उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था" के रूप में विकसित करना है। वर्तमान में भारत वैश्विक स्तर की सबसे तीव्र गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसी गति को बनाए रखते हुए प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि एवं गरीबी उन्मूलन की दिशा में तीव्र और प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।" विकसित भारत, 2047" के अंतर्गत शिक्षा एवं कौशल विकास ,स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार ,महिलाओं एवं किसानों के सशक्तिकरण एवं उत्थान पर विशेष बल दिया गया है। आधारभूत ढाॅंचे , उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक अवरसंरचना, औद्योगीकरण ,तकनीकी नवाचार एवं हरित विकास को गति देकर विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना है।   

युवा शक्ति से विकसित भारत का संकल्प

भारत वैश्विक स्तर का सबसे अधिक युवा आबादी वाले देशों में से एक है। यहां 15 से 29 वर्ष आयु- वर्ग के ऊर्जावान , कार्यशील और राष्ट्रहित के प्रति युवा रहते हैं। ये युवा देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समाज के विकास ,राष्ट्र- निर्माण एवं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सशक्त बनाने के लिए युवाओं का नेतृत्व और उनकी सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। युवाओं में नवाचार, परिवर्तन और नई सोच की अपार क्षमता होती है, यही कारण है कि वह सामाजिक समस्याओं के समाधान के वाहक, सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक तथा समाज के लिए प्रेरणादायक और प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। भारत की विशाल युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी मानव शक्ति है। यदि इस शक्ति का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो देश की चुनौतियों का प्रभावी समाधान कर "भारत को एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र " बनाने में महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

युवाओं के भीतर उत्साह,कार्य करने का जुनून और चुनौतियों का सामना करने का अदम्य साहस और अपार ऊर्जा होती है, उनमें कठिन परिश्रम करने की अपार क्षमता ,अपने सपनों को साकार करने का दृढ़ मनोबल होता है। युवाओं की व्यक्तिगत सफलता न केवल उनके जीवन को नई दिशा देती है, बल्कि उनकी उपलब्धियां राष्ट्र की प्रगति और सफलता में भी महत्वपूर्ण योगदान करती हैं। भारत ने वर्ष 2047 तक देश को "विकसित राष्ट्र" बनाने का संकल्प लिया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में भारत विश्व की तेजी से उभरते अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और देश में आधारभूत संरचना, प्रौद्योगिकी, शिक्षा ,नवाचार तथा रोजगार के क्षेत्र में विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

शिक्षा और कौशल विकास बने बदलाव के आधार

विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक उपलब्धियों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए ऐसे जागरूक नागरिकों की आवश्यकता है जो संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को अपने व्यवहार में उतारें। आज के युवाओं को अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग होना होगा। सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सम्मान, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास जैसे मूल्यों का पालन विकसित भारत की आधारशिला को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।

विकसित भारत के निर्माण के लिए आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान ,कौशल, विकास ,नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व देना होगा। इस दिशा में देश की युवा शक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। युवाओं की ऊर्जा ,प्रतिभा ,ज्ञान और रचनात्मक क्षमता का प्रभावी उपयोग भारत को विकास के "नए आयाम "तक ले जा सकता है। भारत की लगभग आधी आबादी युवा है इसीलिए युवाओं को राष्ट्र- निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। युवा अपनी क्षमता और प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र हित में करें तो वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त किया जा सकता है। वास्तव में ,"युवा शक्ति ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत और उसके उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।"

ग्रामीण युवाओं को अवसर देना जरूरी 

भारत ने युवाओं के लिए शोध ,नवाचार, शिक्षा ,सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी ) तथा अन्य व्यावसायिक सेवाओं के क्षेत्र में "अनगिनत अवसरों के द्वार खोले हैं " आज भारत युवाओं के लिए" आकांक्षाओं को आकार देने और उन्हें साकार करने की स्वतंत्रता का गंतव्य" बनकर उभरा है। राष्ट्र की समग्र विकास यात्रा में युवाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए पूरा देश उन पर दृढ़ विश्वास और बड़ी उम्मीद के साथ जुड़ा है। इस महत्वाकांक्षी भरोसे का प्रमुख आधार युवाओं में विकसित हो रहा कौशल, नवाचार ,सृजनात्मक और उद्यमशीलता है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों और तीव्र तकनीकी परिवर्तन के दौर में भारत के युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने का "यह सर्वाधिक उपयुक्त एवं प्रासंगिक समय है।" युवा शक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल, अनुसंधान, नवाचार और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया जाए तो यही ऊर्जा भारत को "एक विकसित ,आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।" 

भारत के उज्ज्वल भविष्य, राष्ट्र- निर्माण और विकसित भारत की नवचेतना को साकार करने में युवाओं की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय चेतना के प्रसार के साथ-साथ शैक्षिक विकास और सामाजिक परिवर्तन के लिए युवाओं का सशक्तिकरण आवश्यक है। नवाचार ,गुणवत्तापूर्ण अध्यापन और डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से "युवा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।"

देश में 15 से 29 वर्ष आयु -वर्ग के लगभग 37.1 करोड़ युवा हैं,जो भारत के कुल जनसंख्या का लगभग 27% है। इतनी बड़ी युवा आबादी देश के लिए जनसांख्यिकी अवसर के साथ-साथ राष्ट्र के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा है। युवाओं की ऊर्जा रचनात्मक, तकनीकी दक्षता और नवाचार की क्षमता का सकारात्मक उपयोग "भारत को ज्ञान आधारित, आत्मनिर्भर और विकसित -राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।"

स्थानीय संसाधनों से रोजगार और उद्यमिता

शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी से बेहतर जानकारी, प्रभावी क्रियान्वयन, उपयोगिता एवं प्रासंगिकता सुनिश्चित हों रही है। इससे शैक्षिक संस्थानों के प्रति युवाओं का विश्वास भी मजबूत होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ,2020 में उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी, बहुविषयक कौशल आधारित और रोजगार उन्मुख बनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इससे विश्वविद्यालयों में शिक्षा की प्रासंगिकता और विद्यार्थियों के सहभागिता को" नई दिशा एवं नए आयाम" मिला है। विश्वविद्यालय एवं अन्य शैक्षणिक संस्थान युवाओं को सिखाने, विचार व्यक्त करने, नवाचार करने और नेतृत्व विकसित करने के लिए सार्थक एवं सुरक्षित मंच प्रदान करते हैं। "ऐसे वातावरण में युवाओं में आत्मविश्वास, आत्मीयता, अपनापन,सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।"

वास्तव में, विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है ,बल्कि यह ज्ञान, कौशल, नवाचार ,सामाजिक चेतना और जिम्मेदार नागरिक का समेकित विकास का लक्ष्य है। इस व्यापक परिवर्तन के केंद्र में भारत की युवा शक्ति है, इसीलिए युवाओं को अवसर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, विकास और नवाचार के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में" एक आवश्यक कदम है।" 

नवाचार से वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक

इक्कीसवीं सदी ज्ञान और नवाचार की प्रतिस्पर्धा का युग है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, जैव-प्रौद्योगिकी तथा हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व स्थापित करने के लिए भारतीय युवाओं को केवल रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले उद्यमी और नवप्रवर्तक बनना होगा। यही परिवर्तन भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में अधिक प्रभावशाली स्थान दिला सकता है।

"स्काईस्ट मिशन" की सफलता देश के युवाओं की मजबूत क्षमता, प्रतिभा और आकांक्षा का परिणाम है। वर्तमान में देश के विकास में युवाओं का सामर्थ्य और उनकी उपयोगिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत विश्व के युवा देशों में से एक है, जहां यह उत्साह जनक है कि भारत की युवा शक्ति अपनी गुणवत्ता, क्षमता, प्रतिबद्धता और राष्ट्र- निर्माण में अपने भूमिका के प्रति सजग और जिम्मेदार है। "यही युवा शक्ति भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।"     

कुशीनगर के दुदही क्षेत्र में देवरिया सदर के लोकप्रिय, ऊर्जावान एवं दूरदर्शी सांसद एवं चिंतक शशांक मणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन में युवा वैज्ञानिकों के विचार -मंथन और "मॉडल रॉकेट लॉन्चिंग प्रतियोगिता " का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका एवं योगदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों और ग्रामीण परिवेश के युवाओं में वैज्ञानिक सोच, नवाचार ,रचनात्मक और सीखने की भावना को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे गांव के प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने और राष्ट्र- निर्माण में योगदान का अवसर मिलेगा। सांसद श्री शशांक मणि त्रिपाठी जी द्वारा यह "पहल" क्षेत्र के युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और आत्मविश्वास के उन्नयन के साथ-साथ उन्हें विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रेरित करता है। ग्रामीण क्षेत्र से प्रतिभाओं को आगे लाने वाली ऐसी "पहल" निश्चित रूप से "विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करेंगे।"  

विकसित भारत का सपना तभी सार्थक होगा, जब ग्रामीण भारत का युवा भी समान अवसरों, आधुनिक शिक्षा, डिजिटल संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण से जुड़ सके। भारत की वास्तविक शक्ति उसके गाँवों में निहित है। यदि ग्रामीण प्रतिभाओं को उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और तकनीकी संसाधन उपलब्ध हों, तो वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नवाचार विकसित कर आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के सशक्त वाहक बन सकते हैं। 

युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत

"विकसित भारत, 2047" के संकल्प को साकार करने में देवरिया सदर के सांसद द्वारा स्थानीय युवाओं को रोजगार, उद्यमिता और कौशल विकास के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर "एक जिला एक उत्पाद "(ओडीओपी), "विविधीकरण" और "संस्थागत सहयोग "के माध्यम से युवाओं को "नए अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।" सांसद जी के प्रोत्साहन ,निवेश एवं सहयोग से स्थानीय स्तर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को कौशल, विकास और स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हल्दी प्रसंस्करण ,मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन और बायोमास ऊर्जा के क्षेत्र में स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

"जागृति उद्यमिता केंद्र " युवाओं को उद्यम स्थापित करने में, आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान कर रहा है । वह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कपूर निर्माण, अगरबत्ती निर्माण एवं ऑनलाइन माध्यमों से जुड़े रोजगार के लिए युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कॉल सेंटर और छोटी विनिर्माण इकाइयों के माध्यम से भी स्थानीय स्तर पर युवाओं को सुअवसर दिया जा रहा है। कौशल विकास, उद्यमिता और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से " युवा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हुए विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।" 

 युवाओं के नेतृत्व की सफलता केवल उनकी बौद्धिक क्षमता से नहीं, बल्कि उनके नैतिक चरित्र से भी निर्धारित होती है। ईमानदारी, पारदर्शिता, अनुशासन, सेवा-भाव, उत्तरदायित्व तथा सामाजिक संवेदनशीलता जैसे गुण किसी भी विकसित राष्ट्र की स्थायी शक्ति होते हैं। जब युवा व्यक्तिगत सफलता को सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़ते हैं, तब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है। 

निष्कर्षतः

भारत के युवा अपने रचनात्मक कौशल, नवोन्मेषी सोच और अथक परिश्रम के माध्यम से विकसित भारत के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं । सामाजिक, राजनीतिक और गुणात्मक भागीदारी राष्ट्र की प्रगति को "नई दिशा दे रही है।" युवाओं की ऊर्जा ,प्रतिभा और नवाचार ही "विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने की प्रमुख आधारशिला है।"

वास्तव में, विकसित भारत का लक्ष्य किसी एक सरकार, संस्था अथवा व्यक्ति का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से साकार होने वाला राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प के केंद्र में भारत का युवा है, जिसकी ऊर्जा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार, उद्यमशीलता और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाले भारत की दिशा निर्धारित करेंगे। यदि युवा अपनी प्रतिभा को ज्ञान, चरित्र और राष्ट्रीय दायित्व के साथ जोड़ें, तो वर्ष 2047 का विकसित भारत केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि विश्व समुदाय के समक्ष भारत की नई पहचान और नेतृत्व का प्रतीक बनेगा।

 शशांक मणि त्रिपाठी,सांसद देवरिया सदर

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