पंच परिवर्तन और विकसित भारत का संकल्प
सन् 2047 तक भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है। विकसित राष्ट्र के लिए सभी आयामों का समुचित विकास आवश्यक है। राष्ट्र के सशक्त विकास के लिए आर्थिक मजबूती, गरीबी उन्मूलन की प्रभावी योजनाएं, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आत्मविश्वास तथा पर्यावरण के प्रति जवाबदेही एवं जागरूकता अनिवार्य है। “विकसित भारत@ 2047” की प्राप्ति के लिए पंच परिवर्तन की संकल्पना अत्यंत उपयोगी एवं प्रासंगिक है। यह अवधारणा सभ्यतागत मूल्यों को समकालीन विकासोन्मुखी आकांक्षाओं के साथ समन्वित करने का गंभीर प्रयास है। यह कार्ययोजना यह संकेत देती है कि विकसित राष्ट्र की परिकल्पना “भारत की सांस्कृतिक परंपराओं, मूल्यों और जीवन- दृष्टि को आत्मसात करते हुए ही पूरी की जा सकती हैं।” मौलिक संकल्पनाएं और नैतिक मूल्य ही वैश्विक चुनौतियों के समाधान में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
मोहन भागवत के सकारात्मक पहल में नागरिकों का विधि एवं संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति निष्ठा, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य के प्रति आत्मीय आभार ,पारिवारिक मूल्यों एवं आदर्शों का संरक्षण, पर्यावरण के प्रति नागरिक जागरूकता एवं नागरिक पहल, पारिवारिक मूल्यों में आदर्श का संरक्षण एवं सम्मान, परंपरागत पारिवारिक मूल्यों के प्रति संकल्पित श्रद्धा की भावना, पर्यावरण संवेदनशीलता, स्वच्छ पर्यावरण निर्माण में व्यक्तिगत एवं सामूहिक स्तर पर मानवीय दृष्टिकोण तथा आत्मनिर्भरता पर विशेष बल दिया गया है।
राजनीतिक स्वतंत्रता राष्ट्र के सभ्यतागत मूल्य एवं सभ्यतागत पुनरुत्थान को निश्चित नहीं कर सकती हैं।आर्थिक विकास विकसित राष्ट्र का एकमात्र घटक नहीं हो सकता। राष्ट्र की मजबूती के लिए सामाजिक समन्वय, नैतिक नागरिकता , सांस्कृतिक राष्ट्र बोध एक -दूसरे को मजबूत करते हैं । इस दृष्टि से पंच परिवर्तन समाज को इन परस्पर रूपांतरणों की दिशा में मार्गदर्शित करने का “अभिनव और सामाजिक प्रयास है।”
वर्ष 2014 के पश्चात शासकीय नेतृत्व एवं सार्वजनिक नीतियों में भी “पंच परिवर्तन की अवधारणा” परिलक्षित होती है। पंच परिवर्तन शताब्दी वर्ष के साथ संगठनात्मक अभियान और भारत को “ वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र “ बनाने की संकल्पना प्राप्त करने का साधन है।
संघ पंच परिवर्तन द्वारा समाज एवं व्यवस्था में परिवर्तन का कार्य कर रहा है। सामाजिक समरसता में जाति-पाति के भेदभाव से ऊपर उठकर “समाज की एकात्मकता” पर बोल दिया गया है। सशक्त हिंदू समाज के लिए जातिगत मानसिकता को तोड़ना आवश्यक है । परिवार- प्रबोधन भारतीय जीवन का मूलाधार है। पर्यावरण- संरक्षण के माध्यम से प्रकृति एवं मानव के संबंध स्थापित होकर सतत विकास में सहायक होता है। आत्म -परिष्कार एवं स्वाध्याय से प्रत्येक स्वयंसेवक के भीतर अनुशासन और साधना की भावना जाग्रत होती है। राष्ट्रीय -आत्मनिर्भरता एवं एकात्मकता से समाज ,राज्य एवं राष्ट्र के प्रति सेवा ,समर्पण एवं त्याग की भावना उत्पन्न होती है। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पंच परिवर्तन के प्रत्येक पहलू को अपनाना आवश्यक है। परिवार एवं समाज के विकास से ही “ विकसित भारत@ 2047 “ की अवधारणा साकार की जा सकती है।
विकसित भारत @2047 के लिए आत्मनिर्भर भारत, नागरिक कर्तव्य बोध, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास जैसे प्रत्यय राष्ट्रीय नीतिगत चर्चाओं के अंग होते जा रहे हैं। इन सभी प्रत्ययी विमर्शों का मौलिक संबंध “पंच परिवर्तन की अवधारणा से है।” सामाजिक परिदृश्य में भी संघ के स्वयंसेवक विभिन्न क्षेत्रों में नि: स्वार्थ भाव से सेवा करते हुए - सामाजिक सेवा, आपदा राहत ,शैक्षिक प्रसार, विद्यार्थियों में जागरूकता ,इतिहास संकलन योजना में कार्य और सांस्कृतिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहकर विकसित भारत@ 2047 की मजबूत नींव और आधार तैयार कर रहे हैं।
विगत वर्षों में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता में स्वदेशी हथियारों का बढ़ता महत्व देश को आत्मनिर्भर बनाने में अत्यंत सहायक रहा है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। यह पंच परिवर्तन की राष्ट्रीय सुरक्षा में उपादेयता है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहलू ने राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में सार्थक बदलाव लाए हैं। ईमानदारी, सच्चरित्रता एवं मजबूत इच्छाशक्ति के सहारे आत्मनिर्भरता की और उन्नत हो रही है। विकसित भारत@ 2047 का लक्ष्य आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की संकल्पना के माध्यम से ही साकार्थ हो सकता है।
विकसित भारत @2047 की संकल्पना को प्राप्त करने के लिए हम सभी को टीम भावना से काम करने की आवश्यकता है। हमें परिवार, समाज और संस्थानों में सामूहिक निर्णय लेने की देने चाहिए, सभी कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए और जीवन मूल्यों से समझौता किए बिना जनकल्याण की भावना से काम करना चाहिए। भारत केवल आर्थिक शक्ति ही नहीं ,बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति के रूप में भी संसार का नेतृत्व कर रहा हैं ।संघ विकसित भारत की संकल्पना के लिए आधुनिक परिवारों, आत्मीय संबंधों और बदलती सामाजिक संरचनाओं को लेकर लोकसंवाद एवं सकारात्मक संवाद कर रहा है।
शशांक मणि त्रिपाठी
सांसद , देवरिया सदर।
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