भारत में सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष मर जाते हैं 2 लाख से अधिक लोग
खबर सार :-
रीवा में उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्ति न्यायाधीश जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने कहां की सड़क हादसों में 2 लाख से अधिक मौत भारत में प्रतिवर्ष हो रही है। साथ ही लाखों लोग घायल होते हैं।
खबर विस्तार : -
रीवां: भारत में जिस गति से सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, वह चिंताजनक है। इन सड़क दुर्घटनाओं के संबध में रीवा में एक बैठक की गई। इस बैठक में बीते पांच वर्ष की सड़क दुर्घटनाओं का प्रति वर्ष आधारित विश्लेषण किया गया। इसके बाद बताया गया कि यदि हम सभी चाह लें तो सड़क दुर्घटनाएं कम होंगी।
2025 में फिर दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ गई
बैठक में बताया गया कि पांच सालों की समीक्षा में यह बात सामने आई है कि सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष कमी आई है, लेकिन 2025 में फिर उसी गति से दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ भी गई। बैठक में कई संभ्रांत और उच्च पदों पर आसीन लोगों को बुलाया गया था। यहां बताया गया की सर्वाधिक दुर्घटनाएं दो पहिया वाहन से हो रही हैं और इसमें भी ओवरटेकिंग या फिर ज्यादा स्पीड को कारण बताया है। रीवा में इस आयोजन के दौरान उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्ति न्यायाधीश जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने कहां की 2 लाख से अधिक मौत भारत में प्रतिवर्ष हो रही है। साथ ही लाखों लोग घायल होते हैं। प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं चिंताजनक हैं।
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जस्टिस सप्रे ने मध्य प्रदेश की रीवा प्रवास के दौरान कलेक्टर कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट ऑड रोड सेफ्टी कमेटी में संबोधित कर रहे थे। बता दें की इस आयोजन का उद्देश्य भारत में सड़क दुर्घटनाओं में कमी और जागरूता लाना था। मध्य प्रदेश की रीवा में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या काफी है। इसलिए यहां शहर में यह बैठक की गई। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारियों से अपील भी की गई। जो भी दुर्घटनाओं के कारण हो सकते हैं, उनमें स्पीड, यातायात नियमों का पालन, ब्लैक स्पॉट, खराब सड़क, नशे में वाहन चलाना और इसके अलावा कई अन्य कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। पूर्व न्यायाधीश ने कहा की पुलिस अधिकारी हर सड़क दुर्घटना पर विश्लेषण करें। इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि जहां दुर्घटना हो, उसका मूल कारण पता करें।
जनहित याचिका 2013 में दायर की गई थी
इसमें वाहन की क्या भूमिका रही? वाहन के आकार प्रकार और कंडीशन का भी जिक्र होना चाहिए। बड़ी संख्या में हादसों पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ अंकुश लगाया जा सकता है। इससे वाहन दुर्घटनाएं कम होंगी। पशुओं को भी दुर्घटना का कारण बताया गया है। उन्होंने कहा कि यदि हम सभी सुधार करने का प्रयास करें तो इस तरह से 50 फीसदी तक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। पूर्व न्यायाधीश सप्रे ने कहा की उच्चतम न्यायालय में सड़क दुर्घटना रोकने के लिए जनहित याचिका 2013 में दायर की गई थी। अदालत ने इसको संज्ञान भी लिया था और सड़क दुर्घटनाओं की निगरानी शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया की यातायात के नियमों का पालन कड़ाई से किया जाए, सुरक्षा के उपायों पर ध्यान देना जरूरी है। इससे दुर्घटनाएं कम हो सकती हैं।
एक महत्वपूर्ण बात उन्होंने यह बताई की दुर्घटना में पीड़ितों की तत्परता से उपचार कराया जाना जरूरी है। सहायता समय पर मिलने से मौत कम की जा सकती हैं। जस्टिस सप्रे ने विश्लेषण में इस कमी को शामिल किया तो लोगों में एक नई चेतना आ गई। कई वाहन दुर्घटनाओं में देखा गया कि घायल सड़क पर तड़पता रहता है। उसे समय पर इलाज नहीं मिल पाता है और उसकी मौत हो जाती है। सड़कों पर अक्सर वाहन चेकिंग की जाती है। इस दौरान हेलमेट न लगने वाले का चालान किया जाता है। इसमें कम उम्र वाले बच्चों को भी रोका जाता है और हिदायत देने या उनके परिजनों के गलती मानने के बाद ही छोड़ा जाता है। इस संबंध में विश्लेषण के दौरान कहा गया की नियमों का पालन किया जाना चाहिए सड़क निर्माण से जुड़े विभाग चिन्हित ब्लैक स्पॉट तत्काल सुधारें।
कानूनी प्रक्रिया के कारण लोग मदद से पीछे रह जाते
इसमें यह उल्लेख करना जरूरी है कि कानूनी प्रक्रिया के कारण भी लोग मदद करने से पीछे रह जाते हैं। जस्टिस सप्रे ने कहा कि कलेक्टर जिलों के दुपहिया वाहन प्रयोग करने वाले सभी शासकीय कर्मियों को हेलमेट पहनना अनिवार्य करें। सड़कों की स्थिति काफी दयनीय दिखती है। भारत में हर प्रदेशों में कई सड़कें गड्ढा युक्त रहती है। जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इनको तत्काल सही कराएं। जिन स्थानों पर दुर्घटनाओं की आशंका ज्यादा रहती है, वहां पर स्पीड ब्रेकर बनाए जाने चाहिए। वह कोई भी हाईवे हो, शहरी या ग्रामीण सड़क हो। बैठक में सड़क सुरक्षा समिति की जिम्मेदारियां को भी उठाया गया।
बेसहारा पशुओं को हटाने के लिए प्रभावी उपाय करें
बताया गया इन्हें चाहिए कि वह हर महीने बैठक करें और नियमों को कठोरता से लागू कराएं। बेसहारा पशु सड़कों पर अक्सर आ जाते हैं और इससे वाहन टकरा जाते हैं। इस कारण कई हादसे होते रहते है, इसलिए यह जरूरी है कि बेसहारा पशुओं को हटाने के लिए प्रभावी उपाय करें। हादसों की बढ़ रही संख्या पर आयोजित कार्यक्रम में रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि सड़क सुरक्षा समिति की हर माह बैठक आयोजित की जाती है। इस बैठक के जरिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है। रीवा के संबंध में उन्होंने बताया कि जिले में तीन ब्लैक स्पॉटों में सड़क में सुधार किया गया है। कई स्थानों का नाम भी उन्होंने लिया और बताया कि उन स्थानों पर दुर्घटनाएं रोकने की कोशिश है जारी है। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक डॉक्टर गुरु करण सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा है की सभी अधिकारी संवेदनशील हैं और वह हादसे से रोकने के लिए प्रयास भी करते हैं, जहां कमियां रह जाती हैं, उनको दूर करने की बराबर कोशिश की जाएगी।
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