हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत

Dharmesh Kumar Dharmesh Kumar

भारत की स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन ने सफल परीक्षण के साथ स्वच्छ रेल परिवहन में नया इतिहास रचा। जानिए इसकी विशेषताएं, लाभ और भविष्य की संभावनाएं।
हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत

भारत ने स्वच्छ रेल परिवहन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की पहल और स्वदेशी तकनीक के आधार पर विकसित हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण कर देश इसे संचालन योग्य बनाने वाला देश बन गया है। इस उपलब्धि के साथ भारत विश्व में हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण करने वाला पांचवा देश बन गया है।सरकार ने इसे स्वच्छ परिवहन और पर्यावरण संरक्षण के संवर्धन की दिशा में एक बड़ा एवं महत्वपूर्ण कदम बताया है।

टॉप पांच देशों की श्रेणी में आया भारत

हाइड्रोजन से चलने वाली यह रेलगाड़ी मेक इन इंडिया योजना की सफलता का ठोस प्रमाण है । स्वदेशी डिजाइन और तकनीक पर आधारित यह ट्रेन स्वच्छ व टिकाउ रेल परिचालन का प्रतिमान है, बल्कि वैश्विक स्तर के चुनिंदा देशों की कतार में भारत को भी शामिल करती है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह हाइड्रोजन चलित ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच यात्रा को मात्र 2 घंटे में सीमित कर देंगी,जिससे स्थानीय यात्राओं में उल्लेखनीय सुधार होगा । पर्यावरणीय दृष्टि से यह पहल पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाने तथा शून्य उत्सर्जन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। रेल विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी तकनीक पर आधारित परियोजना से घरेलू विनिर्माण को बल मिलेगा, बल्कि भविष्य की रेल प्रौद्योगिकी में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी। सरकार ने राजनीतिक निवेश और अनुसंधान को और प्रोत्साहित करने वाला कदम बताया है।

इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन से न सिर्फ यात्री सुविधा बेहतर होगी, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर भी मजबूत होंगे जो मेक इन इंडिया के मूल उद्देश्य के अनुरूप एक बहुआयामी सफलता  प्रतीत होती है।

भारत उन पांच देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों का सफल संचालन शुरू कर दिया है।यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है और कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी,बल्कि उन पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में भी रेलसेवा के प्रसार का मार्ग खोल सकती है, जहां विद्युत तार एवं खंभे लगाना कठिन है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन नेट जीरो लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक साबित होंगी ,बल्कि परिदृश्यगत और परिचालन सीमाओं को पारकर रेल परिवहन के लिए वरदान साबित हो सकती हैं।

भारत पहले से ही वैश्विक मंचों पर ग्लोबल साउथ देशों का सक्रिय समर्थन कर रहा है। अब हाइड्रोजन तकनीक अपना कर सिर्फ वादा पूरा कर रहा है; बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अपना नेतृत्व भी मजबूत कर रहा है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में बड़ा कदम

वैश्विक स्तर पर हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन कुछ ही देशों तक सीमित है और सामान्यत: 2 से 4 डिब्बे होते हैं। भारत की नई हाइड्रोजन ट्रेन 10 डिब्बों की है और इसमें लगभग 2600 यात्रियों को  एकसाथ सफर करने की क्षमता है, जिससे यह दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनों में शुमार हो जाती है। सरकार का कहना है कि यह परियोजना हरित परिवहन,स्वच्छ ऊर्जा और कम कार्बन उत्सर्जन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों के अनुसार ,इस पहल से पर्यावरण लाभ होंगे, वायु प्रदूषण में कमी आएगी, डीजल पर निर्भरता घटेगी और शून्य कार्बन लक्ष्य की प्राप्ति में मदद मिलेगी। इस योजना के सफल क्रियान्वयन से देश को सतत विकास के लक्ष्य को पाने में भी समर्थन मिलने की उम्मीद बताई जा रही है।

हाइड्रोजन ट्रेन स्वदेशी ,स्वच्छ और सुरक्षित तकनीक है । इसमें 3200 हॉर्स पावर का प्रोपल्शन सिस्टम और 110किलोमीटर/ घंटा की अधिकतम रफ़्तार है। ज्वलनशील हाइड्रोजन के लिए ट्रेन और रिफलिंग प्लांट में संवेदनशील लीकेज, धुआं और ताप डिटेक्टर लगाए गए हैं।

प्रत्येक व्यक्ति को सभी परिवेशों में शुद्ध ऑक्सीजन की परम आवश्यकता होती है । रेलगाड़ी में यात्रा को सुरक्षित एवं सुखद अनुभव बनाए रखने के लिए ट्रेन में हवा के सतत प्रवाह के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। संचालन के दौरान किसी भी गैस के रिसाव से सुरक्षा के लिए प्रभावी रोकथाम और निरोधक कदम भी लागू किए गए हैं ,ताकि रिसाव तुरंत रोका जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित किया जा सके।

भारत का हाइड्रोजन ट्रेनों के क्लब में शामिल होना वैश्विक मंचों पर ग्लोबल साउथ के देशों के मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तापन और जलवायु न्याय पर दबाव बढ़ा सकता है । इससे कम विकसित और विकास प्रक्रिया से वंचित रहने वाले देशों के लिए एक राहत पैकेज दिलवाने में सहयोग मिल सकती है । भारत की अगुवाई ने इन देशों के बीच राहत एवं आशा की किरण जगाई है। भारत ग्लोबल साउथ के देशों की समस्याओं को गंभीरता और सजगता से ले रहा है।

भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर निर्णायक कदम उठाने होंगे ,ताकि शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल किया जा सकें । इसी क्रम में हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें पर्यावरण प्रदूषण घटाने में सहायक साबित होंगी । वायु एवं अन्य प्रदूषकों से मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़े हैं और संक्रामक और गैर -संक्रामक रोगों में वृद्धि हुई है, जिससे परिवारों पर आर्थिक बोझ भी पड़ा है। भारत ने हाइड्रोजन ट्रेन के परीक्षण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक दूरगामी और प्रगतिशील पहल की है।


डॉ.सुधाकर कुमार मिश्रा 
प्राध्यापक एवं राजनीतिक विश्लेषक

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