उच्चतम न्यायालय ने कहा: नए फॉर्म 6 को न मंजूरी दी है और न खारिज किया, कोर्ट को राजनीति से दूर रखें
खबर सार :-
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उसने निर्वाचन आयोग के नए फॉर्म 6 को न मंजूरी दी है और न खारिज किया। साथ ही कोर्ट को राजनीति से दूर रखने की अपील की।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि उसने निर्वाचन आयोग के नए फॉर्म 6 को न तो मंजूरी दी है और न ही खारिज किया है। मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह बात कही। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने निर्देश दिया कि उसकी पिछली टिप्पणियों का गलत अर्थ न निकाला जाए।
यह मामला तब सामने आया जब सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने पक्ष रखते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग यह बता रहा है कि नए फॉर्म-6 को उच्चतम न्यायालय की स्वीकृति मिल चुकी है। इस पर पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया कि जब बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले पर सुनवाई हुई थी, तब नया फॉर्म-6 अस्तित्व में आया ही नहीं था। न्यायालय ने कहा कि इस पूरे मुद्दे को उसके संज्ञान में लाया गया है और अब इस पर मुख्य याचिकाओं के साथ आगामी 27 अक्टूबर को विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस के खिलाफ एक अन्य याचिका
इसके अतिरिक्त, अदालत मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई कर रही थी। इस पर उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि इस याचिका को इसी प्रकार की अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ टैग कर दिया जाए।
राजनीतिक मुद्दों से दूर रहने की अपील
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से दायर याचिका की मेंशनिंग के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को राजनीतिक मुद्दों में नहीं घसीटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक गतिविधियां अपनी जगह पर होनी चाहिए, लेकिन इससे उच्चतम न्यायालय की कार्यप्रणाली प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
चीफ जस्टिस ने बताया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से भी यह अपील की है कि अदालत को राजनीतिक बहसों या मुद्दों का अखाड़ा न बनाया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि इंटरनेट की पहुंच में कोई बाधा न आए और न ही न्यायालय की कार्यवाही या उसके परिसर में प्रवेश करने में किसी प्रकार की रुकावट पैदा हो।
आगे की न्यायिक कार्रवाई
एससीबीए ने अदालत को यह स्पष्ट किया कि वकील अदालत की कार्यवाही में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं होने देंगे। इस बीच, वकीलों के प्रवेश में कथित रुकावट डालने और उनके साथ मारपीट किए जाने के आरोपों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसी दिन प्रदर्शनकारियों की हिरासत से जुड़े अन्य सभी मामलों पर भी एकसाथ सुनवाई की जाएगी।
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