डिजिटल भारत: वैश्विक मंच पर नई पहचान

Dharmesh Kumar Dharmesh Kumar

भारत का डिजिटल परिवर्तन नागरिकों के लिए सेवाएं और सुविधाएं बेहतर बना रहा है। डिजिटल सेवाओं की आसान उपलब्धता ने आर्थिक विस्तार और रोजगार के अवसर  बढ़ाएं हैं । “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने सभी तक लोकतांत्रिक योजनाएं पहुंचाने पर जोर दिया है।
डिजिटल भारत: वैश्विक मंच पर नई पहचान

भारत के दूरदर्शी प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने “विकसित भारत 2047” का एक व्यापक और नागरिक केंद्रित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। यह योजना स्वतंत्रता की  100वीं वर्षगांठ तक भारत को पूरी तरह “विकसित राष्ट्र “ बनाने का संकल्प लेती है। 2047 तक भारत आर्थिक रूप से सशक्त ,सामाजिक रूप से  समरस,पर्यावरण के लिहाज से स्थिर और वैश्विक स्तर पर शक्तिशाली राष्ट्र होगा । भारत वैश्विक स्तर की समस्याओं के त्वरित निदान के लिए सक्षम हो रहा है ।

‘डिजिटल भारत’ अब  वैश्विक मंच पर मृदुल शक्ति एवं तकनीकी नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। यूपीआई भारतीय नवाचार का एक प्रमुख उत्पाद है जिसने “डिजिटल भुगतान में वैश्विक बदलाव ला दिया है।” यह वास्तविक समय में काम करने वाली सबसे तेज और सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली भुगतान प्रणाली बन गई है। वैश्विक ऑनलाइन भुगतानों का लगभग 50% हिस्सा भारत में यूपीआई के माध्यम से होता हैं।

यूपीआई में बना रिकॉर्ड

जुलाई 2026 तक यूपीआई के माध्यम से किए जाने वाले लेन-देन की मात्रा बढ़कर 20.64 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। यूपीआई प्रतिदिन 66 करोड़ से अधिक का भुगतान करता है, जो ‘वीजा’ के दैनिक भुगतान से भी अधिक है। भारत में होने वाले डिजिटल भुगतानों का लगभग 89% हिस्सा यूपीआई के जरिए होता है। “अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ ) यूपीआई को विश्व का सबसे तेज और उन्नत भुगतान व्यवस्था के रूप में मान्यता दी है।” यूपीआई अपनी तेज और उन्नत तकनीकी के कारण अब दुनिया के  सात देशों  में उपलब्ध है - सिंगापुर ,भूटान, नेपाल श्रीलंका, फ्रांस ,मॉरीशस और यूएई।

“भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।” कुछ आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने जापान और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए “ वैश्विक स्तर की चौथी अर्थव्यवस्था बन चुका है।” सरकारी पहलों ,आर्थिक सुधारो और मजबूत नीतियों के चलते भारत 2030 तक वैश्विक स्तर की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। यह प्रगति मौलिक रूप से तेज जीडीपी वृद्धि ,घरेलू बाजार का विस्तार, युवा एवं कार्यशील जनसंख्या, ढांचागत सुधार, डिजिटलीकरण और बिजली जैसी मौलिक बुनियादी  सेवाओं का सुधरना है।सरकार की नीतियों ने निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया है जिससे आर्थिक विकास को  और मजबूती मिली है।

डिजिटल भारत ने शासन के तरीके बदल दिए हैं। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) बेहतर हुई है और सरकारी योजनाओं व इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के कार्य में सुधार हुआ है। भारत वैश्विक स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनकर एक बड़ी आर्थिक शक्ति बन रहा है। डिजिटलीकरण ने कई ऐसी योजनाएं संभव कर दी है जो पहले मुश्किल लगती  थीं। “ई -गवर्नेंस (इलेक्ट्रॉनिक शासन) डिजिटल भारत की रीढ़ है।” सूचना एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से यह सरकारी सेवाओं को नागरिक तक पारदर्शी ,तेज और सरल तरीके से पहुंचाती है। ई -गवर्नेंस ने बिचौलिए की भूमिका कम कर दी है। इसका उद्देश्य “प्रशासनिक कामों को आसान बनाकर भ्रष्टाचार  घटाना और सुशासन बनाए रखना है।”

देवरिया सदर के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने “उद्यमिता और  कौशलविकास ” तथा “अमृत प्रयास “ जैसी पहलुओं के जरिए रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जनपद के बुनियादी ढांचे और विकास को तेज किया है। वह अपने तकनीकी कौशल से स्थानीय स्तर पर ‘ उद्यमिता’ को बढ़ावा दे रहे हैं। युवा  प्रतिभा को  रॉकेट  उड़ाने के क्षेत्र में निखारने के लिए उन्होंने  ‘दुदही क्षेत्र’  में रॉकेट प्रतियोगिता आयोजित की है, जिससे इन क्षेत्रों में पर्यटन ,नवाचार और  नवोन्मेष को बढ़ावा मिल सकें।      

योजनाओं का मिल रहा सीधा लाभ

जन -धन योजना ,आधार और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) ने करोड़ों भारतीयों की आर्थिक स्थिति बेहतर करने में बड़ी भूमिका निभाई है। ई- गवर्नेंस ने भ्रष्टाचार को काफी कम किया है। प्रधानमंत्री जन- धन योजना के तहत 58.15 करोड़ से अधिक नए बैंक खाता गरीबों का खोले गए हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत देशभर में 10.58 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को एलपीजी गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। आयुष्मान भारत योजना के जरिए 50 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिला है। यह सभी योजनाएं बताती हैं कि भारतीयों का विकास “सशक्तिकरण और समानता” जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है।

समावेशी डिजिटल सेवाओं के तहत भारत की सरकारी संरचना में बदलाव किए गए हैं। इन सेवाओं का मकसद समाज के वंचित समूहों को स्थायी रूप से सशक्त बनाना है ताकि वह सामाजिक सुरक्षा पा सकें और आत्मनिर्भर  बनें। ध्यान यह है कि कोई भी व्यक्ति विकास की प्रक्रिया से बाहर ना रहें और सभी को बुनियादी सुविधाएं मिले। सरकार ने लोककल्याणकारी  योजनाओं का समावेशी लाभ सभी तक पहुंचाकर सर्वसुलभता  सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है ताकि हर किसी को विकास में बराबरी का अवसर मिलें।

डिजिटल माध्यम ने वैश्विक मंच पर देश की नई पहचान बनाई है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की वर्ष 2024 की प्रतिवेदन के अनुसार, यूट्यूब की रचनात्मक पारिस्थितिकी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 16 करोड़ से अधिक का योगदान दिया है। डिजिटल माध्यम भारतीयों के रोजी-रोटी का एक महत्वपूर्ण और स्थाई जरिया हों गए हैं । भारत में एक व्यक्ति औसतन प्रतिमाह 24.1 जीबी डाटा इस्तेमाल कर रहा है। यह दर्शाता है कि इंटरनेट अब  शहरों तक सीमित नहीं रहा; यह ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में जीवन की रीढ़ बन गया है और भारतीयों के सामाजिक ,आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में “अहम भूमिका” निभा रहा हैं 

राष्ट्र- राज्य की मजबूती डिजिटल क्षमता, नवाचार की संस्कृति और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था से मापा जाता है। पिछले एक दशक में देश ने तेजी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है। इससे सरकार के कामकाज, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में नए अवसर बनाएं हैं। “ विकसित भारत 2047”  की  नींव डिजिटल भारत ही है। नवाचार एवं नवोन्मेष समस्याओं को अवसरों में बदलने की शक्ति है। हमारे युवा स्टार्टअप, ड्रोन तकनीकी, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष विज्ञान में महत्वपूर्ण रूप से योगदान दे रहे हैं।

निष्कर्षतः  डिजिटल भुगतान ने भारतीयों का जीवन आसान और सुविधाजनक बना दिया है। इसने रोजमर्रा की परेशानियों को कम किया है और लोगों को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से आगे बढ़ने में सहयोग की है। डिजिटल माध्यम ने ऐसे मंच दिए हैं जिससे हमारी सांस्कृतिक भावनाएं और परंपराएं बढ़ रही हैं। सामयिक में यह कई भारतीयों के लिए “ एक जरूरी सहारा” बन चुका है।

शशांक मणि त्रिपाठी 
सांसद , देवरिया सदर। 

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