भारत के लिए बड़ा खतरा- क्या बांग्लादेश और पाकिस्तान में समाप्त हो जाएंगे हिंदू?
बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार आ जाने के बाद भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों और हत्याओं की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। हर दिन बदतर होती स्थिति से ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे बचे -खुचे हिन्दुओं को समाप्त करने का अभियान चल रहा हो। पाकिस्तान के हालात तो पहले ही बदतर हैं जहाँ हिंदुओ का कत्लेआम करने के लिए कट्टरपंथियों की भीड़ सड़क पर घूमती रहती है। बांग्लादेश में 2024 -25 में आईएसआई द्वारा बांग्लादेश भेजे गए कट्टर मौलानाओं की आक्रामक तहरीरों से भारत विरोधी वातावरण बना और हिंदू समुदाय पर बर्बर अत्याचार हुए। इसके बाद वहां चुनाव हुए और ताहिर रहमान की सरकार बन गई किंतु हिन्दुओं के हालात नहीं बदले।
तारिक रहमान ने दुनिया को दिखाने के लिए एक अल्पसंख्यक मंत्री तो बना दिया किन्तु परिस्थितियां यूनुस के समय जैसी ही हैं। कट्टरपंथियों ने अब अपना तरीका थोडा बदल लिया है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भगवान श्रीराम की 65 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुँच चुका था जिसे कट्टर मौलानाओं व संगठनों के दबाव केआगे रोक दिया गया । हिंदुओं ने राजधानी ढाका में विशाल प्रदर्शन भी किया किंतु कुछ नहीं हुआ और उल्टे प्रभु श्रीराम की प्रतिमा का निर्माण करा रहे संत को फर्जी मुकदमे में जेल भेज दिया गया।
बांग्लादेश के रंगपुर शहर में एक हिंदू परिवार के चार सदस्यों की उनके ही घर में हत्या कर दी गई। एक सेवानिवृत्त शिक्षक गणपति चक्रवर्ती द्वारा आरोपितों को अपने घर की छत पर नशा करने से मना करने पर आरोपितों ने उनको परिवार सहित मौत के घाट उतार दिया। बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ती ही जा रही है। इस घटना के बाद ही चांदपुर से पिंटू दास, उनकी पत्नी और दो बेटों के गायब होने की खबर आ गई, इस परिवार के भी मारे जाने की आशंका है।
पहले भी होते रहे हैं हमले
चाहे पहले का पूर्वी पाकिस्तान रहा हो या 1971 में भारत की सहायता से बना बांग्लादेश अल्पसंख्यक हिंदुओं के प्रति हिंसा होती ही रही है, भारत समर्थक मानी जाने वाली शेख हसीना की सरकार में भी हिंदुओं पर हमले होते थे किंतु अब परिस्थितियां दिन प्रति दिन भयावह होती जा रही हैं और ऐसा लग रहा है कुछ समय में बांग्लादेशी हिन्दू केवल कहानियों के किरदार रह जायेंगे।
1971 के युद्ध के दौरान हिंसा, 1990 के दंगे, 2001 के चुनाव के बाद हिंसा और 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हुए 200 से अधिक हमलों ने अल्पसंख्यक हिंदू समाज में असुरक्षा की भावना को हर बार पहले से अधिक बढ़ा दिया है और उनकी संख्या पहले से कम कर दी है। 1971 में जब भारतीय सेनाओं की सहायता से बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ तब वहां की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 20 से 22 प्रतिशत के करीब हुआ करती थी और उनकी संख्या 1 करोड़ से 1.5 करोड़ के बीच आंकी गई थी।
1971 में बड़े पैमाने पर विस्थापन और पलायन हुआ जिसमें हिंदू समुदाय को भारी क्षति उठानी पड़ी। स्वतंत्र बांग्लादेश की पहली जनगणना 1974 में कराई गई तब हिंदुओं की जनसंख्या 22 प्रतिशत से घटकर 13.5 प्रतिशत पर आ गई।1981 की जनगणना में हिंदू आबादी 12.1 प्रतिशत रही, 1991 में यह गिर कर 11.5 प्रतिशत पर पहुँच गई । 2001 की जनगणना में हिदुओं की जनसंख्या घटकर 9.3 रह गई। 2011 में यह और गिर गई तथा मात्र 8.5 प्रतिशत रह गई जबकि 2022 की जनगणना में हिंदुओं की आबादी सिमटकर 8 प्रतिशत रह गई जो इसके बाद हुई घटनाओं के बाद निश्चित रूप से तेजी से नीचे आई होगी।
जनगणना में चौंकाने वाले खुलासे
इसके विपरीत बांग्लादेश में बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी के प्रतिशत में लगातार वृद्धि हुई। 1974 में मुस्लिम आबादी 85.4 प्रतिशत थी जो 2011 की जनगणना तक बढ़कर 91.5 प्रतिशत तक पहुँच गई थी। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लगातार सिकुड़ने के अनेकानेक संस्थागत, ऐतिहासिकऔर सामाजिक कारण हैं। पाकिस्तान की ही तरह बांग्लादेश भी हिंदुओं को डरा- धमकाकर धर्मांतरित होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बांग्लादेश में भी कट्टरपंथ का बोलबाला हो गया है जो इतना अधिक है कि हिन्दू स्त्रियाँ अपनी सनातन संस्कृति के अनुरूप श्रृंगार तक नहीं कर सकती हैं । हिंदू बांग्लादेश पलायन करने को मजबूर किए जा रहे हैं।
बढ़ते कट्टरपंथ के कारण बांग्लादेश में हिंदुओं के प्रति जातीय नफरत भयानक रूप से बढ़ी है जिसके कारण अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से लगातार अल्पसंख्यक हिंदुओे पर हमले हो रहे हैं और उनको क्रूरतम तरीकों से मारा जा रहा है। दो वर्ष में हिंदुओ पर 2,711 हमले हुए हैं जिसमें 62 हत्याएं हुई मंदिरों पर 133 हमले व जमीन हड़पने के 47 मामले दर्ज हुए हैं। दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के शुरुआती 13 दिनों में ही 8 से अधिक हिंदुओ की हत्या हो चुकी थी।
भारत विरोधी सोच
वर्तमान तारिक रहमान सरकार पूरी तरह कट्टरपंथी समूहों के समर्थन से बनी और चल रही है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान स्वयं भी भारत विरोधी हैं। तारिक रहमान की तमन्ना पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब, तुर्किए द्वारा बनाए जा रहे इस्लामिक नाटो संगठन में शामिल होने की है। बांग्लादेश भारत के खिलाफ साजिशें रच रहा है। खुफिया एजेंसियों द्वारा कहा जा रहा है कि आगामी समय में बांग्लादेश भारत के लिए पाक और अफगान से अधिक खतरनाक हो जाएगा और अब खतरनाक आतंकवादी बांग्लादेश से आएंगे अतः भारत के लिए हर मोर्चे पर अधिक सावधानी बरतने का समय चल रहा है। बांग्लादेश सरकार ने शेख हसीना की वापसी को राजनीतिक हथियार बनाया है, यही कारण है कि भारत ने पहली बार दिनेश त्रिवेदी जैसे नेता को राजनयिक बनाकर भेजा है । परिस्थितियां विकट हैं, बांग्लादेश के हिन्दुओं को अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए अपने भारतीय भाई-बहनों के साथ और सहयोग की आवश्यकता है।
मृत्युंजय दीक्षित
अन्य प्रमुख खबरें
-
वन्दे मातरम्: राष्ट्रीय चेतना से विकसित भारत 2047 के संकल्प तक
2026-08-30
-
युवाओं का शांतिपूर्ण विरोध और संवैधानिक अधिकार
2026-08-22
-
भारत की 79 वर्षों की विकास यात्रा और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
2026-08-16
-
सावन का महीना सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित है या इसके पीछे कोई गहरा विज्ञान छिपा है?
2026-08-16
-
विकसित भारत 2047: युवा शक्ति की भूमिका
2026-08-09
-
370 के 7 साल: कितना बदला कश्मीर?
2026-08-05
-
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार
2026-08-03
-
हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत
2026-07-20
-
डिजिटल भारत: वैश्विक मंच पर नई पहचान
2026-07-14
-
पंच परिवर्तन’ : राष्ट्रोत्थान और सामाजिक नव-जागरण का महामंत्र
2026-07-09
-
Critical Mineral Mission: धरती की गहराई से वैश्विक कूटनीति तक, भारत की नई रणनीतिक छलांग
2026-07-07
-
‘बांग्लादेश में संगठित होता हिंदू समाज’
2026-07-04
-
‘घुसपैठ : सामयिक समस्या और इसका समाधान’
2026-07-03
-
पंच परिवर्तन और विकसित भारत का संकल्प
2026-07-02
-
संघ का लक्ष्य परम वैभवशाली भारत
2026-06-29