फ्लाईदुबई विमान में भारतीय कप्तान पर हमले और हाईजैक की साजिश की जांच करेगी NIA, UAPA के तहत केस दर्ज

खबर सार :-

फ्लाईदुबई की तेल अवीव जा रही उड़ान में भारतीय कप्तान पर कथित हमले और विमान हाईजैक की साजिश के मामले में NIA ने एंटी-हाइजैकिंग एक्ट और UAPA के तहत FIR दर्ज की है।
भारतीय कप्तान पर हमले के मामले में NIA की एंट्री

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: इजरायल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान में भारतीय कप्तान पर कथित हमले और विमान को हाईजैक करने की साजिश के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी ने इस मामले में एंटी-हाइजैकिंग एक्ट, 2016 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। जांच एजेंसी अब इस घटना के पीछे कथित साजिश, संभावित आतंकी मंशा और आरोपी के किसी चरमपंथी नेटवर्क से संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा केवल विमानन सुरक्षा तक सीमित नहीं है। NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित हमला किसी व्यक्तिगत मंशा का परिणाम था या इसके पीछे किसी व्यापक साजिश अथवा आतंकी नेटवर्क की भूमिका थी।

एंटी-हाइजैकिंग एक्ट और UAPA के तहत मामला दर्ज

NIA की FIR में एंटी-हाइजैकिंग एक्ट, 2016 की धारा 3 शामिल की गई है। यह कानून बल प्रयोग, धमकी या भय पैदा करके विमान का अपहरण करने अथवा उस पर अवैध रूप से नियंत्रण हासिल करने जैसे कृत्यों से संबंधित है। इसके अलावा, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत भी जांच की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, FIR में UAPA की धारा 16, 18 और 20 का उल्लेख है। इन प्रावधानों के तहत कथित आतंकी कृत्य, आतंकवादी गतिविधियों की साजिश और आतंकवादी संगठन से संभावित जुड़ाव जैसे पहलुओं की जांच की जा सकती है। धारा 18 आतंकवादी गतिविधियों की साजिश और उनसे संबंधित तैयारी जैसे पहलुओं से जुड़ी है, जबकि धारा 20 किसी आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित है। वहीं, धारा 16 आतंकवादी कृत्यों के लिए दंड का प्रावधान करती है। हालांकि, इन धाराओं को शामिल किया जाना आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं है। मामले में आरोपी की भूमिका और कथित साजिश की प्रकृति का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

UAE के अटॉर्नी जनरल ने किया कथित साजिश का खुलासा

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अटॉर्नी जनरल हामद सैफ अल शम्सी के अनुसार, फ्लाईदुबई के सह-पायलट हमाम अल हमामी पर विमान को अपने नियंत्रण में लेने और उसे इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट टर्मिनल से टकराने की योजना बनाने का आरोप है। UAE की सरकारी समाचार एजेंसी WAM के मुताबिक, 29 वर्षीय ओमानी नागरिक ने कथित तौर पर 30 सितंबर को इस योजना को अंजाम देने की कोशिश की थी। जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि आरोपी इससे पहले दो बार तेल अवीव की उड़ान भर चुका था। कथित तौर पर इन यात्राओं का उद्देश्य उड़ान के मार्ग और एयरपोर्ट से जुड़ी जानकारी हासिल करना था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और कथित योजना के सभी पहलुओं का निर्धारण संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ही हो सकेगा।

कॉकपिट में क्रैश एक्स से हमले का आरोप

जांच के अनुसार, घटना के समय विमान की कमान भारतीय कप्तान स्मित मच्छर के हाथ में थी। आरोप है कि सह-पायलट ने कॉकपिट के भीतर क्रैश एक्स से कप्तान पर हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि कप्तान ने हमले का मुकाबला किया। इस दौरान रिजर्व पायलट, केबिन क्रू और कुछ यात्रियों ने भी हस्तक्षेप किया। उनके हस्तक्षेप से कथित तौर पर विमान को हाईजैक करने की कोशिश विफल हो गई। घटना के दौरान कप्तान के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, हमले से जुड़ी परिस्थितियों और सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया विमान

कप्तान के घायल होने के बाद रिजर्व पायलट ने विमान की कमान संभाली। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। इस कार्रवाई से संभावित बड़े विमानन हादसे को टालने में मदद मिली। घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित आरोपी ने अकेले योजना बनाई थी या उसे किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन से सहायता मिली थी। संभावित कट्टरपंथीकरण, संपर्कों और किसी आतंकवादी नेटवर्क से संबंधों की भी जांच की जा रही है।

आतंकी साजिश के एंगल से जांच

NIA की जांच का एक प्रमुख पहलू कथित घटना के पीछे की मंशा का पता लगाना है। एजेंसी यह भी जांच सकती है कि आरोपी की पूर्व यात्राओं और कथित योजना के बीच क्या संबंध था तथा क्या विमान और एयरपोर्ट से जुड़ी जानकारी जुटाने के पीछे कोई सुनियोजित उद्देश्य था। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्षों से अलग करके देखना जरूरी है। आरोपी की कथित मंशा, संभावित आतंकी संबंधों और विमान पर नियंत्रण हासिल करने की योजना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के जरिए होगी। 

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