राम मंदिर चढ़ावा मामला: SIT रिपोर्ट के बाद FIR, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे से सियासी हलचल तेज
खबर सार :-
राम मंदिर चढ़ावा मामले में प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे अयोध्या की राजनीतिक और धार्मिक हलचल और तेज हो सकती है।
खबर विस्तार : -
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे प्रकरण ने जोर पकड़ लिया है। इसी बीच सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों पदाधिकारियों पर आरोपों के बीच नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का दबाव बढ़ रहा था। इसी कारण उन्होंने अपने-अपने पदों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सीएम योगी ने दिए थे निर्देश
इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जैसे ही आरोप सामने आए थे, सरकार ने तत्काल एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
गौरतलब है कि गुरुवार देर रात मंदिर प्रशासन से जुड़े कर्मचारियों, नकदी गिनने वाले स्टाफ और कुछ पूर्व बैंक अधिकारियों सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि इन सभी ने आपसी मिलीभगत से मंदिर की दान राशि का कथित रूप से गबन किया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
आठ आरोपियों के नाम आए सामने
गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के नाम शामिल हैं। सभी पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है, जिनमें बीएनएस की धाराएं 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) शामिल हैं।
एसआईटी के प्रमुख सदस्य और लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि टीम ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसमें कई गंभीर संस्तुतियां शामिल हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
हालांकि, इस मामले में एफआईआर और गिरफ्तारियों के बावजूद कई सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित क्यों रही और उच्च पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही अभी तक स्पष्ट क्यों नहीं की गई।
एसआईटी ने सौंपी थी रिपोर्ट
इसी बीच ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे को इस मामले का बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इसे नैतिक जिम्मेदारी से जुड़ा कदम बताया जा रहा है, हालांकि विपक्ष इसे प्रशासनिक दबाव और जांच के बढ़ते दायरे से जोड़कर देख रहा है।
14 जून को उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था, जिसे दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच सौंपी गई थी। जांच के आगे बढ़ने के साथ ही कई नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक हलचल तेज
इसी बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि केवल इस्तीफों से मामला समाप्त नहीं होता, बल्कि पूरे ट्रस्ट की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े स्तर के जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी कहा कि यह मामला केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं हो सकता। यदि हजारों करोड़ रुपये के दान में अनियमितता हुई है, तो इसकी गहराई से जांच जरूरी है।
वहीं राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला बेहद गंभीर है और इसमें बड़े नाम सामने आने की संभावना है। उन्होंने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उधर, सरकारी सूत्रों के अनुसार दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया है। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे में कुछ कर्मचारियों और बैंकिंग सिस्टम से जुड़े लोगों की मिलीभगत से अनियमितताएं हुई हैं।
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