स्वतंत्रता के 79 वर्ष : एक मूल्यांकन

Dharmesh Yadav Dharmesh Yadav

भारत ने 79 वर्षों में लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था, विज्ञान-तकनीक, डिजिटल शासन और सामरिक क्षमता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। जानिए विकसित भारत 2047 की दिशा में देश की यात्रा।
भारत की 79 वर्षों की विकास यात्रा और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

नई दिल्लीः भारत ने वर्ष 1947 में औपनिवेशिक शासन से मुक्ति प्राप्त कर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी विकास -यात्रा प्रारंभ की। स्वतंत्रता के समय देश के समक्ष गरीबी, भुखमरी, शिक्षा, स्वास्थ्य- संकट, सीमावर्ती चुनौतियों तथा सामाजिक- आर्थिक विषमताओं जैसे अनेक गंभीर समस्याएं विद्यमान थीं। बदलती वैश्विक व्यवस्था और शीत युद्ध की वैचारिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का अनुसरण करते हुए "गुटनिरपेक्षता" को आधार बनाया और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप अपनी नीतियों के निर्धारण एवं क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी । विगत दशकों में भारत ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, आर्थिक विकास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की दिशा में विस्तार ,वैज्ञानिक तकनीकी प्रगति तथा प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से "उल्लेखनीय प्रगति किया है।" शासन व्यवस्था में  प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोगिता, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) पारदर्शी एवं त्वरित निर्णय प्रक्रिया ने नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को गति प्रदान की है और सरकारी योजनाओं में संसाधनों के अपव्यय एवं रिसाव (लीकेज) को नियंत्रित करने में योगदान दिया है। इन प्रयासों ने भारत की आर्थिक क्षमता को सुदृढ़ करते हुए भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित किया है तथा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में उसकी संभावनाओं को प्रबल किया है।

प्रभावशाली और उत्तरदाई राष्ट्र

समकालीन वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका आर्थिक- शक्ति तक सीमित नहीं है,बल्कि एक  परमाणु शक्ति -संपन्न राष्ट्र के रूप में भारत ने अपनी सामरिक क्षमता को सुदृढ़ किया है। अंतरिक्ष, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा, जैव प्रौद्योगिकी तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में उसकी प्रगति वैश्विक स्तर पर इसकी तकनीकी प्रतिष्ठा को बढ़ा रही है। परिणामत: भारत आज वैश्विक निर्णय -निर्माण की प्रक्रिया में "एक प्रभावशाली और उत्तरदाई राष्ट्र- राज्य के रूप में अपनी भूमिका का निरंतर विस्तार कर रहा है।" इस प्रकार स्वतंत्रता के पश्चात भारत ने आत्मनिर्भरता, लोकतांत्रिक शासन ,आर्थिक विकास, वैज्ञानिक प्रगति और राजनीतिक सहभागिता के आधार पर अपनी वैश्विक स्थिति को सुदृढ़ किया है। भारत की यह यात्रा औपनिवेशिक अधीनता से आत्मविश्वासी, सक्षम और प्रभावशाली वैश्विक शक्ति के रूप में क्रमिक रूपांतरण की "सशक्त गाथा" प्रस्तुत करती हैं।

विकासोन्मुख राष्ट्र 

भारत की स्वतंत्रता की 79 वीं वर्षगांठ केवल स्वतंत्रता का उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमारे आधुनिक इतिहास में विकसित हुए राजनीतिक और संवैधानिक मूल्यों एवं आदर्शोका मूल्यांकन करने का भी शुभ अवसर है। 15 अगस्त, 1947 को भारत ने दमनकारी, अनुत्तरदायी और औपनिवेशिक शासन से मुक्ति प्राप्त किया। स्वतंत्रता के समय कठिन एवं विपरीत परिस्थितियों थी। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया और प्रशासन को लोक कल्याण एवं विकास से जोड़ा। स्वतंत्रता के पश्चात यहसद यात्रा बताती है कि भारत ने अपनी समस्याओं का लोकतांत्रिक तरीके से सामना करते हुए "एक  सशक्त ,उत्तरदाई और  विकासोन्मुख राष्ट्र -व्यवस्था का निर्माण किया।"

विकसित भारत की यात्रा

लोकतंत्र में वास्तविक शक्ति तबउभरती  है जब राजनीतिक स्थिरता ,आर्थिक समृद्धि, तकनीकी नवाचार और वैश्विक प्रभाव एक साथ बढ़ते हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर ही स्थाई और समावेशी विकास संभव है। मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से ही स्थाई और समावेशी विकास संभव है। विकास का आधार सामाजिक समावेशन है, जबकि शासन प्रभावशीलता और उत्तरदायित्व से संचालित होता है। राष्ट्र की समग्र प्रगति उसके सभ्यतागत आत्मविश्वास से भी जुड़ी होती है।"भारत वर्ष 2047" में स्वतंत्रता की शताब्दी वर्ष पूरी करने की दिशा में अग्रसर है। यह यात्रा ऐसे राज्य- शिल्प शासन व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत करती है जिसका  मौलिक उद्देश्य "नागरिकों के समग्र विकास ,कल्याण और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है।"

देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियां राष्ट्र के प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रही हैं।वर्ष 2023 में "चंद्रयान-3 " की ऐतिहासिक सफल लैंडिंग ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता और वैज्ञानिक दक्षता का वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन किया है।वह डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति ने भारत को तकनीकी नवाचार और डिजिटल समावेशन के अग्रणी देशों के पंक्ति में खड़ा किया है। "इन उपलब्धियां की पहचान एक उन्नत, सक्षम और  नवोन्मेषी राष्ट्र के रूप में सुदृढ़ की है।"

वैश्विक उपयोगिता और विश्वसनीयता

समकालीन विश्व में भारत की व्यापक डिजिटल  अवसंरचना और तकनीकी समावेशन के प्रभावी प्रयोगशाला  के रूप में देखा जा रहा हैं।डिजिटल तकनीकी का व्यापक विस्तार न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति दे रहा है, बल्कि शासन और सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच को भी "अधिक सुगम एवं समावेशी बना रहा है।"

कूटनीतिक स्तर पर भी भारत का वैश्विक प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सक्रिय सहभागिता एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी उपस्थिति एवं क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर रचनात्मक पहल ने भारत की भूमिका को नई व्यापकता प्रदान की है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)  जैसी पहल और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में भारत की सक्रिय भागीदारी ने उसकी वैश्विक उपयोगिता और विश्वसनीयता को "और मजबूत" किया है। इस प्रकार विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कूटनीति के संबंध विस्तार के साथ "भारत वैश्विक व्यवस्था में एक सक्षम ,उत्तरदाई और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में अपने भूमिका का उन्नयन कर रहा है।"

आर्थिक महाशक्ति

स्वतंत्रता के समय भारत मुख्यतः कृषि -आधारित अर्थव्यवस्था वाला देश था। समकालीन में भारत गतिशील एवं विविधीकृत आर्थिक महाशक्ति के रूप में विकसित हो चुका है। राष्ट्र- राज्य तब  बदहाल अर्थव्यवस्था, गरीबी और भुखमरी की चुनौतियों का सामना कर रहा था। तत्कालीन में भारत की साक्षरता दर 18 प्रतिशत और औसत जीवन- प्रत्याशा 32 वर्ष के आसपास थी।" स्वाधीनता के 79 वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है।"  सामयिक में देश की साक्षरता दर 77 प्रतिशत और औसत जीवन- प्रत्याशा 70 वर्ष से अधिक हो चुकी है। कभी अनाज के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भर एवं अपमानजनक शर्तें स्वीकार करने के लिए विवश भारत अब दुनिया के करीब 150 देशों को अनाज एवं कृषि उत्पादों को भेज रहा है।

वैश्विक नेतृत्व

भारत कठिनाइयों को अवसरों में और चुनौतियों को अवसरों में बदल रहा है। इसने लोकतंत्र ,एकता, अखंडता तथा विकास को सुरक्षित रखते हुए आर्थिक प्रगति, तकनीकी सक्षमता और सामरिक क्षितिज का विस्तार किया है। लोकतांत्रिक मजबूती, सामरिक स्वायत्तता, वैज्ञानिक नवाचार और आर्थिक रूपांतरण के जरिए भारत ने समकालीन वैश्विक व्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। भारत विकास ,लोकतंत्र, शक्ति, उत्तरदायित्व ,आधुनिकता तथा परंपरा के बीच  बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।" विकसित भारत 2047" का लक्ष्य एक समृद्ध, नवाचारी ,समावेशी और उत्तरदाई  वैश्विक व्यवस्था बनना है। भारत 21वीं सदी में विकास, लोकतंत्र और समावेशी वैश्विक नेतृत्व का मार्गदर्शक बनेगा।

प्रोफ़ेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी 
चिंतक एवं पूर्व कुलपति 
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।

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