स्मित मच्छार को इजरायल देगा सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान, अमेरिका ने भी किया ये ऐलान

खबर सार :-

फ्लाईदुबई फ्लाइट में हमले के बावजूद 172 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को इजरायल का सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान मिलेगा। अमेरिका भी कांग्रेसनल रिकॉर्ड में उनकी बहादुरी दर्ज करेगा।
172 लोगों की जान बचाने पायलट स्मित मच्छार को सम्मान

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: फ्लाईदुबई की एक उड़ान में गंभीर हमले का सामना करने के बावजूद यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इजरायल ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान 'प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड फॉर सिविलियन हीरोइज्म' से सम्मानित करने की घोषणा की है। वहीं, अमेरिका भी उनकी बहादुरी को प्रतिनिधि सभा के आधिकारिक रिकॉर्ड यानी 'कांग्रेसनल रिकॉर्ड' में दर्ज कर सम्मानित करेगा। भारत में इजरायली दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग की घोषणा की जानकारी दी। इस घोषणा के बाद कैप्टन मच्छार की बहादुरी और संकट की घड़ी में उनके धैर्य की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है।

इजरायल के राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित

इजरायली दूतावास की पोस्ट के अनुसार, कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी और साहस ने एक बड़ी त्रासदी को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग उनके पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें नागरिक वीरता पुरस्कार प्रदान करेंगे। दूतावास ने अपने संदेश में कैप्टन मच्छार के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना भी की। संदेश में कहा गया कि इजरायल उनकी बहादुरी को सलाम करता है। यह सम्मान उस असाधारण साहस के लिए दिया जा रहा है, जो उन्होंने विमान में सवार यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिखाया।

फ्लाईदुबई की उड़ान में क्या हुआ था?

यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड 1073 में हुई थी। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। घटना के दौरान विमान तेजी से नीचे आया। अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति के बयान के अनुसार, विमान महज 30 सेकंड में लगभग 16,000 फीट नीचे आ गया था। इस दौरान स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और विमान में सवार यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई थी। ऐसे मुश्किल हालात में कैप्टन मच्छार ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने किसी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने और उसे खोलने में सफलता हासिल की। इससे यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों को अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने का अवसर मिला।

गंभीर चोटों के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता

कैप्टन मच्छार की बहादुरी इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि वह खुद जानलेवा हमले का सामना कर रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। राजा कृष्णमूर्ति के बयान के मुताबिक, कैप्टन मच्छार को एहसास था कि विमान में सवार सभी लोगों की जिंदगी उनके अगले कदम पर निर्भर कर सकती है। अपने लंबे उड़ान अनुभव और परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने जोखिम उठाया और कॉकपिट तक पहुंचने का फैसला किया। उनकी इस सूझबूझ और दृढ़ निश्चय ने विमान में मौजूद अन्य लोगों को हस्तक्षेप करने का मौका दिया। इससे एक संभावित बड़े विमान हादसे को टालने में मदद मिली।

दो रिजर्व पायलटों ने संभाली विमान की कमान

कॉकपिट में स्थिति पर नियंत्रण पाने के प्रयास के बाद विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दो रिजर्व पायलटों ने कमान संभाली। उन्होंने विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबूक में उतारा। अमेरिकी सांसद के बयान के अनुसार, विमान में कुल 172 यात्री सवार थे। इनमें चार अमेरिकी नागरिक और 27 बच्चे भी शामिल थे। इस तरह विमान में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद थे, जिनकी सुरक्षा उस समय उत्पन्न संकट से सीधे प्रभावित हो सकती थी। कैप्टन मच्छार के साहस और अन्य चालक दल के सदस्यों की कार्रवाई ने सभी यात्रियों की सुरक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभाई।

अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति भी करेंगे सम्मान

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने भी कैप्टन मच्छार की बहादुरी को मान्यता देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी कांग्रेस के आधिकारिक रिकॉर्ड में कैप्टन के साहस और उनके योगदान की सराहना करते हुए बयान दर्ज कराएंगे। कृष्णमूर्ति ने अपने साथी सांसदों से भी कैप्टन मच्छार की बहादुरी का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने उन परिवारों का उल्लेख किया, जिनके अपने इस घटना में सुरक्षित बच गए। सांसद के मुताबिक, कैप्टन मच्छार ने अपनी जान पर गंभीर खतरा होने के बावजूद विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। उनकी सूझबूझ, दृढ़ता और साहस ने चालक दल को हमले को रोकने तथा संभावित त्रासदी टालने का अवसर दिया।

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