डिजिटल अरेस्ट में बुजुर्ग दंपति से 22 लाख की ठगी, सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश भेजा

खबर सार :-

डिजिटल अरेस्ट में बुजुर्ग दंपति से 22 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। इसमें ठगों ने सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश बनवा कर भेजा। कई विभागों की जांच कराने के साथ जान को खतरा बताकर मामला अपने पाले में बनाए रखा।
डिजिटल अरेस्ट में बुजुर्ग दंपति फंसा, 22 लाख की ठगी, देश का अब तक का बड़ा मामला

खबर विस्तार : -

भोपाल: डिजिटल अरेस्ट की लंबी आपराधिक प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अबकी बार भोपाल के एक बुजुर्ग दंपति साइबर ठगों के फैलाए जाल में फंस गया। इसको सीआईडी, ईडी यहां तक की सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर 3 महीने से ज्यादा दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। दंपति से करीब 22 लख रुपए ठग लिए। दंपति की  बेटी की सहेली ने जब डिजिटल अरेस्ट का खेल बताया तो उन्होंने अब कानून का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

3 महीने से झांसे और भय में रखा था

भोपाल के एक दंपति को साइबर ठगांे ने 3 महीने से अपनी इच्छानुसार झांसे और भय में रखा था। ईडी, दिल्ली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट के नाम पर इतना भय पैदा किया कि पढ़ा लिखा दंपति उनके जाल से निकल नहीं पाया। ठगों से बचने के लिए दंपति छटपटाता रहा। बस इधर-उधर के चक्कर काटता रहा। यहां तक कि उसने हवन पूजन और धार्मिक अनुष्ठान भी करवाए, लेकिन उसे जलसाजों से मुक्ति नहीं मिली। करोड़ों रुपए की कथित मनी ट्रांजैक्शन और जेट एयरवेज के नरेश गोयल से जुड़े मामले का डर दिखाते हुए परेशान किया गया। गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने की धमकी देते रहे। इसी बहाने से दंपती के गहने, रुपए ले लिए। 

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गहने गिरवी रख पैसे जलसाज को दिया

करीब 3 महीने से यह मामला चल रहा था, लेकिन उसने अपनी दास्तान किसी को नहीं बताई। यह जानकारी केवल उसकी बेटी को थी। गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त होने के दर से दंपती ने अपने गहने गिरवी रख दिए और बदले में मिले पैसे को जलसाज के खाते में जमा कर दिया। पुलिस अब इस मामले को सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट का मामला मान रही है। 65 वर्षीय सुवर्णा लक्ष्मी अपने पति नरसिम्हा राव के साथ कोलार स्थित गणपति एनक्लेव में रहती हैं। सुवर्णा पहले कभी एक निजी स्कूल का संचालन करती थी और उनके पति एक निजी कंपनी के वित्त विभाग से सेवानिवृत हैं।

 दिल्ली थाने का अधिकारी बताया

फरवरी महीने में दोनों आंध्र प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव में रहने के लिए गए थे। एक दिन अचानक सुवर्णा के मोबाइल पर किसी अनजान व्यक्ति ने कॉल किया था। इसने अपने आप को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि वह एक खन्ना नाम का अधिकारी है और दिल्ली के केनरा बैंक का हवाला देते हुए कहां कि उनके खाते के जरिए जेट एयरवेज की नरेश गोयल से जुड़े मामले में करोड़ों का लेनदेन किया गया है। दंपति आश्चर्य में पड़ गया।

इसी दौरान जालसाजों ने दोनों को गिरफ्तारी का डर दिखाया और सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करने के लिए कहा। उन्होंने खुद ही वीडियो कॉल करने के लिए मजबूर कर दिया। यह मामला कहीं से भी उछाला ना सके इसलिए अति गोपनीय मामला बता कर बार-बार शांत कराया। दंपति को चेतावनी दी गई कि यह संवेदनशील मामला किसी को बताने पर उनकी बड़ी मुसीबत बन सकता है। यहां तक की दंपति के पास जान से मारने की धमकी का फोन भी आया।

दंपति आंध्र प्रदेश से भोपाल लौट आया

इस मामले में ठगी ग्रुप में महिलाएं भी हैं। दो दिन पहले भी एक फोन किया गया था। इसमें महिला ने अपने आप को सीआईडी की मुख्य जांच अधिकारी बताया था। फोन में बातचीत के दौरान ही दंपति से तमाम तरह की जानकारियां भी ले लीं। इन जानकारी में बैंक खातों नंबर लेनदेन आदि का डिटेल भी पूछा।

इसके बाद फर्जी तरीके से एक व्यक्ति ने आदेश बनवाया। 9 जून को इसे भेज कर 22 लाख रुपए की मांग की। इसमें कोर्ट के हवाले से कहा गया था कि सोना चांदी और एफडी आदि हटाकर 22 लख रुपए तत्काल जमा करें। दंपति बेहद परेशान था। इसलिए वह आंध्र प्रदेश से भोपाल लौट आए। 12 जून को उन्होंने अपने गहने गिरवी रख दिए और रुपए लोन आदि के जरिए खाते में जमा कराया।

बेटी की सहेली है सुप्रीम कोर्ट में वकील 

खेल इतने पर भी खत्म नहीं हुआ। रकम लेने के बाद भी जांच का भय दिखाकर जेल भेजने का दर दिखा दिया। अब घबराए हुए दंपति की परेशानी को उनकी बेटी ने बेहद गंभीर माना और इसे अपनी एक सहेली को बताया। उसकी सहेली इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही है। उसने जब जब्ती आदेश पढ़ा तो उसे यकीन हो गया कि मामला फर्जी है। यह ठगी का बनता है और इसमें साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपति से लाखों रूपये ले लिए। 23 अगस्त की रात कोलार थाने पहुंचकर इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है। 

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